• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

अमरीकी सेना इतना वायग्रा क्यों ख़रीदती है?

By Bbc Hindi

अमरीकी सेना में ट्रांसजेंडर लोगों की भर्ती बंद करने के बारे में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ट्वीट की काफ़ी आलोचना की जा रही है.

इस बारे में जारी विवाद में बीते कुछ वक़्त से जो दलील दी गई वो ये है कि सेना ट्रांसजेंडर लोगों के स्वास्थ्य पर जो ख़र्च करती है वो बहुत ज़्यादा है.

बीते बुधवार को ट्रंप ने ट्वीट कर कहा था, "मैंने अपने जनरलों और सेना के विशषज्ञों से बात की है. किसी ट्रांसजेंडर के सेना में काम करने को अमरीकी सरकार स्वीकृति नहीं देगी."

उन्होंने लिखा, "भारी मेडिकल ख़र्चे के बोझ तले जीत को स्वीकार नहीं किया जा सकता."

2016: अमरीकी सेना में भर्ती हो सकेंगे ट्रांसजेंडर

अमरीकी सेना में लड़ाकू सैनिक बनेंगी महिलाएं

अमरीकी अख़बार मिलिटरी टाइम्स के अनुसार, इसका नाता इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (सेक्स संबंधित समस्याएं) की दवाओं पर सेना के सालाना 8.4 करोड़ डॉलर के ख़र्चे से जुड़ा है.

हालांकि बीते साल रैंड कॉर्पोरेशन थिंक टैंक ने अनुमान लगाया था कि सेना में ट्रांसजेंडर लोगों के जेंडर बदलने से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ते ख़र्चे के कारण सेना के स्वास्थ्य बजट पर सालाना 84 लाख का बोझ बढ़ जाएगा.

लेकिन अमरीकी सेना आख़िर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन संबंधित दवाओं पर इतना ख़र्च करती ही क्यों है?

मेरे पास क्षमादान की संपूर्ण शक्ति है: ट्रंप

'सीरिया में सिर्फ़ आईएस से लड़ो, असद की सेना से नहीं'

वो जो हो चुके हैं रिटायर

अमरीकी सेना
AFP
अमरीकी सेना

ऊपर दिए गए आंकड़े फरवरी 2015 में छपी मिलिटरी टाइम्स की रिपोर्ट पर आधारित हैं जो कि 2014 के डिफेंस हेल्थ एजेंसी से लिए गए थे.

रिपोर्ट के अनुसार उस साल सेना में इलाज और दवाइयों का खर्च 8.42 करोड़ डॉलर था लेकिन इसमें कहा गया था कि साल 2011 के बाद से वायग्रा और कैलिस जैसी दवाओं पर 29.4 करोड़ डॉलर का ख़र्चा हुआ है.

बताया गया था कि इतने दाम में कई लड़ाकू विमान खरीदे जा सकते थे.

साल 2014 में 11.8 लाख दवाई के पर्चे लिखे गए जिनमें से अधिकतर वायग्रा के लिए थे. लेकिन ये आख़िर थे किसके लिए, ये पता लगाने के लिए इस पूरे ख़र्चे को हमें शुरू से समझना होगा.

राष्ट्रपति कार्यालय और वायग्रा की 400 गोलियां

धड़ल्ले से बन और बिक रही नकली वायग्रा से सावधान !

वायग्रा
Getty Images
वायग्रा

ये सच है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से संबंधित दवाओं के लिए लिखी गई पर्चियों में से कुछ ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए थीं.

लेकिन इसमें से अधिकतर का इस्तेमाल दूसरे लोग करते हैं जिनमें सेना से रिटायर हुए जवान और उनके परिवारों के लोग शामिल हैं.

एक अनुमान के मुताबिक़ साल 2012 में लगभग 1 करोड़ लोग सेना की स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठा रहे थे.

अधिक उम्र के पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या होना आम बात है- सेना के भारी मेडिकल खर्चे की एक बड़ी वजह भी यही है.

मिलिटरी टाइम्स के अनुसार ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए 10 फ़ीसदी से भी कम पर्चियां लिखी गई थीं.

लेकिन ये भी सच है कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध शुरू होने के बाद अमरीकी सेना में काम कर रहे लोगों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के मामले अधिक देखने को मिले हैं.

'महिलाओं के लिए वायग्रा' को मंज़ूरी

भारतीय महिलाओं के काम आएगी 'वायग्रा'?

'मानसिक कारण'

अमरीकी सेना
LANCE CPL. JAMES B. HOKE/AFP/Getty Images
अमरीकी सेना

साल 2014 में में आर्म्ड फोर्सेस हेल्थ सर्विलांस ब्रांच ने 2004 से 2013 के बीच सेना में काम कर रहे पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के मामलों का अध्ययन किया था.

इस रिपोर्ट के अनुसार करीब 1 लाख कर्मचारियों को ये समस्या थी और उस समय ऐसे मामलों में 'हर साल' इज़ाफा हो रहा था.

इस अध्ययन के मुताबिक लगभग आधे ऐसे मामलों के लिए मानसिक कारण ज़िम्मेदार थे.

2015 में जर्नल ऑफ़ सेक्शुअल मेडिसिन ने एक अध्ययन के नतीजे प्रकाशित हुए थे जिसके अनुसार डिपार्टमेंट ऑफ़ वेटेरन अफेयर्स का कहना है कि "आम लोगों की तुलना में तनाव का दौर झेल चुके पुराने पुरुष सिपाहियों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और सेक्स संबंधित समस्याएं होने की आशंकाएं अधिक हैं".

एक अध्यन के अनुसार युद्ध में हिस्सा से चुके और तनाव का सामना कर चुके 85 फ़ीसदी पुराने सिपाही मानते हैं कि उन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या है. ये आंकड़ा युद्ध के मैदान से बिना लड़े घर लौटने वाले सिपाहियों की संख्या से चार गुना अधिक है.

सेना
AFP
सेना

2008 में रैंड कॉर्पोरेशन थिंक टैंक ने कहा था कि इराक़ और अफ़गानिस्तान में युद्ध के मैदान में तवान का सामना कर चुके पांच में से एक सिपाही को गंभीर तनाव था.

हालांकि वाएग्रा पर सेना के अधिक ख़र्चे के बारे में आर्म्ड फोर्सेस हेल्थ सर्विलांस ब्रांच की रिपोर्ट में 2004 से 2013 के बीच सेना में काम कर रहे पुरुषों में स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में अधिक गंभीरता से लेते हुए युद्ध, मानसिक तनाव और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बीच कोई सीधा नाता बनाया जाना सही नहीं है.

सऊदी अरब और भारत हथियारों के सबसे बड़े ख़रीदार

रूस पर ट्रंप के हाथ बांधेगी अमरीकी संसद

अपने दूसरे साथियों की तुलना में ऐसे सैनिकों के इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से प्रभावित होने का संभावनाएं अधिक है जो कभी युद्ध के मैदान में गए ही नहीं.

आख़िर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का नाता स्वास्थ्य की आम समस्याओं जैसे दिल का दौरा, उच्च रक्त चाप और मधुमेह से है.

साल 2007 में किए गए एक अनुमान के मुताबिक़ 18 फ़ीसदी अमरीकी पुरुष इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या से जूझ रहे हैं.

कहा जाए तो, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एक आम समस्या है और अमरीकी सेना लाखों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराती है, और ऐसे में साफ़ है कि वायग्रा और इस तरह की अन्य दवाओं पर भी ख़र्च तो होगा है.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Why does the US Army buy Viagra so much?
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X