बाइडेन को गंभीरता से क्यों नहीं लेते नेतन्याहू? इजराइल के सामने 'हल्के' पड़े अमेरिका की नाकामी का विश्लेषण
US-Israel News: कुछ महीने पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन इस बात से इतने तंग आ चुके थे, कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी में 'संयम बरतने' के उनके आह्वान को नजरअंदाज कर दिया था, कि उन्होंने नेतन्याहू का फोन रिसीव करना बंद कर दिया।
मार्च में जब बाइडेन से पूछा गया, कि उन्होंने इजराइल से जो आह्वान किया है, कि वो गाजा पट्टी के रफा शहर पर हमला ना करे, क्या वो 'रेड लाइन' है, जिसका अर्थ है, कि अगर इजराइल हमला करता है, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे?
तो बाइडेन ने कहा, "हां, वो एक रेड लाइन होगी, लेकिन मैं कभी इजराइल नहीं छोड़ूंगा।"

इस जवाब का क्या मतलब निकलता है, ये शायद ना पत्रकारों को समझ आया और ना ही शायद खुद बाइडेन भी अपने इस बयान का मतलब नहीं समझ पाए होंगे।
लेकिन, एक्सपर्ट्स ने बाइडेन की इस बयान का यह मतलब निकाला, कि राष्ट्रपति का मतलब ये हो सकता है, कि गाजा के शहर रफा में इजराइली आक्रमण के लिए अमेरिका के आक्रामक हथियारों का ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, लेकिन अगर इजराइल के खिलाफ होने वाली मिसाइल हमलों को रोकने के लिए इजराइल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, यानि इजराइल की रक्षा के लिए हथियारों की सप्लाई होती रहेगी।
लेकिन, मार्च महीने में नेतन्याहू का फोन नहीं उठाने वाले जो बाइडेन ने अप्रैल महीने में खुद उन्हें फोन कर दिया और ऐसा लगा, कि इस बार फिर से बाइडेन ने नेतन्याहू के सामने एक रेखा खींचने की कोशिश की है, लेकिन इस बार वो कम से कम 'लाल रेखा' नहीं थी, बल्कि उसे 'गुलाबी रेखा' कहा जा सकता है।
नेतन्याहू को फोन कर बाइडेन ने तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया और व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक, "बाइडेन ने इजराइल के सामने साफ किया, कि गाजा पट्टी में नागरिक नुकसान, मानवीय पीड़ा, सहायता कर्मियों की सुरक्षा को संबोधित करने के लिए इजराइल की तरफ से ठोस और विशिष्ट कदम उठाने की जरूरत है।"
व्हाइट हाउस के बयान में आगे कहा गया, कि "गाजा के संबंध में अमेरिकी नीति इन कदमों पर इजरायल की तत्काल कार्रवाई के हमारे आकलन से निर्धारित होगी।" लेकिन नेतन्याहू ने बाइडेन के आह्वान को एक कान से सुना और दूसरे कान से निकाल दिया।
फिर मई में बाइडेन ने एक बार फिर से बेंजामिन नेतन्याहू के सामने 'लाल रेखा' खींची। सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, कि "अगर वो (इजराइल) रफा में जाते हैं, तो मैं शहरी युद्ध में इस्तेमाल की जाने वाली हथियारों की सप्लाई नहीं करूंगा।"
बाइडेन का ये बयान बताता है, कि वो रफा में मानवीय तबाही को टालने की कोशिश करने के अलावा वो बेंजामिन नेतन्याहू पर रफा में ऑपरेशन शुरू नहीं हो, इसके लिए दबाव बना रहे हैं। इसके अलावा, बाइडेन ने गाजा की मदद के लिए और कोशिशें करने का भी आह्वान किया।
यहां तक की बाइडेन की पत्नी जिल बाइडेन ने भी मानवीय सहायता के लिए आह्वान किया और बाइडेन ने इजराइल की मदद के लिए जो शर्तें रखी, वो ऐसी थी, कि रफा में ऑपरेशन शुरू ना हो, इसके लिए बेंजामिन नेतन्याहू को मजबूर किया जा सके, युद्धविराम लाया जा सके और सहायतकर्मियों और आम लोगों की मौत को रोका जा सके।
लेकिन, अप्रैल में बाइडेन के फोन कॉल को एक बार फिर से नेतन्याहू ने अनसुना कर दिया।
बाइडेन रफा में ऑपरेशन शुरू नहीं करने के लिए हल्ला करते रहे, लेकिन इजराइल ने गाजा पट्टी के रफा में ऑपरेशन शुरू कर दिया।
रफा शहर में हमला होते ही दक्षिणी गाजा में लोगों तक पहुंचने वाली खाद्य आपूर्ति कम हो गई। गाजा में 15 से ज्यादा सहायताकर्मी मारे गए हैं। और रफा में अभी भी इजरायल ने बेतहाशा बमबारी जारी रखी है, जिसमें रफा में एक कैंप में आग लगना शामिल है, जिसमें दर्जनों लोग मारे गये थे।
लिहाजा, अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि जब बेंजामिन नेतन्याहू ने जो बाइडेन की 'लाल रेखा' और 'गुलाबी रेखा' को नजरअंदाज कर दिया है, तो फिर बाइडेन के पास आगे की योजना क्या है?
बाइडेन प्रशासन अभी इजराइल को 18 अरब डॉलर में F-15 फाइटर जेट बेचने जा रहा है, जिससे भयानक संकेत मिल रहे हैं, कि गाजा पट्टी में इजराइली ऑपरेशन भयानक से भयानक हो सकता है।
लेकिन, क्या हथियार डील ने बाइडेन के हाथ को बांध दिया है?
चाहे यूक्रेन में रूस का आक्रमण हो, या फिर गाजा में इजराइली हमला.. अमेरिकी हथियारों की बिक्री में रिकॉर्ड उछाल आया है। यूरोपीय देशों ने भी रूस के संभावित आक्रमण को देखते हुए अरबों डॉलर के अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए डील किए हैं। बाइडेन को भला इससे ज्यादा और क्या चाहिए!
रिफ्यूजीज इंटरनेशनल के अध्यक्ष और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जेरेमी कोनिंडिक ने न्यूयॉर्क टाइम्सल की एक रिपोर्ट में कहा है, कि "बाइडेन ने नेतन्याहू को बार-बार दिखाया है, कि वह अपनी उंगली हिलाएंगे, लेकिन उंगली हिलाने पर मजबूर नहीं करेंगे।"
यह युद्ध तब शुरू हुआ, जब इजरायल पर एक भयानक आतंकवादी हमला हुआ, और उसे हमास पर हमला करने का पूरा अधिकार था - लेकिन पूरे पड़ोस को नष्ट करने या नागरिकों को भूखा मारने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। बाइडेन ने नेतन्याहू को सक्षम बनाया है, और संयुक्त राष्ट्र में उनकी रक्षा की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र आयोग ने इजरायल को युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए जिम्मेदार पाया है।
उन्होंने कहा, कि "ऐसा लगता है, कि बाइडेन को शुरू में लगता होगा, कि वह नेतन्याहू को अपने करीब रखकर उन्हें सबसे बेहतर तरीके से प्रभावित और नियंत्रित कर सकते हैं। और निष्पक्षता से कहें, तो यह तरीका कुछ हद तक कारगर भी रहा, इजराइल ने पिछले साल लेबनान पर आक्रमण नहीं किया, जैसा कि वह लगभग करने ही वाला था और राफा पर उसका आक्रमण अन्य गाजा शहरों पर उसके आक्रमण की तुलना में काफी मापा हुआ लग रहा है। सहायता कर्मियों का कहना है, कि उन्होंने उत्तरी गाजा में ज्यादा भोजन भी पहुंचाया है।"
लेकिन, हकीकत ये भी है, कि बाइडेन की गाजा नीति ने नेतन्याहू को सत्ता में बने रहने में मदद की है। जेरेमी कोनिंडिक के मुताबिक, गाजा युद्ध ने बाइडेन के तर्कों का मजाक उड़ाया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका "नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था" का समर्थन करता है और इस तरह यूक्रेन में हमारी स्थिति को कमजोर किया है।"
दूसरी तरफ, बेंजामिन नेतन्याहू उस राष्ट्रपति के प्रति कृतघ्नता दिखा रहे हैं, जो गाजा युद्ध में उनके लिए लाइफलाइन बना हुआ है। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर बाइडेन का मजाक उड़ाया और व्हाइट हाउस आने से इनकार करते हुए उन्होंने भाषण देने के लिए अमेरिकी कांग्रेस को चुना है।
माना जा रहा है, कि जल्द ही बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले हैं, लेकिन उन्होंने व्हाइट हाउस में जो बाइडेन से मिलने से इनकार कर दिया है।
तो फिर सवाल ये है, कि नेतन्याहू जो बाइडेन को हल्के में क्यों ले रहे हैं?
जेरेमी कोनिंडिक ने कहा, कि "हम सभी जानते हैं कि कूटनीति में लाठी के साथ-साथ गाजर भी शामिल होती है। अगर नेतन्याहू बाइडेन को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो इसका कारण यह है, कि बाइडेन ज्यादातर नरमी से बोलते हैं और बड़ी गाजर लेकर चलते हैं।"
कुछ दिनों पहले बाइडेन प्रशासन पर नेतन्याहू के नवीनतम हमले के बाद, व्हाइट हाउस ने जवाब दिया, कि उसे प्रधानमंत्री की टिप्पणी "बेहद निराशाजनक" लगी। इससे नेतन्याहू को निश्चित रूप से सबक मिला होगा।
इडराइली अखबारों ने भी बाइडेन और नेतन्याहू के बीच के संबंध और इजराइली प्रधानमंत्री के रवैये पर सवाल उठाया है।
इजरायली अखबार हारेत्ज ने सवाल पूछा, कि "बाइडेन को और कितने सबूत चाहिए, कि नेतन्याहू अमेरिका के सहयोगी नहीं हैं?"
इजराइली अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बाइडेन को सलाह देने की कोशिश की, कि 'नेतन्याहू ने आपको धोखा दिया है।'
इजराइली अखबार ने यहां तक सवाल पूछ लिया, कि अगर बाइडेन के 'रेड लाइन' का संदेश गाजा में निरर्थक साबित होता है, तो फिर रूस और चीन जैसे देश अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को गंभीरता से क्यों लेंगे? अगर वह अमेरिकी हथियारों पर निर्भर एक सहयोगी से मुकाबला करने में भी बहुत डरपोक साबित होते हैं, तो फिर ये कैसे मान लिया जाए, कि एक प्रतिद्वंदी से वो मुकाबला कर पाएंगे?

बाइडेन की विदेश नीति पर सवाल
विरोधाभास यह है कि बाइडेन की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठे हैं। अफगानिस्तान की अराजकता को भला कौन भूल सकता है और यूक्रेन युद्ध रोकने में अमेरिका की नाकामी दुनिया अभी भी देख रही है।
एशिया में चीन के साथ युद्ध के जोखिम को कम करने के लिए बाइडेन एक गठबंधन बनाने में कुछ हद तक कामयाब रहे हैं। लेकिन मध्य पूर्व में संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।
गाजा में युद्ध जारी है और हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है, कि 36 हजार से ज्यादा लोग मारे गये हैं। वहीं, नेतन्याहू के इरादे अभी भी हमास को पूरी तरह से खत्म करने का ही है, लिहाजा गाजा की लड़ाई इस साल के बाकी समय में भी जारी रह सकता है, और इजराइल आने वाले हफ्तों में लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमला करने की बात कर रहा है, जिससे एक अलग युद्ध शुरू हो सकता है जो और भी और भी ज्यादा विनाशकारी हो सकता है।
लिहाजा, अब बाइडेन का अगला टास्क लेबनान युद्ध को रोकना है।
लेकिन, जिस तरह से वो बेंजामिन नेतन्याहू के सामने जो बाइडेन कमजोर पड़े हैं, इस बात की उम्मीद काफी कम है, कि लेबनान युद्ध ना शुरू हो।
जेरेमी कोनिंडिक ने कहा, कि "देखिए, मैं मानता हूँ कि इन आलोचनात्मक स्तंभों को किनारे से लिखना आसान है और वास्तविक दुनिया की नीति को वास्तव में समझना बहुत कठिन है। कूटनीति के क्षेत्र में हमेशा समाधान से ज़्यादा समस्याएं होती हैं, और अमेरिकी राजनीति और नेतन्याहू की फिसलन इसे और भी जटिल बना देती है। फिर भी मध्य पूर्व में आठ महीने के लगातार आतंक के बाद, बाइडेन को यह पहचानना चाहिए, कि उनकी गाजा नीति एक नैतिक, व्यावहारिक और राजनीतिक नाकामी है, जिसने नेतन्याहू के अलावा किसी की मदद नहीं की है।"












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