Explainer: जानवरों की तरह इंसानों के पूंछ क्यों नहीं होती हैं, जानिए कैसे हो गई गायब?
Scinece Explainer: हजारों हजार साल पहले पशुओं की तरह रहने वाले हमारे पुर्वजों की पूंछ हुआ करती थीं, लेकिन अब हमारे पूंछ नहीं होती हैं। लिहाजा, वैज्ञानिक इस बात को लेकर उत्सुक हैं, कि आखिर यह बदलाव कैसे हुआ? अब, एक नए अध्ययन में पाया गया है, कि एक विशेष जीन में छोटा सा बदलाव इसका कारण हो सकता है।
ब्रॉड इंस्टीट्यूट के आनुवंशिकीविद् और नेचर जर्नल में बुधवार को प्रकाशित एक अध्ययन के सह-लेखक बो ज़िया ने कहा, कि "स्टडी के दौरान हमने अपने जीन में एक बहुत ही अलग तरह के म्यूटेशन देखा है।" यानि, हमार जीन में बदलाव हुआ है।

आइये जानते हैं, कि किस चीज़ ने वैज्ञानिकों को लगभग 25 मिलियन वर्षों के बाद इस खोज को करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने क्या पाया, और मनुष्यों ने अपनी पूंछ क्यों खो दी? और क्या इससे हमें कोई फायदा हुआ?
हमारे पूर्वजों ने पूंछ क्यों खो दी?
लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह रिमार्केबल खोज तब शुरू हुई, जब न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और अब ब्रॉड इंस्टीट्यूट में एक प्रमुख खोजकर्ता बो ज़िया ने रिसर्च के दौरान अपनी पूंछ वाली हड्डी को घायल कर लिया, जिसके बाद उन्हें इस मुद्दे पर रिसर्च करने का आइडिया आया।
नेचर जर्नल में प्रकाशित स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च के दौरान बिना पूंछ वाले वानरों, इंसानों और पूंछ वाले बंदरों के डीएनएन की तुलना की गई और फिर पता चला, कि इंसानों के डीएनएन में एक खास तरह का बदलाव हुआ है। बिना पूंछ वाले वानरों और इंसानों के डीएनए में वो बदलाव मिला है, जो पूंछ वाले बंदरों में नहीं हो पाया था।
मेट्रो की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले बार जो रिसर्च किया गया था, उस दौरान 100 से ज्यादा जीनों को एक साथ जोड़ा गया था और फिर एनवाईयू ने अध्ययन के बाद ये अनुमान लगाया, पूंछ के गायब होने के पीछे डीएनए कोड में परिवर्तन होना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है, कि डीएनएन में एक से ज्यादा परिवर्तन हुए होंगे।
शोधकर्ताओं ने पाया, कि पूंछों में अंतर जीन उत्परिवर्तन के बजाय वानरों और मनुष्यों के पूर्वजों के जीन के कोड में AluY नामक डीएनए स्निपेट के जुड़ने के कारण हुआ था। मेट्रो की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. बो ज़िया ने कहा, "हमारा अध्ययन यह समझाना शुरू करता है, कि लगातार विकास की प्रक्रिया ने हमारी पूंछों को कैसे हटाया, और ये वो एक सवाल था, जो मुझे बचपन से ही परेशान करता रहा है।"
जब शोधकर्ताओं ने चूहों के एक समूह को यह देखने के लिए इंजीनियर किया, कि टीबीएक्सटी नामक जीन के सम्मिलन ने उनकी पूंछों को कैसे प्रभावित किया, तो उन्होंने पूंछ प्रभावों की एक विस्तृत श्रृंखला की खोज की, जिसमें बिना पूंछ के पैदा हुए कुछ चूहे भी शामिल थे। आगे के शोध से पता चला, कि टीबीएक्सटी जीन ने पूछों के विकास को प्रभावित किया है।
हालांकि, रिसर्चर्स का मानना है, कि कई और जेनेटिक बदलाव भी पूंछ के गायब होने के पीछे शामिल हो सकता है, लिहाजा वैज्ञानिकों का कहना है, कि आने वाले वक्त में और भी रिसर्च से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल हो सकती हैं।












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