Taiwan Earthquake: ताइवान में क्यों आते हैं बड़े भूकंप, खुद को इन झटकों से कैसे संभाल लेता है ये देश

ताइवान में बुधवार को 7.5 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप ईस्ट ताइवान के हुलिएन शहर में आया। इसका केंद्र धरती से 34 किलोमीटर नीचे था। भूकंप की वजह से कई इमारतें जमींदोज हो गईं, लैंड स्लाइड भी हुई है और ट्रेन सेवा पर भी प्रभाव पड़ा है। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

इस एक चौथाई सदी के सबसे भयानक भूकंप की वजह से ताइवान में अब तक 9 लोगों की मौत होने की खबर है। इसके अलावा 930 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। मरने वालों का आंकड़े बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि कि जिस तीव्रता का ये भूकंप था, जानमाल की बेहद कम क्षति पहुंची है।

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अब सवाल उठता है कि आखिर बड़े भूकंप के बाद भी खुद को ताइवान कैसे संभाल लेता है? विशेषज्ञों का कहना है कि शक्तिशाली भूकंप ताइवान जैसे देश को लिए कोई नई बात नहीं है। ताइवान की लोकेशन रिंग ऑफ फायर पर है। ये प्रशांत महासागर में स्थित एक ऐसा क्षेत्र है, जहां अधिकांश सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंप रिकॉर्ड किये जाते हैं।

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    विशेष रूप से दो टेक्टोनिक प्लेटें, फिलीपीन सी प्लेट और यूरेशियन प्लेट यहां पर टकराती रहती हैं और एक दूसरे को धक्का देती हैं। इस क्रिया में अध्यधिक ऊर्जा निकलती है जिससे भूकंप आते हैं। क्षेत्र का पहाड़ी परिदृश्य ज़मीन की कंपन को बढ़ा देता है, जिससे भूस्खलन भी देखने को मिलता है।

    बुधवार को आए भूकंप की वजह से ताइवान के पूर्वी तट पर ऐसे कई भूस्खलन हुए, जब मलबा गिरने से सुरंगें और राजमार्ग प्रभावित हुए, वाहन कुचल गए और कई लोगों की मौत हो गई। जैसा कि हम ऊपर जिक्र कर चुके हैं कि भूकंप की वजह से हुआलिएन में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं, लेकिन राजधानी ताइपे में इसके तीव्र प्रभाव के बावजूद मामूली नुकसान ही हुआ।

    ये जबरदस्त भूकंप सुबह के व्यस्त समय के बीच में आया, फिर भी कुछ देर के बाद वहां का आवागमन फिर से पटरी पर लौट गया। देखा गया कि भूकंप के कुछ ही मिनट बाद, माता-पिता फिर से अपने बच्चों को पैदल स्कूल ले जा रहे थे और कर्मचारी गाड़ी से दफ्तर जा रहे थे।

    ताइवान की तैयारी सबसे बेहतर

    मिसौरी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के भूकंपविज्ञानी और प्रोफेसर स्टीफन गाओ ने कहा, "ताइवान की भूकंप संबंधी तैयारी दुनिया में सबसे उन्नत है। द्वीप ने सख्त बिल्डिंग कोड, एक विश्व स्तरीय भूकंपीय नेटवर्क और भूकंप सुरक्षा पर व्यापक सार्वजनिक शिक्षा अभियान लागू किया है।"

    बच्चों को दी जाती है ट्रेनिंग

    ताइवान में प्राइमरी स्कूल में ही बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है और ये ट्रेनिंग अनिवार्य है। यहां के स्कूलों में बच्चों को भूकंप के समय किस तरह, कहां छिपना है और खुद को बचाना है, सिखाया जाता है। इस दौरान स्कूल से बाहर निकलने के तरीके भी बताए जाते हैं।

    ट्रेनों में आधुनिक यंत्र

    इसके अलावा ट्रेन में मौजूद लोगों पर भूकंप का असर हो इसे मापने वाले यंत्र लगाए गए हैं। इन यंत्रों में लगे सेंसर भूकंप तरंगों को ट्रैक करते रहते हैं। भूकंप का आभास होते ही ट्रेन में तुरंत ब्रेक लग जात है और भूकंप आने से पहले ही ट्रेन रूक जाती है। इतना ही नहीं भूकंप की वजह से ट्रेन पटरी से ना उतर सके, इसकी भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

    भूकंप आने पर सबसे ज्यादा प्रभाव इमारत की नींव पर पड़ती है। ऐसे में इमारत बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार नई और मौजूदा इमारतों के लिए आवश्यक भूकंप प्रतिरोध के स्तर को लगातार संशोधित करती रहती है। हालांकि इससे भवनों की लागत जरूर बढ़ जाती है लेकिन इसके लिए जनता को आवश्यक सब्सिडी प्रदान की जाती है।

    नियम तोड़ने वालों को सजा

    भूकंप के बड़े झटके आने पर भी इमारत न गिरे ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। अगर कोई इसमें कोताही करता है तो उसे कठोर सजा दी जाती है। साल 2016 में एक ऐसा ही केस आया था जब ताइवान में आए भूकंप से एक 17 मंजिल की इमारत ध्वस्त हो गई थी। इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई थी।

    इस भूकंप में ये एकमात्र बिल्डिंग थी जो तबाह हुई थी। इसके बाद इस इमारत को बनाने वाले प्रमुख लोगों पर मुकदमा हुआ और 5 लोगों को लापरवाही का दोषी पाया गया। इसके बाद इन सभी को जेल की सजा हई।

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