चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर रूसी कब्जा, पुतिन का प्लान क्या है? इस जगह का है खौफनाक इतिहास
कीव, 25 फरवरी। रूसी सेनाएं जब गुरुवार 24 फरवरी को यूक्रेन के अंदर घुसी तो शायद ही पश्चिम को अंदाजा रहा हो कि पहले ही दिन रूस का ये अभियान बहुत सफल होने वाला है। गुरुवार देर शाम पर जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्वीट कर बताया कि रूसी सेनाएं चेर्नोबिल न्यूक्लियर क्षेत्र को कब्जे में लेना चाह रही हैं जबकि यूक्रेन के सैनिक उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उसके थोड़ी ही देर बाद से ये खबर आने लगी कि रूसी सेना ने चेर्नोबिल न्यूक्लियर पॉवर प्लांट को कब्जे में ले लिया है। बाद में इसकी पुष्टि भी हो गई।
यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद दूसरी जिस चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हुई वह रूसी सैनिकों के चेर्नोबिल पर कब्जे को लेकर रही। रूसी कब्जे के बाद विश्लेषकों का ध्यान इस ओर गया कि चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट पहले से ही पुतिन की यूक्रेन योजना का हिस्सा था। आखिर चेर्नोबिल प्लांट इतना महत्वपूर्ण क्यों है और रूस इसे अपने कब्जे में क्यों लेना चाहता है।

कीव के सबसे नजदीकी रूट पर
1- रूस की सेनाएं तीन तरफ से यूक्रेन में घुसी हैं उसमें से एक बेलारूस के जरिए है। यही वो रास्ता है जिससे होकर यूक्रेन की राजधानी कीव तक सबसे कम समय में पहुंचा जा सकता है। चेर्नोबिल न्यूक्लियर पॉवर प्लांट की साइट भी बेलारूस के कीव जाने के इसी मार्ग पर पड़ती है और यही वजह है कि रूस की योजना में इसे कब्जे पर लेना प्रमुखता से रहा है।
2- पश्चिमी सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि रूस ने कीव तक पहुंचने के लिए बेलारूस से जाने वाले सबसे तेज आक्रमण मार्ग का उपयोग किया था। ऐसे में रूसी सैनिकों की कीव तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता देने के लिए चेर्नोबिल को कब्जे में लेना सबसे आवश्यक था। यही वजह है कि गुरुवार शाम तक रूसी सैनिक कीव के आस-पास पहुंच चुके थे।

चेर्नोबिल का कितना रणनीतिक महत्व?
3- अमेरिकी सेना के एक पूर्व प्रमुख जैक कीन ने कहा कि चेर्नोबिल का "कोई सैन्य महत्व नहीं है" लेकिन बेलारूस से कीव तक के सबसे छोटे मार्ग पर बैठता है। जो यूक्रेनी सरकार को हटाने के लिए एक रूस की रणनीति का प्रमुख हिस्सा है।
4- वहीं यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चेर्नोबिल को कब्जे में लेना रूस की योजना का हिस्सा था और उन्होंने गुरुवार को ही इसे नियंत्रण में ले लिया था। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका इसकी पुष्टि नहीं कर सकता है।

1986 में हुआ था दहलाने वाला हादसा
5- यूक्रेन की राजधानी कीव के उत्तर में 108 किमी (67 मील) की दूरी पर स्थित चेर्नोबिल नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र में 1986 में एक बड़ा हादसा हुआ था जब इसके चौथे रिएक्टर में एक असफल सुरक्षा परीक्षण के दौरान विस्फोट हो गया। इसाक विकिरण (रेडिएशन) के बाद पूर्वी यूरोप और सुदूर स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी हिस्से तक पहुंचे थे।
6- रेडियोधर्मी स्ट्रोटियम, सीजियम और प्लूटोनियम ने यूक्रेन, बेलारूस और रूस समेत यूरोप के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया। चेर्नोबिल हादसे इतना तेज था कि 32 कर्मचारी तुरंत मर गए थे जबकि सैकड़ों बुरी तरह झुलस गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में हजार से कुछ कम लोगों की मौत हुई थी जबकि इसेक विकिरण से 93,000 हजार लोग कैंसर का शिकार हुए।

दुनिया से की गई थी छिपाने की कोशिश
7- शुरुआत में तत्कालीन सोवियत संघ ने इस हादसे की जानकारी पूरी तरह से छिपाने की कोशिश की थी। सभी तरह की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी गई थी। बाद में स्वीडन ने एक सरकारी रिपोर्ट में इस हादसे को लेकर जानकारी दी गई जिसके बाद सोवियत सरकार ने भी इसे स्वीकार किया और यह दुनिया का सामने आया।
8- आपदा के छह महीने के भीतर एक मेक-शिफ्ट कवर या "सरकोफैगस" बनाया गया था ताकि दुर्घटनाग्रस्त रिएक्टर को कवर किया जा सके और रेडिएशन से पर्यावरण को बचाया जा सके। नवंबर 2016 में,एक तथाकथित "नई सुरक्षित कवर" को पुराने सरकोफैगस के ऊपर ले जाया गया था।












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