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वेनेजुएला और अमरीका क्यों हैं आमने-सामने

By Bbc Hindi
ट्रंप, मादुरो
Getty Images
ट्रंप, मादुरो

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमरीका के साथ सारे रिश्ते ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.

हाल ही में अमरीका ने वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में विपक्षी नेता जुआन गुएदो को मान्यता दी, जिसके बाद मादुरो ने अमरीका से सभी संबंध तोड़ लिए हैं.

मादुरो ने अमरीकी राजदूतों को देश छोड़ने के लिए महज़ 72 घंटे का वक़्त दिया है.

बुधवार को विपक्षी नेता गुएदो ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ख़ुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था. जिसके बाद अमरीका ने कहा था कि 'पूर्व राष्ट्रपति मादुरो' के पास अब कोई अधिकार नहीं हैं. अमरीका ने सेना से अपील की थी कि वे गुएदो का समर्थन करें.

हालांकि अब तक सेना मादुरो के ही साथ है.

वेनेजुएला इस वक़्त मादुरो के नेतृत्व में मुद्रा स्फ़ीति, बिजली की कटौती और मूलभूत चीजों के अभाव से जूझ रहा है.

काराकस के प्रदर्शन में क्या हुआ?

बुधवार को हज़ारों लोगों की तादाद में वेनेजुएला के लोगों ने रैली निकाली जिसका नेतृत्व विपक्षी नेता जुआन गुएदो ने किया.

उन्होंने इस रैली में कहा कि ये विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेंगे, जब तक वेनेजुएला आज़ाद नहीं हो जाता.

वेनेजुएला
EPA
वेनेजुएला

इसके बाद उन्होंने कहा, '' जब तक देश में दोबारा चुनाव नहीं हो जाता, तब तक मैं कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में अंतरिम राष्ट्रपति पद औपचारिक रूप से ग्रहण करने की शपथ लेता हूं. "

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उन्होंने सेना से मादुरो के आदेशों को ना मानने की अपील भी की.

वेनेजुएला की एनजीओ का कहना है कि मंगलवार और बुधवार को इस प्रदर्शन में गोलीबारी के दौरान 14 लोगों की मौत हो गई.

अमरीका का हस्तक्षेप

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने विपक्षी नेता जुआन गुएदो को अंतरिम राष्ट्रपति माना.

अमरीकी ने अपने बयान में मादुरो के नेतृत्व को नाजायज़ बताया और कहा, '' वेनेजुएला के लोग बहादुरी से अपनी बात वहां की मादुरो सरकार के ख़िलाफ़ रख रहे हैं. वे मादुरो सरकार से आज़ादी चाहते हैं.''

https://twitter.com/realDonaldTrump/status/1088146315979251717

अमरीका ने ये भी कहा है कि अगर मादुरो सरकार लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करती है तो उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

कौन देश हैं मादुरो के ख़िलाफ़?

सात दक्षिण अमरीकी देश-ब्राज़ील, कोलंबिया, चिली, पेरू, इक्वेडोर, अर्जेंटीना और पराग्वे ने जुआन गुएदो को अंतरिम राष्ट्रपति माना है. इसके अलावा कनाडा भी उन्हें समर्थन दे रहा है. वहीं, यूपोरीय यूनियन स्वतंत्र चुनाव के पक्ष में है.

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'द ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ अमेरिकन स्टेट' ने भी गुएदो के राष्ट्रपति पद की दावेदारी को समर्थन दिया है. हालांकि साल 2017 में वेनेजुएला इस संगठन से ख़ुद को अलग कर चुका है.

वहीं दूसरी ओर मेक्सिको, बोलिविया और क्यूबा ने मादुरो का समर्थन किया है.

मादुरो
Reuters
मादुरो

राष्ट्रपति मादुरो की प्रतिक्रिया

निकोलस मादुरो ने अमरीका पर वेनेजुएला को नियंत्रित करने का आरोप लगाया है. इसके अलावा उन्होंने विपक्ष पर तख्तापलट की कोशिशों के भी आरोप लगाए हैं.

रक्षा मंत्री व्लादीमीर पडरिनो ने गुएदो की आलोचना करते हुए ट्वीट किया, ''इस देश की सेना उस राष्ट्रपति को कतई मंज़ूर नहीं करेगी जो ख़ुद को थोपना चाहता हों या स्वयं को राष्ट्रपति घोषित करते हों.''

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मादुरो और उनके समर्थकों का मानना है कि वेनेजुएला का आर्थिक संकट अमरीका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण है.

नेशनल असेंबली के आंकड़ों के मुताबिक़ 12 महीनों में देश की मुद्रा स्फ़ीति दर 1,300,000 फ़ीसदी हो गई है.

आगे क्या होगा?

बीबीसी राजनयिक संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं, ''क्या ट्रंप सरकार के पास मादुरो की सरकार पर दबाव बनाने की कोई सुनियोजित योजना है? जैसे संपत्तियों को जब्त करना.''

''अगर ऐसा होता है तो ये वेनेजुएला की जनता के लिए किसी आपदा से कम नहीं होगा, और फिर वही होगा जो वेनेजुएला की सेना चाहेगी. यानी जिसकी सेना उसका वेनेजुएला.''

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फ़िलहाल तो सेना के जनरल निकोलस मादुरो को समर्थन दे रहे हैं. लेकिन क्या आगे भी ऐसा ही रहेगा. जिस तरह से विदेशी शक्तियां इस मामले में आवाज़ बुलंद कर रही हैं ऐसे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता.

कौन हैं जुआन गुएदो?

जुआन गुएदो इस महीने ही संसद में विपक्ष के नेता बने है. इससे पहले वे दुनिया के लिए एक अपरिचित नाम थे.

अब उन्होंने कहा है कि उनके पास नए चुनाव ना होने तक अंतरिम राष्ट्रपति बनने के संवैधानिक अधिकार हैं.

जुआन गुएदो
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जुआन गुएदो

वेनेजुएला में विपक्ष ने साल 2015 में चुनाव में जीत हासिल की थी लेकिन साल 2017 में निकोलस मादुरो ने एक संविधान सभा का गठन किया जिसने विधायी से ज़्यादा शक्तिशाली बनी.

छात्र रहते हुए गुएदो ने ह्यूगो चावेज़ के खिलाफ़ प्रदर्शन किय था. ह्यूगो चावेज़ ने ही निकोलस मादुरो को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर चुना था.

BBC Hindi
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English summary
Why are Venezuela and USA face to face

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