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India US: ‘अमेरिकी पैसा भारत में AI पर क्यों खर्च हो रहा?’ व्हाइट हाउस एडवाइजर पीटर नवारो ने क्यों कहा ऐसा?

India US News Peter Navarro: भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर तल्खी बढ़ती दिख रही है। व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भारत पर नया हमला बोलते हुए सवाल किया है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर क्यों खर्च हो रहा है। यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर भारी टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के संबंध पहले से ही तनाव में हैं।

AI को लेकर नवारो का सीधा सवाल

रियल अमेरिका वॉयस को दिए इंटरव्यू में पीटर नवारो ने कहा कि ChatGPT जैसी AI सेवाएं अमेरिकी जमीन पर चल रही हैं, अमेरिकी बिजली का इस्तेमाल कर रही हैं और फिर भारत, चीन समेत दूसरे देशों के यूजर्स को सेवाएं दे रही हैं। नवारो के मुताबिक यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर अमेरिका को गंभीरता से सोचना होगा। उनका सवाल था कि जब इंफ्रास्ट्रक्चर अमेरिका का है, तो उसका फायदा दूसरे देशों को क्यों मिल रहा है।

Peter Navarro

टैरिफ विवाद से और बिगड़ा माहौल

नवारो का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव गहराता जा रहा है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इस फैसले के बाद नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट साफ नजर आने लगी है।

रूस से तेल खरीद पर पुराना हमला

पीटर नवारो पहले भी भारत को लेकर तीखी टिप्पणियां करते रहे हैं। पिछले साल उन्होंने भारत को 'टैरिफ का महाराजा' कहा था और रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर जमकर निशाना साधा था। नवारो ने यहां तक कह दिया था कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से इतनी मात्रा में तेल नहीं खरीदता था और इसे उन्होंने 'ब्लड मनी' करार दिया था।

भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह एक बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगी। नई दिल्ली का रुख रहा है कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना किसी भी देश का वैध अधिकार है और इसमें राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

BRICS देशों पर भी तीखा बयान

नवारो ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि BRICS देशों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इन देशों की अर्थव्यवस्था अमेरिका को निर्यात पर टिकी हुई है।
उनके शब्दों में, जब ये देश अमेरिका को सामान बेचते हैं, तो वे 'वैम्पायर की तरह हमारा खून चूसते हैं' और अनुचित व्यापारिक नीतियों से अमेरिका को नुकसान पहुंचाते हैं।

भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म कराया, नई दिल्ली को नागवार गुजरा है। इसके अलावा अमेरिका की नई इमिग्रेशन पॉलिसी भी दोनों देशों के बीच असहजता बढ़ा रही है।

आगे क्या बढ़ेगा टकराव

पीटर नवारो के ताजा बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक मुद्दों पर टकराव और तेज हो सकता है। सवाल यह है कि क्या दोनों देश इस बयानबाजी से आगे बढ़कर बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे, या फिर यह विवाद और गहराएगा।

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