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चीन-अमरीका के बीच ट्रेड वॉर में किसे मिलेगी जीत?

By BBC News हिन्दी

दुनियाभर के राजनयिक इस बात को स्वीकार करते हैं कि अब मुल्कों के बीच जंग ज़मीन, आसमान और पानी में नहीं बल्कि आर्थिक और व्यापारिक नीतियों के ज़रिए होती है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर चीन के ख़िलाफ़ इसी तरह की जंग शुरू करने के आरोप लग रहे हैं. अमरीका ने चीन से आने वाले सामान पर बेशुमार टैरिफ़ (शुल्क) लगाने का फ़ैसला किया तो चीन ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया.

अमरीका के बारे में कहा जा रहा है कि जो देश दुनियाभर में खुली अर्थव्यवस्था का पैरोकार रहा वो आज संरक्षणवाद की लकीर पकड़ने में लगा है. चीन को लेकर ट्रंप की आर्थिक नीतियों और घोषणाओं को चीनी मीडिया अपने मुल्क के ख़िलाफ़ अमरीका की कारोबारी जंग बता रहा है.

ट्रेड वॉर: अमरीका और चीन की इस जंग में कौन पिसेगा?

ट्रेड वॉर
Getty Images
ट्रेड वॉर

सोमवार को चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है चीनी वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा से व्यापारिक कलह बढ़ी है और चीन इसका सामना करने के लिए संकल्पबद्ध है.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''तीन अप्रैल को अमरीकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने एक लंबी सूची की तस्वीर प्रकाशित की थी. इसमें बताया गया है इन चीनी वस्तुओं पर जल्द 25 फ़ीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है. यह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच जंग की शुरुआत है.''

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''अमरीका ने चीन के ख़िलाफ़ जिस कारोबारी जंग की शुरुआत की है वो दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा है. कई लोग अमरीका के इस रुख़ से हैरान हैं. भले अमरीका ने इसे शुरू किया है लेकिन वो गंभीर पशोपेश में है. वॉल स्ट्रीट में इस फ़ैसले का बाद से निराशा है.''

चीन अमरीका
Reuters
चीन अमरीका

अख़बार ने लिखा है, ''अमरीकी नागरिकों के निराश होने के ठोस कारण हैं. जिन्होंने ट्रंप को राष्ट्रपति बनाया उनका जीवन और मुश्किल होने वाला है. ज़ाहिर है ट्रंप के फ़ैसले से चीन में बनी वस्तुओं की क़ीमत बढ़ जाएगी. श्रमिक वर्ग के लिए नौकरी की तलाश मुश्किल हो जाएगी. कई लोग तो बेरोज़गार हो जाएंगे. यहां के किसान वैश्विक बाज़ार में अपना सामान अच्छी क़ीमत पर नहीं बेच पाएंगे.''

ग्लबोल टाइम्स ने लिखा है, ''ट्रेड वॉर ट्रंप प्रशासन की समग्र नीति का हिस्सा है. यह अलगाववाद की नीति है. ट्रंप अपनी घरेलू नीति को विदेश नीति का हिस्सा बनाना चाहते हैं. चीन के साथ अमरीका का ट्रेड वॉर उनके चुनावी नारे की ओर इशारा करता है जिसमें उन्होंने 'अमरीका फ़र्स्ट' का नारा दिया था. वो घरेलू राजनीति में चुनाव जीतने के लिए आर्थिक नीति को दिशा दे रहे हैं."

इस बीच, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शीत युद्ध की मानसिकता से बाज आने की चेतावनी देते हुए खुली अर्थव्यवस्था की वकालत की है. चीनी राष्ट्रपति ने बोआओ फोरम फोर एशिया में बोलते हुए कहा कि चीन में निवेश करने वाले विदेशी फर्मों पर लगने वाले आयात शुल्क में कटौती की जाएगी. हालांकि शी ने अमरीका का नाम नहीं लिया. लेकिन यह स्पष्ट है एक तरफ़ ट्रंप 'अमरीका फ़र्स्ट' नीति की वकालत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ शी खुली अर्थव्यवस्था की बात कर रहे हैं.

डोनल्ड ट्रंप
Getty Images
डोनल्ड ट्रंप

शी ने इस फोरम में कहा, ''लोग आगे बढ़ने या पुराने वक़्त में लौटने में से एक विकल्प को चुनने को लेकर जूझ रहे हैं. आज की दुनिया में शांति और सहयोग के साथ आगे बढ़ेन का विकल्प है और दूसरी तरफ़ शीत युद्ध की मानसिकता अप्रासंगिक हो गई है. हम एक साथ मिलकर काम करेंगे तो इसी में सबकी तरक्की है.

अमरीका का आरोप है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को खोलने के वादों से पीछे हट गया है. अमरीका का कहना है कि विदेशी कंपनियों के अपने बाज़ार तक नहीं पहुंचने दे रहा है उन्हें संयुक्त उपक्रम में निवेश करने पर मज़बूर किया जा रहा है. इसके साथ ही अमरीका ने चीन पर बौद्धिक संपदा की चोरी करने का आरोप लगाया है.

बीबीसी एशिया की बिज़नेस संवाददाता करिश्मा वासवानी का कहना है कि चीनी राष्ट्रपति ख़ुद को वैश्वीकरण के चैंपियन के रूप में पेश कर रहे हैं. जब भी वो वैश्विक मंचों पर बोलते हैं तो वैश्वीकरण की वकालत ज़रूर करते हैं.

ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि ट्रेड वॉर का इस्तेमाल रणनीतिक तौर पर कर रहा है. अख़बार ने लिखा है, ''ट्रंप एक बिज़नेसमैन थे और अब भी बदले नहीं हैं. वो एक राष्ट्रपति से ज़्यादा एक व्यापारी की तरह व्यवहार कर रहे हैं.''

शी जिनपिंग
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शी जिनपिंग

ट्रंप चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटे को कम करना चाहता है. राष्ट्रपति बनने से पहले भी ट्रंप चीन पर ग़लत व्यापारिक नीतियां अपनाने का आरोप लगाते रहे हैं.

ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में अमरीका के व्यापारिक घाटे को ख़त्म करने की बात पुरजोर अंदाज़ में कही थी. वह इस बात को मानते हैं कि ये अमरीका में होने वाले उत्पादन को नुक़सान पहुंचाता है.

वह कई बार ट्विटर पर इससे निपटने के लिए क़दम उठाए जाने की बात कह चुके हैं. ट्रंप अपने इस क़दम से उत्पादक राज्यों जैसे ओहायो में मतदाताओं को लुभाने की कोशिश भी कर सकते हैं.

BBC Hindi
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English summary
Who will win the trade war between China-USA
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