कौन हैं भारतीय मूल के रो खन्ना, जिनके दांव से भारत, अमेरिका, रूस, तीनों हुए खुश, चीन हुआ चित
वॉशिंगटन, जुलाई 15: चीन पर लगाम लगाने की कोशिशों में अमेरिका बेहद शिद्दत से जुटा हुआ है। इसके लिए यह देश वे सारे प्रयास कर रहा है जो एकबारगी सुनने में असंभव लगते हैं। इसकी बानगी आज तब दिख गयी जब यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने भारत के हित में एक बड़ा फैसला सुनाया। भारत बिना किसी प्रतिबंध के डर से अमेरिका के सबसे बड़े शत्रु देश रूस से हथियार खरीद सकता है। जाहिर है भारत चीन को रोकने के लिए भारत को इतनी तरजीह दे रहा है और भारत भी इसका खूब फायदा उठा रहा है। खास बात यह है कि यह प्रस्ताव भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना द्वारा लाया गया था, जिसे दोनों पार्टियों के सांसदों ने अपनी मंजूरी दी।

भारत को मिली विशेष छूट
यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने उस कानून में बदलाव की मंजूरी दे दी है, जो काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत भारत को लेकर 'विशिष्ट छूट' की सिफारिश करता है। यानि, सीएएटीएसए के तहत अब भारत पर प्रतिबंध नहीं लग सकता है और भारत के लिए ये एक बहुत बड़ी राहत की बात है। हालांकि, भारत ने पहले ही साफ कर दिया था, कि भारत को किसी भी देश के साथ रक्षा संबंध बनाने और हथियार खरीदने का संप्रभु हक है, लेकिन भारत के ऊपर सीएएटीएसए का तलवार लटक रही थी।

रो खन्ना ने पेश किया प्रस्ताव
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारत के समर्थन में पास किए गये इस अहम प्रस्ताव से दोनों लोकतंत्रों के बीच रक्षा संबंध और भी ज्यादा मजबूत होंगे और ये प्रस्ताव चीन जैसे हमलावरों को रोकने में मदद करता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस प्रस्ताव 'एनडीएए' को भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना ने पेश किया था, लिहाजा, भारत के समर्थन में विशाल बहुमत के साथ ये प्रस्ताव पास किया गया है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कानून में संशोधन होने के बाद भी इसे आखिरी पड़ाव तक पहुंचने के लिए कई चरणों से गुजरना होगा और एनडीएए के सदन के पारित होने के बाद सीनेट के पास इसे भेजा जाएगा और सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून माना जाएगा। हालांकि, माना जा रहा है, कि सीनेट में इसे काफी आसानी से पास कर दिया जाएगा, क्योंकि ज्यादातर सीनेटर्स, जिनमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों शामिल हैं, उनके भारत से अच्छे संबंध हैं और वो भारत समर्थक हैं।

चीन को काउंटर करने के लिए ये कदम जरूरी
यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से 'एनडीएए' कानून में संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद सांसद रो खन्ना ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि, 'यह स्मारकीय संशोधन अमेरिका और भारत के परमाणु समझौते के बाद से कांग्रेस से बाहर अमेरिका और भारत के संबंधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कानून है। रो खन्ना ने कहा कि, "संयुक्त राज्य अमेरिका को चीन से बढ़ती आक्रामकता का सामना करने के लिए भारत के साथ खड़ा होना चाहिए। इंडिया कॉकस के उपाध्यक्ष के रूप में, मैं अपने (दोनों) देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा हूं कि भारत, भारतीय चीनी सीमा पर अपनी रक्षा कर सके।" उन्होंने कहा कि, "यह संशोधन अत्यंत महत्वपूर्ण है, और मुझे इसे द्विदलीय आधार पर सदन को पारित करते हुए देखकर गर्व हो रहा है।"

अमेरिका-भारत साझेदारी महत्वपूर्ण
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा कि, 'भारत-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त राज्य के हितों को आगे बढ़ाने के लिए और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी महत्वपूर्ण है। और दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच यह साझेदारी महत्वपूर्ण है और भारत-प्रशांत क्षेत्रों में बढ़ते खतरों के जवाब में इसे मजबूत करना जारी रखना चाहिए, और यह एक स्पष्ट संकेत भेजना है, कि संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। रो खन्ना के इस संशोधन प्रस्ताव में, 'चीन से खतरों के बीच रूसी हथियारों पर निर्भरता नाम से एक चैप्टर हैं, जिसमें कहा गया है कि, भारतीय सीमा पर चीनी आक्रामकता का गंभीर खतरा है चीन की सरकार के द्वारा भारत-चीन सीमा पर चीन अपनी सैन्य आक्रामकता को लगातार बढ़ा रहा है।'

अमेरिका के हित में है बिल
वहीं, कई एक्सपर्टस का कहना है कि, चीनी आक्रामकता के बीच भारत रूस निर्मित हथियार प्रणाली खरीदने के लिए तत्काल आवश्यकता का सामना कर रहा है, लिहाजा CAATSA बिल, जो कहता है, कि रूसी हथियार खरीदने वाले देशों पर अमेरिका प्रतिबंध लगाएगा, उससे भारत को छूट देना, संयुक्त राज्य अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी के सर्वोत्तम हित में है। आपको बता दें कि, CAATSA के तहत, अमेरिका उन देशों पर प्रतिबंध लगाता है जिनका "ईरान, उत्तर कोरिया या रूस के साथ महत्वपूर्ण लेनदेन" है।

भारत को नाराज नहीं कर सकता US
आपको बता दें कि, भारत ने अक्टूबर 2018 में एस-400 के पांच स्क्वाड्रनों के लिए रूस के साथ 5.43 बिलियन अमरीकी डालर का सौदा किया था। हालांकि, पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा था कि, संयुक्त राज्य अमेरिका ने CAATSA के तहत रूस से S-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद को लेकर भारत पर प्रतिबंध लगाने को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, एशिया में चीन को काउंटर करने के लिए अगर अमेरिका ने भारत को नाराज कर दिया, तो फिर एशिया में अमेरिका के पास कुछ नहीं बचेगा।

अमेरिकी सांसद हैं रो खन्ना
रो खन्ना भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद होने के साथ साथ बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं। इसके साथ ही वे चर्चित वकील और 'हाउस आर्म्ड सर्विस एक्ट' के सदस्य भी हैं। वह 2017 से वह कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं। उनका जन्म 13 सितंबर, 1976 में फिलाडेल्फिया में एक भारतीय पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता पंजाब से यू.एस. में आकर बस गए। रो खन्ना के पिता एक केमिकल इंजीनियर हैं जिन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और फिर मिशिगन विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। उनकी मां शिक्षिका रही हैं। खन्ना ने 8 अगस्त, 2009 से अगस्त 2011 तक राष्ट्रपति बराक ओबामा के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य विभाग में उप सहायक सचिव के रूप में भी काम किया।












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