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जो पोलियो वैक्सीन को ख़तरनाक़ मानते हैं वो हज पर इसे पीने से क्यों नहीं हिचकिचाते: ब्लॉग

By वुसअतुल्लाह ख़ान
फ़ाइल फोटो
Reuters
फ़ाइल फोटो

पाकिस्तान सरकार ने दो दिन पहले पोलियो मुक्त करने की योजना उस वक़्त तक के लिए निलंबित कर दी जब तक पोलियो वैक्सीन लगाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की रक्षा का अच्छा बंदोबस्त नहीं हो जाता. पोलियो वैक्सीन बच्चे को दो बार दी जाती है, एक उस समय, जब बच्चा एक वर्ष का हो और दूसरी बार तीन से चार वर्ष के दरम्यान.

पाकिस्तान में हर साल लगभग 70 लाख बच्चे पैदा होते हैं, लेकिन उनमें से एक वर्ष तक की उम्र के 20 लाख बच्चे वैक्सिनेशन के दायरे से बाहर रह जाते हैं. इनमें ज़्यादा संख्या अफ़ग़ानिस्तान से लगे दो राज्यों यानी ख़ैबरपख्तूख़्वाह और बलूचिस्तान में है.

बताया जाता है कि पिछले चालीस वर्ष से अफ़ग़ानिस्तान की गंभीर स्थिति, आतंकवाद, सैन्य अभियान और शरणार्थियों की आवा-जाही के कारण ये बताना मुश्किल है कि किस बच्चे की वैक्सिनेशन हो चुकी है और किसकी नहीं.

वैक्सीन को लेकर अफ़वाहें

दूसरा कारण ये है कि बहुत से शरारती लोग इस तरह की अफ़वाहें फैलाते रहते हैं कि पोलियो वैक्सीन नपुंसक बना सकती है या इस वैक्सीन में हराम चीज़ें शामिल हैं.

हालाँकि सरकार ने लोगों का शक दूर करने के लिए धार्मिक हस्तियों और उलेमाओं की मदद भी हासिल की है और ये तक कहा है कि अगर पोलियो वैक्सीन में कोई गड़बड़ी होती तो सऊदी अरब और ईरान समेत सब मुसलमान देश वर्षों पहले कैसे पोलियोफ्री घोषित हो गए और अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान अभी तक पोलियोफ्री क्यों नहीं हो पाए.

हालाँकि सिर्फ़ चार-पाँच प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो कोशिश करते हैं कि उनके बच्चों की वैक्सिनेशन न हो, लेकिन इन्हीं चार-पाँच प्रतिशत लोगों की वजह से ही पाकिस्तान को अब तक पोलियो से मुक्ति नहीं मिल पा रही.

जब 1994 में पाकिस्तान में पोलियो हटाने का अभियान शुरू हुआ तो उस समय हर वर्ष 22 हज़ार के लगभग पाकिस्तानी बच्चे पोलियो वायरस का शिकार बन रहे थे, ये संख्या कम होते-होते अब इतनी रह गई है कि इस वर्ष के पहले चार महीनों में सिर्फ़ आठ नए केस सामने आए हैं.

लेकिन पिछले हफ्ते पेशावर में किसी ने ये अफ़वाह फैला दी कि एक स्कूल में 70 बच्चे पोलियो वैक्सिनेशन के कारण बेहोश हो गए.

उसके बाद शाम तक कोई 70 हज़ार बच्चों को उनके माँ-बाप अस्पताल लाए.

बाद में ये अफ़वाह फैलाने वाले पकड़े भी गए, फिर भी इसने अपना काम कर दिखाया और अगले दिन 70 फ़ीसदी माता-पिताओं ने अपने बच्चों की वैक्सिनेशन से इनकार कर दिया. इस तरह 70 लाख बच्चे इस राउंड में वैक्सिनेशन से महरूम हो गए.

महिलाओं के शव
Getty Images
महिलाओं के शव

जीवन से खिलवाड़

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान को छोड़कर सभी सार्क देश पोलियो से मुक्ति पा चुके हैं. भूटान 1986, श्रीलंका 1993, बांग्लादेश और नेपाल साल 2000 और भारत साल 2011 में पोलियो मुक्त हो चुका है.

क्या मज़ाक़ है कि पाकिस्तान में पोलियो वायरस सुरक्षित है, लेकिन पोलियो वैक्सीन वॉलेंटियर्स असुरक्षित. विडंबना ये है कि जो लोग अपने बच्चों के लिए पोलियो वैक्सीन ख़तरनाक़ समझते हैं, वही लोग जब हज या उमरे के लिए जाते हैं तो पोलियो के क़तरे पीने से नहीं हिचकिचाते, क्योंकि इसके बग़ैर वो सऊदी अरब में दाख़िल नहीं हो सकते. ये रवैया अपने बच्चों से मोहब्बत या उनके जीवन से खिलवाड़.

कुछ समझ में नहीं आता कि ऐसे इंसानों के बारे में क्या कहें, जो ख़ुद तो मर जाएंगे, मगर अपने पीछे विकलांग पीढ़ी छोड़ने पर उन्हें कोई दुख या शर्म नहीं.

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English summary
Who believe polio vaccine a harmful thing why they dont hesitate to drink it on Hajj Blog
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