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पाकिस्तान की नाक में दम करने वाली बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी कब और कैसे वजूद में आई?

By मोहम्मद काज़िम

बलूचिस्तान
Getty Images
बलूचिस्तान

अमरीका ने पाकिस्तानी सशस्त्र गुट बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को चरमपंथी संगठनों की सूची में शामिल किया है.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी पहली बार 1970 के दशक की शुरुआत में वजूद में आया था.

ये वो दौर था जब पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो के पहले शासन में बलूचिस्तान में पाकिस्तान की हुकूमत के ख़िलाफ़ सशस्त्र बग़ावत शुरू की गई थी.

हालांकि सैन्य तानाशाह ज़ियाउल हक़ की सत्ता पर क़ब्ज़े के बाद बलूच क़ौम परस्त लीडरों से बातचीत हुई. और इसका नतीजा ये निकला कि सशस्त्र बग़ावत के ख़ात्मे के बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी भी पृष्ठभूमि में चली गई.

फिर पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के शासन में बलूचिस्तान हाई कोर्ट के जज जस्टिस नवाज मिरी के क़त्ल के आरोप में क़ौम परस्त लीडर नवाब खैर बख़्श मिरी की गिरफ़्तारी के बाद साल 2000 से बलूचिस्तान के विभिन्न इलाक़ों में सरकारी प्रतिष्ठानों और सुरक्षा बलों पर हमलों का सिलसिला शुरू हुआ.

व्यापक असर

वक़्त गुज़रने के साथ-साथ हमलों में न सिर्फ़ इज़ाफ़ा हुआ बल्कि इनका दायरा बलूचिस्तान के विभिन्न इलाक़ों में फैल गया.

इन हमलों में से ज़्यादातर की ज़िम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की तरफ़ से क़बूल की जाती रही.

साल 2006 में पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को चरमपंथी संगठनों की सूची में शामिल कर लिया और अधिकारियों की तरफ़ से नवाब ख़ैर बख़्श मिरी के बेटे नवाबज़ादा बालाच मिरी को इसका मुखिया क़रार किया गया.

नवम्बर 2007 में बालाच मिरी की मौत की ख़बर आई और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की तरफ़ से कहा गया कि वे अफ़ग़ानिस्तान की सरहद के क़रीब सुरक्षा बलों से एक झड़प में मारे गए.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी
Getty Images
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी

चीनी ठिकानों के ख़िलाफ़

बालाच मिरी की मौत के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ़ से ब्रिटेन में रहने वाले उनके भाई नवाबज़ादा हीरबयार मिरी को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी का मुखिया बनाया गया.

हालांकि नवाबज़ादा हीरबयार मिरी की तरफ़ से किसी सशस्त्र गुट की अध्यक्षता के दावों को सख़्ती के साथ अस्वीकार किया जाता रहा है.

नवाबज़ादा बालाच मिरी की मौत के बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के नेतृत्व में जो नाम उभर कर सामने आया, वो असलम बलोच का था. इनका शुमार संगठन के सेंट्रल कमांडरों में किया जाने लगा.

असलम बलोच के सुरक्षा बलों की एक कार्रवाई में ज़ख़्मी होने के बाद इलाज के लिए भारत जाने पर उनके संगठन के अन्य लीडरों से मतभेद की ख़बरें भी सामने आईं.

सेहतमंद होने के बाद असलम बलोच बलूचिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न इलाक़ों में रहे.

असलम बलोच के दौर में ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी में इनके प्रभाव में रहने वाले ग्रुप की तरफ़ से आत्मघाती हमले भी शुरू कर दिए गए जिनको संगठन की ओर से फ़िदायीन हमले क़रार दिया जाता रहा है.

ये संगठन चीन-पाकिस्तान आर्थिक ट्रांजिट परियोजना का भी विरोध करती रही है और उसने अपनी हालिया कार्रवाइयों में पाकिस्तान में चीनी टारगेट्स को निशाना बनाया है.

बीएलए की तरफ़ से अगस्त 2018 में सबसे पहले जिस आत्मघाती हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल की गई वो खुद असलम बलोच के बेटे ने ज़िला चाग़ी के हेडक्वॉर्टर दालबंदीन के क़रीब किया था.

इस हमले में सैनिक परियोजना पर काम करने वाले व्यक्तियों की जिस बस को निशाना बनाया गया था उस पर चीनी इंजीनियर भी सवार थे.

नवाबज़ादा हीरबयार मिरी
BBC
नवाबज़ादा हीरबयार मिरी

अन्य सशस्त्र संगठनों से इत्तेहाद

इसके बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने नवम्बर 2018 में कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास पर चरमपंथी हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल की. ये हमला तीन आत्मघाती हमलावरों ने किया था.

इस हमले के बाद ही कंधार के इलाक़े ऐनू मीना में एक कथित आत्मघाती हमले में असलम अच्छू की मौत की ख़बर आई.

जानकारी के मुताबिक़ अब बीएलए के नेतृत्व में बशीर ज़ेब ने संभाली है.

नेतृत्व में बदलाव के बावजूद संगठन की तरफ़ से 'फ़िदायीन हमलों' का सिलसिला रुका नहीं.

इस साल मई में ग्वादर में प्रिरिल कॉन्टिनेंटल होटल पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के मजीद ब्रिगेड के सदस्यों ने ऐसा ही हमला किया.

मजीद ब्रिगेड मजीद बलूच नामक चरमपंथ के नाम पर बनाया गया, जिन्होंने 1970 के दशक में उस वक़्त के प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो पर बम से हमले की कोशिश की थी.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की तरफ़ से ग्वादर होटल पर हमले में शरीक हमलावर की तस्वीरें और वीडियो संदेश भी जारी किए गए थे.

नवम्बर 2017 में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी 'बलूच राजी अजूई सिंगर' या ब्रास नामक बलूच चरमपंथी संगठनों के एक गठबंधन का भी हिस्सा बनी थी.

असलम बलोच आरिफ़ अच्छो अफ़ग़ानिस्तान के कंधार में एक आत्मघाती हमले में मारे गए थे

इस इत्तेहाद में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के अलावा बलूचिस्तान लिब्रेशन फ्रंट और बलूचिस्तान रिपब्लिकन गार्ड्स नामक संगठन भी शामिल हैं.

और इसकी कार्रवाईयों का केंद्र ज़्यादातर चीन-पाकिस्तान आर्थिक ट्रांजिट के आस-पास के इलाक़े हैं.

ब्रास की तरफ़ से अब तक दिसम्बर 2018 को तम्प में सुरक्षा बलों के क़ाफ़िले पर हमले के अलावा इस साल फ़रवरी में तिरबत और पंजगौर के बीच सुरक्षा बलों पर हमले और अप्रैल में ओरमाढ़ा के इलाक़े में कोस्टल हाइवे पर बसों से उतारकर नौसेना के अधिकारियों के क़त्ल के दावे सामने आ चुके हैं.

BBC Hindi
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English summary
When and how did the Balochistan Liberation Army, which stabbed Pakistan, came into existence?
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