‘नहीं पता था फेसबुक बन जाएगा राक्षस’, Whatsapp की सेल कराने वाले नीरज अरोड़ा का छलका दर्द
नई दिल्ली, 5 मई। व्हाट्सएप के 22 अरब डॉलर में बिकने के बाद व्हाट्सएप (WhatsApp) के पूर्व चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) नीरज अरोड़ा को अब पछतावा हो रहा है। अरोड़ा ने इस डील को लेकर एक के बाद एक ट्वीट किए। उन्होंने अपने ट्वीट में बताया कि कैसे व्हाट्सएप डील के बाद दिशा से भटक गया है, जिसकी कल्पना संस्थापकों ने मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) के नेतृत्व वाले समूह ने की थी।

व्हाट्सएप और फेसबुक के बीच डील करवाने में नीरज अरोड़ा ने अहम भूमिका निभाई थी। व्हाट्सएप के पूर्व बिजनेस ऑफिसर नीरज अरोड़ा ने 2014 में इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और फेसबुक के बीच एक बड़ा सौदा कराया था। लेकिन उन्होंने अब इस पर खेद व्यक्त किया है। ट्विटर और लिंक्डइन पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि व्हाट्सएप और फेसबुक के बीच 22 अरब डॉलर के सौदे पर उन्हें पछतावा है।
वहीं पिछले कुछ सालों से व्हाट्सएप के संस्थापकों सहित कर्मचारियों ने भी इस बात पर निराशा व्यक्त की है कि मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली कंपनी द्वारा अधिग्रहण के बाद से कंपनी ने अपनी दिशा बदल दी। अरोड़ा ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट पर लिखा कि व्हाट्सएप फेसबुक का दूसरा सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। उन्होंने कहा कि वे अकेले व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें इस बात का पछतावा है कि व्हाट्सएप फेसबुक का हिस्सा बन गया।
नीरज अरोड़ा ने कहा कि सिलिकॉन वैली के विकास के लिए लोगों को इस बारे में बात करने की आवश्यता है कि खराब व्यापार मॉडल नेक इरादे वाले उत्पादों, सेवाओं और विचारों की दिशा बदल देते हैं। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण को लेकर मैंने कहा था कि किसी यूजर का डेटा नहीं इस्तेमाल किया जाएगा और कभी कोई विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा। साथ क्रॉस-प्लेटफॉर्म ट्रैकिंग नहीं करने पर भी चर्चा हुई थी। इन सब बातों पर फेसबुक और उसका मैनेजमेंट इन शर्तों पर तैयार हो गया। जिसके बाद यह लगा कि वो हमारे मिशन के अनुसार चलने वाले हैं। लेकिन बाद में ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ।
2014 में फेसबुक ने 22 अरब डॉलर अधिग्रहण करने के बाद 2017-2018 तक बदलवा होने लगा। नीरज ने कहा कि सिर्फ वे अकेला नहीं हूं जो फेसबुक का हिस्सा बन जाने के लिए पछता रहे हैं। उन्होंने कहा कि टेक कंपनियों को यह स्वीकार करने की जरूरत है कि कब उन्होंने कुछ गलत किया। शुरुआत में किसी को पता नहीं था कि फेसबुक एक राक्षस बन जाएगा, जो यूजर्स का डेटा खाएगा और पैसे (Dirty Money) उगलेगा। नीरज ने कहा कि टेक ईकोसिस्टम के इवॉल्व होने के लिए हमें इस बात को लेकर बात करने की जरूरत है कि कैसे खराब बिजनस मॉडल अच्छे-अच्छे प्रोडक्ट, सर्विस और आइडिया को गलत बना देते हैं। इन सबके साथ नीरज ने वॉलस्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट का लिंक शेयर करते हैं।












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