फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया पनडुब्बी विवाद के बीच मैक्रों और पीएम मोदी निभा रहे हैं क्या किरदार ? जानिए

पेरिस, 22 सितंबर: अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटड किंग्डम के साथ जिस तरह से गुपचुप त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाया है, उसने फ्रांस को बहुत ही नाराज कर दिया है। अब फ्रांस किसी के भी आधिपत्य को नहीं मानने वाले मूड में आ गया है और जाहिर है कि इशारा अमेरिका और उसके मौजूदा नेतृत्व की ओर है। बड़ी बात ये है कि फ्रांस को इसके लिए भारत से काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया में जो एयूकेयूएस की खिचड़ी पक रही है उससे फ्रांस को बड़ा नुकसान हो गया है। यही वजह है कि अब वह भारत का खास सहयोग चाहता है और इसके लिए वहां के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है। यहां गौर करने वाली बात है कि मैक्रों ने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से ठीक पहले उनसे बात करके उनके सामने अपना पक्ष रख दिया है।

अमेरिका से नाराजगी के बीच भारत से सहयोग की उम्मीद

अमेरिका से नाराजगी के बीच भारत से सहयोग की उम्मीद

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने मंगलवार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा की है। यह बातचीत ऑस्ट्रेलिया की ओर से फ्रांस से 40 अरब डॉलर की पनडुब्बी खरीदने का ऑर्डर रद्द करने के बाद हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में मंगलवार को बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच इस मसले पर फोन पर बात हुई और उस दौरान अफगानिस्तान संकट से जुड़े मुद्दे पर भी मंथन किया गया। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह पारंपरिक पनडुब्बियों के बेड़े के निर्माण के लिए फ्रांस के नेवल ग्रुप के साथ 2016 की शुरुआत में हुए सौदे को रद्द कर देगा। ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस से पनडुब्बी डील ही नहीं रद्द की है, उसे यह कहकर भड़का दिया है कि वह एयूकेयूएस नाम के त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी के बाद उससे पनडुब्बी बनवाने की बजाय अमेरिकी और ब्रिटिश तकनीक से कम से कम 8 परमाणु-शक्ति पनडुब्बियों का निर्माण करेगा।

ऑस्ट्रेलिया ने रद्द किया है फ्रांस से पनडुब्बी सौदा

ऑस्ट्रेलिया ने रद्द किया है फ्रांस से पनडुब्बी सौदा

फ्रांस के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया ने पनडुब्बी सौदा रद्द करने से कुछ ही घंटे पहले उसे इसकी सूचना दी थी। फ्रांस ने इसे पीठ में छुरा घोंपना बताया है। फ्रांस इतना नाराज हुआ कि पिछले हफ्ते उसने पुराना सौदा रद्द किए जाने के बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को वापस बुलवा लिया। फ्रांस नए रणनीतिक गठबंधन के लिए गुपचुप बातचीत करने के लिए अमेरिका से ज्यादा नाराज है। फ्रांस की इस नाराजगी से चीन को भी मौका मिला है और उसने एयूकेयूएस को खारिज करते हुए यह चेतावनी दे डाली है कि इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ लग जाएगी।

फ्रांस ने दिया है आपसी सहयोग जारी रखने का भरोसा

फ्रांस ने दिया है आपसी सहयोग जारी रखने का भरोसा

दरअसल, फ्रांस ऑस्ट्रेलिया से ही नहीं अमेरिका और इंग्लैंड से भी खुद को छला हुआ महसूस कर रहा है और इसी कड़ी में उसके राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को देखते हुए पीएम मोदी से बातचीत की है, जिसमें दोनों नेताओं ने कहा है कि वो 'खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।' इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया कि 'नजदीकी संबंधों पर आधारित विश्वास और परस्पर सम्मान के तौर पर उद्योग और तकनीकी आधार समेत भारत की सामरिक स्वायत्तता को मजबूत करने की (फ्रांस की) प्रतिबद्धता जारी रहेगी।'

अमेरिकी आधिपत्य को फ्रांस का चैलेंज ?

अमेरिकी आधिपत्य को फ्रांस का चैलेंज ?

खास बात ये है कि मैक्रों ने पीएम मोदी से यह बातचीत उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से तय चर्चा से ठीक पहले की है। बाइडेन ने मैक्रों से भी बातचीत की गुजारिश की है, लेकिन अभी तारीख पक्की नहीं हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति के दफ्तर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फ्रांस और भारत का साझा दृष्टिकोण का लक्ष्य 'किसी भी प्रकार के आधिपत्य को खारिज करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और कानून के शासन' को बढ़ावा देना है। (सारी तस्वीरें फाइल)

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