इजरायल में ओल्गा बीच पर पीएम मोदी ने नेतन्याहू से कहा मुझे पानी की जरूरत है
जेरूसलम। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत अब सामने आ गई है। पीएम नेतान्याहू ने यूरोपियन यूनियन (ईयू) के नेताओं के साथ हुई एक बातचीत में न सिर्फ ईयू को फटकार लगाई बल्कि उन्होंने कई और बातें भी कहीं। नेतान्याहू ने जो कुछ भी कहा वह एक सारी बातचीत माइक्रोफोन के जरिए सामने आ गई है।

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पीएम मोदी ने की पानी पर बात
बेंजामिन नेतन्याहू हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान, चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री बोहूस्लाव सेाबोत्का, पोलैंड के प्रधानमंत्री बिएटा साइजड्लो और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से बातचीत कर रहे थे। इसी बातचीत में उन्होंने भारत और चीन का जिक्र किया। इस बातचीत की जानकारी दुर्घटनावश बाहर आ गई और फिर पास के कमरे में बैठे पत्रकारों को ओपन माइक की वजह से सारी जानकारी मिल गई। जैसे ही इस बात की जानकारी लगी इस फीड को तुरंत काट दिया गया। नेतन्याहू ने भारत और चीन के साथ बढ़ती तकनीकी सहयोग पर बात की। उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति ने इजरायल को 'अविष्कार का महारथी' करार दिया है। उन्होंने कहा, 'चीन के साथ इजरायल का रिश्ता काफी खास और इजरायल राजनीतिक मुद्दों के बारे में परवाह नहीं करता है।' इसके बाद इजरायली पीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल दौरे के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय नेता ने उनसे भारत के हितों का ध्यान रखने की बात कही। पीएम मोदी ने उनसे कहा, 'मुझे और ज्यादा पानी, साफ पानी की जरूरत है। मुझे यह कहां से मिलेगा?'
अमेरिका और ओबामा पर भी बात
इजरायल के पीएम ने यूरोपियन यूनियन पर हमले बोलते हुए कहा कि हम अजीब हालात देख रहे हैं। यूरोपियन यूनियन दुनिया के उन देशों का संगठन है जो इजरायल के साथ संबंधों को लेकर शर्तें लगाता है। उन्होंने यूरोपियन यूनियन को ज्यूईश समुदाय के साथ भेदभाव भरा बर्ताव करने का आरोप लगाया। नेतन्याहू ने कहा कि वह अपने हितों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं लेकिन इजरायल के हितों की बात कर रहे हैं। अगर यहां पर उनके अपने हित होते तो फिर वह इस मुद्देको ही नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि इजरायल पर हमले करना बंद करिए और इजरायल का समर्थन करिए। नेतन्याहू ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ अपने मतभेदों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीति को लेकर बड़ी समस्या थी लेकिन अब काफी अंतर है। अब ईरान के खिलाफ मजबूत रवैया है और हमारे क्षेत्र अमेरिका की मौजूदगी बदली है। यह काफी सकारात्मक है।












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