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सऊदी अरब के तेल का आख़िर रहस्य क्या है

By Bbc Hindi

सऊदी
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19वीं सदी के मध्य में तेल इंडस्ट्री का जब उभार हुआ तब से दुनिया के ऊर्जा स्रोत का केंद्र बना हुआ है.

तेल के कारण जंग भी हुई और इसकी आपूर्ति पर नियंत्रण के लिए दुनिया के ताक़तवर देशों में आज भी टकराव है. आधुनिक समय में तेल केवल ऊर्जा का ही स्रोत नहीं बल्कि तमाम युद्धों और टकराव का भी है.

मध्य-पूर्व के सऊदी अरब, ईरान, इराक़, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में सबसे बड़ा तेल भंडार हैं. ये तेल भंडार 19वीं सदी मध्य में ही मिले थे लेकिन आज भी यहां तेल मिलने की संभावना ख़त्म नहीं हुई है. हाल ही में पाकिस्तान ने कराची के तटवर्ती इलाक़ों में तेल और गैस भंडार की खोज में करोड़ों डॉलर खर्च कर खुदाई शुरू की था लेकिन उसे निराशा हाथ लगी थी.

लेकिन पिछले हफ़्ते रविवार को ईरान के लिए ख़ास रहा. ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने घोषणा कर बताया कि मुल्क दक्षिणी-पश्चिमी प्रांत में तेल का एक विशाल भंडार मिला है. एक अनुमान के मुताबिक़ यह तेल भंडार 53 अरब बैरल है. चौतरफ़ा आर्थिक प्रतिबंध झेल रहे ईरान के लिए यह सुखद ख़बर है.

यह तेल क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम ईरान के 2,400 वर्ग किलोमीटर इलाक़ों में फैला हुआ है. ईरान के राष्ट्रपति के अनुसार यह इलाक़ा ईरान के ख़ुज़ेस्तान प्रांत में है. 65 अब बैरल वाला ईरान के अहवाज़ तेल क्षेत्र के बाद यह दूसरा बड़ा तेल क्षेत्र होगा.

तेल भंडार
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ईरान के पास अभी कुल प्रमाणित तेल भंडार 155.6 अरब बैरल है. नई खोज के बाद ईरान के कुल तेल भंडार में 34 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हो गया है. अमरीकी इन्फ़र्मेशन एनर्जी एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक़ ईरान दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश है और दुनिया का दूसरा बड़ा गैस भंडार वाला देश.

इन नए भंडारों की घोषणा करते हुए रूहानी ने अमरीका पर भी हमला बोला.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ रूहानी ने कहा, ''हमलोग अमरीका से कहना चाहते हैं कि हम एक अमीर देश हैं और आपकी शत्रुता के साथ कठोर प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के तेल उद्योग के कामगारों और इंजीनियरों ने नए तेल क्षेत्र की खोज की है.''

दुनिया भर के कुल कच्चे तेल का 40 फ़ीसदी उत्पादन ओपेक देश यानी ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज करते हैं. ओपेक और अमरीकी एनर्जी इन्फ़र्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के डेटा के अनुसार दुनिया भर के कुल प्रामाणिक तेल भंडार का 82 फ़ीसदी तेल इन देशों के पास हैं.

ओपेक में कुल 14 देश हैं- अल्जीरिया, अंगोला, कांगो, इक्वाडोर, इक्वाटोरियल गेना, गबोन, ईरान, इराक़, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेज़ुएला हैं. इन देशों के पास कच्चे तेल का सबसे बड़ा भंडार है. ईरान, इराक़, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला ओपेक के संस्थापक देश रहे हैं. क़तर और इंडोनेशिया ख़ुद से ही ओपेक से बाहर हो गए थे.

वेनेज़एला
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जिन देशों के पास सबसे बड़ा तेल भंडार है वो हैं- वेनेज़ुएला 301 अरब बैरल, सऊदी अरब 266 अरब बैरल, कनाडा 170 अरब बैरल, ईरान 158 अरब बैरल, इराक़ 143 अरब बैरल, कुवैत 102 अरब बैरल, संयुक्त अरब अमीरात 98 अरब बैरल, रूस 80 अरब बैरल, लीबिया 48 अरब बैरल और नाइजीरिया 37 अरब बैरल.

सऊदी का तेल भंडार रहस्य क्यों?

सऊदी का तेल भंडार पिछले पाँच दशकों से तेल विशेषज्ञों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं है. तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) को सऊदी की सरकार ने जो अनुमानित भंडार की जानकारी दी है उसके मुताबिक़ प्रमाणित तेल भंडार 266 अरब बैरल्स है. ओपेक ने 2015 में अपनी वार्षिक बुलेटिन में इसकी जानकारी दी थी.

अगर ये नंबर सही है तो औसत 1.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन उत्पादन के हिसाब से सऊदी का तेल भंडार अगले 70 सालों में ख़त्म हो जाएगा. लेकिन आधिकारिक आंकड़ों को लेकर पर्याप्त संदेह हैं.

इसकी वजह यह है कि 1987 में सऊदी ने अपना तेल भंडार 170 अरब बैरल्स बताया था, जिसे 1989 में बढ़ाकर 260 अरब बैरल्स कर दिया था.

स्टटिस्टिकल रिव्यू ऑफ़ वर्ल्ड एनर्जी 2016 की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी 94 अरब बैरल्स तेल बेच चुका है या खर्च कर चुका है, फिर भी आधिकारिक रूप से उसका भंडार 260 से 265 अरब बैरल्स ही है.

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अगर सरकार का डेटा सही है तो इसका मतलब यह हुआ कि सऊदी ने तेल के नए ठिकाने खोजे हैं या फिर अनुमानित भंडार को ही बढ़ा दिया है.

अनुमानित भंडार को बढ़ाने का एक आधार यह हो सकता है कि जिन ठिकानों से तेल का उत्पादन हो रहा है वहीं और तेल है या फिर अब तक जितने तेल निकाले गए हैं उसकी आपूर्ति फिर से हो गई है.

लेकिन सऊदी में 1936 से 1970 के बीच ही तेल भंडार के विशाल और बेशुमार ठिकानों की खोज की गई है. इसके बाद इसकी तुलना में सऊदी में तेल के नए ठिकानों की खोज नहीं की गई है.

समस्या यह है कि जहां-जहां तेल उत्पादन हो रहा है उसका लेखा-जोखा और अनुमानित भंडार सरकार काफ़ी गोपनीय रखती है. इसकी जानकारी भीतर के एक गिने-चुने लोगों की होती है. ऐसे में किसी भी तथ्य की पुष्टि करना असंभव सा लगता है. तेल विश्लेषकों की विश्वसनीयता पर भी यह सवालिया निशान है कि वो इस बात को बताने की हालत में नहीं हैं कि सऊदी में तेल उत्पादन कब गिरना शुरू होगा.

सऊदी अभी सबसे ज़्यादा तेल का उत्पादन कर रहा है. इससे उस भविष्यवाणी को झटका लगा है जिसमें बताया गया था कि सऊदी का तेल उत्पादन शिखर पर जाने के बाद नीचे आ जाएगा.

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अनुमानित भंडार

भविष्य में तेल उत्पादन की क्षमता को जानने के लिए अलग-अलग तरीक़े हो सकते हैं. इससे भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि तेल इंडस्ट्री में कितने लोग काम कर रहे हैं.

तेल भंडार को समझने के लिए एक ज़रिया यह भी है कि उत्पादन शुरू होने से पहले तेल का ख़ज़ाना कितना बड़ा था. उत्पादन शुरू होने से पहले तेल ख़ज़ाने का मतलब ओरिज़नल ऑइल इन प्लेस (ओओआईपी) से है. 1970 के दशक में इस बात को लेकर व्यापक सहमति थी कि सऊदी अरब ने 530 अरब बैरल्स की ओओआईपी की खोज की थी.

अनुमानित ओओआईपी की जानकारी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीति पर अमरीकी सीनेट की उपसमिति को सऊदी अरब और अमरीका की तेल कंपनी अरामको की तरफ़ से दी गई थी.

अरामको तब चार अमरीकी तेल कंपनी एक्सोन, टेक्साको, सोशल और मोबिल और सऊदी की साझी कंपनी थी. ऐसे में तेल भंडार की अहम जानकारियों को साझा किया जाता था.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ अमरीकी सीनेट की इस उपसमिति की रिपोर्ट क़रीब 40 साल पुरानी है पर इसमें तेल भंडार को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है.

1979 में अमरीकी सीनेट में पेश की गई इस जानकारी को अंतिम सार्वजनिक जानकारी के तौर पर देखा जाता है. लेकिन संपूर्ण ओओआईपी का उत्पादन संभव नहीं हो पाता है. ऐसे में तेल विश्लेषकों ने ओओआईपी के उत्पादन की कई कैटिगरी बनाई है. इसका आधार तकनीकी और आर्थिक है. तेल भंडार को कई श्रेणियों में बांटा गया है. पहला है प्रमाणिक भंडार.

प्रमाणिक भंडार को लेकर सबसे ज़्यादा विश्वास होता है. इसके बारे में जो अनुमान लगाया जाता है वो लगभग सही साबित होता है. तकनीकी और आर्थिक रूप से यह ज़्यादा मुकम्मल होता है. इसमें तेल मिलने की संभावना 90 फ़ीसदी होती है.

दूसरा है संभावित रिज़र्व. संभावित श्रेणी वाले तेल भंडार में अटकलें और आशा एक साथ होती हैं. इसमें अनुमानित तेल और व्यावसायिक रूप के उत्पादन की संभावना महज 10 फ़ीसदी होती है.

1970 के दशक के आख़िरी सालों में अरामको ने प्रमाणिक तेल भंडार 110 अरब बैरल्स बताया था. इसके साथ ही प्रत्याशित और संभावित भंडार क्रमशः 178 अरब बैरल्स और 248 अरब बैरल्स बताया था. 1970 के दशक में अरामको और उसके पार्टनर्स के बीच उत्पादन की श्रेणियों को लेकर काफ़ी विवाद हुआ था.

ईरान
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प्रमाणित या संभावित?

1980 से सऊदी अरब के पास अरामको का स्वामित्व है. 1982 से कंपनी के पास तेल भंडार के फील्ड को लेकर जो जानकारी होती थी, उसे गोपनीय बना दिया गया. आगे चलकर सऊदी अरब ने ओपेक को प्रमाणिक भंडार के बारे में जानकारी साझा करना शुरू किया.

सऊदी ने ओपेक को प्रमाणिक तेल भंडार 168-170 अरब बैरल्स बताया था. सऊदी का यह आँकड़ा अरामको ने अपने पार्टनर्स को कुछ साल पहले जो दिया था, उससे ज़्यादा है.

अरामको ने प्रमाणिक तेल भंडार 110 अरब बैरल्स बताया था. लेकिन अरामको ने संभावित तेल भंडार की जानकारी जो अमरीकी सीनेट को दी थी, उसके यह क़रीब है. आंकड़ों में असामनता से कई सवाल उठते हैं.

1988/89 में प्रमाणिक तेल भंडार एक बार फिर से ज़्यादा करके 260 अरब बैरल्स बताया गया. ऐसा तब हुआ जब कोई नए तेल भंडार की खोज नहीं की गई.

यह आंकड़ा अरामको ने अपने पार्टनर्स को जो दिया था, उससे बहुत ज़्यादा था, लेकिन 1970 के दशक में संभावित तेल भंडार का आंकड़ा 248 अरब बैरल्स था, उससे यह ज़्यादा नहीं था.

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ऐसे में सवाल उठने लगा कि क्या सऊदी ने तेल भंडार को बढ़ाकर दिखाने के लिए संभावित भंडार को प्रमाणिक भंडार बता दिया?

द सोसाइटी ऑफ पेट्रोलियम इंजीनियर्स और यूएस सिक्यॉरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन ने तेल भंडार की श्रेणी को पारिभाषित किया है. हालांकि यह स्पष्ट है कि सऊदी अरामको ने ओपेक को प्रमाणिक तेल भंडार की जो जानकारी दी है वो इसी परिभाषा के तहत है.

इस पर भरोसा नहीं करने का कोई विकल्प नहीं है क्योंकि बाहरियों के लिए जानकारी गोपनीय है और इसकी प्रमाणिकता को जांचने का कोई रास्ता नहीं है.

यह कोई असामान्य बात नहीं है कि कोई भी देश शुरू में अनुमानित तेल भंडार से ज़्यादा तेल का उत्पादन करता है. नए तेल और गैस भंडारों की खोज से कुल तेल भंडार में बढ़ोतरी होती है. ज़ाहिर है इससे अनुमानित भंडार में भी बढ़ोतरी होती है.

तेल भंडार को लेकर कोई अनुमान स्थिर नहीं रह सकता. कई बार प्रत्याशित तेल भंडार संभावित की श्रेणी में आ जाते हैं और आख़िर में प्रमाणिक बन जाते हैं. लेकिन सऊदी के साथ दिक़्क़त यह है कि वो 1980 के दशक से ही 265 अरब बैरल्स के आसपास है.

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English summary
what is the mystery of oil in saudi arabia
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