क्या है सूर्य पर आग की घाटी जिसमें हुआ धमाका ? इसका पृथ्वी पर होने वाला असर जानिए
वाशिंगटन, 6 अप्रैल: सूर्य पर प्राकृतिक गतिविधियों में काफी तेजी आई हुई है। इस साल अबतक के पहले तीन-चार महीनों में ही सूरज ने अलग-अलग वजहों से अपनी असीम ऊर्जा अंतरिक्ष की ओर बिखेरी हैं, जिसका कई बार पृथ्वी पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है और कई दफे हल्का असर होकर रह गया है। एकबार फिर से सूरज पर बीते रविवार को विस्फोट हुआ है और इसबार जिस इलाके में यह प्राकृतिक घटना घटी है, उसे सूरज पर आग की घाटी कहते हैं। जानिए यह है क्या और इसका धरती पर क्या असर होने वाला है।

सौर चक्र की गतिविधियों में आई है तेजी
सौर चक्र की गतिविधियां तेज होने से यह अंतरिक्ष के शून्य क्षेत्र में प्लाजमा की बौछारें कर रहा है और धरती भी उन सौर प्लाजमा की बौछार के दायरे में है। नेशनल ओशीऐनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के अधीन आने वाले अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) पूर्वानुमान केंद्र बीते रविवार को सूर्य के आग की घाटी से निकली ऊर्जा की वजह से पृथ्वी पर सौर विकिरण तूफान (सोलर रेडिएशन स्टॉर्म) की भविष्यवाणी की है। अमेरिका स्थित स्पेस ऑब्जर्वर ने इसकी वजह से सूरज से निकलने वाली कोरोनल मास इजेक्शन के चलते एक भू-चुंबकीय तूफान का अनुमान जाहिर किया है। सूर्य से यह कोरोनल मास इजेक्शन उसके एस22डब्ल्यू30 क्षेत्र के पास से निकली है, जिसके चलते सौर विकिरण तूफान का अनुमान लगाया है, जिसके प्रोटोन का स्तर एस1 से ज्यादा होने की संभावना है।
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क्या है सूर्य पर आग की घाटी ?
सूर्य के जिस क्षेत्र में ताजा विस्फोट हुआ है, उसे सूर्य पर आग की घाटी कहते हैं। स्पेस वेदर के मुताबिक सूर्य पर आग की घाटी चुंबकत्व का एक अंधकारमय फिलामेंट है, जो कि सूर्य के वायुमंडल में खुल गया है। इस घाटी की दीवार कम से कम 20,000 किलोमीटर ऊंची है और इससे 10 गुना ज्यादा लंबी है। एक्सपर्ट का अनुमान है कि चुंबकीय फिलामेंट के टुकड़े विस्फोट वाली जगह से पृथ्वी की ओर कोरोनल मास इजेक्शन ( सीएमई) के रूप में निकल सकते हैं।

बुधवार से गुरुवार तक दिख सकता है असर
सौर और हेलिओस्फेरिक ऑब्जर्वेटरी ने पाया है कि एक विषम पूर्ण-प्रभामंडल वाला कोरोनल मास इजेक्शन धमाके की जगह से बाहर निकल रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोनल मास इजेक्शन का ज्यादा हिस्सा पृथ्वी से नहीं टकराएगा, लेकिन कुछ इसको जरूर हिट करेगा। स्पेसवेदर ने अपने अनुमान में पाया है कि '(सौर)तूफानी बादल का बहुत ही छोटा हिस्सा पृथ्वी की ओर बढ़ता दिखा है और हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र से 5 या 6 अप्रैल को टकरा सकता है, एक जगमगाता हुआ झटका जी1 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान पैदा कर सकता है।' यह गुरुवार यानी 7 अप्रैल तक बढ़ सकता है।

भू-चुंबकीय तूफान क्या है ?
भू-चुंबकीय तूफान (जीओमैग्नेटिक स्टॉर्म) उस प्राकृतिक घटना को कहते हैं, जिसके चलते पृथ्वी के मैग्नेटोस्फेयर में बड़ी गड़बड़ी उत्पन्न होती है। इसकी वजह से सूरज से आने वाली और पृथ्वी के चारों ओर मौजूद अंतरिक्ष के वातावरण में मौजूद ऊर्जा का आपस में टकराव की स्थिति बन जाती है। इस साल सूरज पर हुए विस्फोट की वजह से अभी तक पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाली यह तीसरी प्रमुख प्राकृतिक घटना होगी।

भू-चुंबकीय तूफान का क्या असर हो सकता है ?
इसके चलते पॉवर ग्रीड में दिक्कत आ सकती है। साथ ही साथ धरती की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट पर भी असर पड़ सकता है। बहुत ज्यादा ऊंचाई पर उजाले की स्थिति भी बन सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक भू-चुंबकीय तूफान के चलते रेडियो के सिंग्नल भी कुछ देर के लिए गायब हो सकते हैं। 4 अप्रैल यानी सोमवार को भी एक इसी तरह का विस्फोट दिखाई पड़ा था, हालांकि एक्सपर्ट इसको लेकर निश्चित नहीं है कि इसकी वजह से कोई सीएमई पृथ्वी से टकराएगा या नहीं।(ऊपर की तस्वीरें-प्रतीकात्मक)

इस बार हल्के प्रभाव का है अनुमान
सौर चक्र की गतिविधियों में तेजी आने की वजह से भूचुंबकीय तूफान के पृथ्वी से टकराने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसबार वैज्ञानिकों ने इस तूफान के बहुत ही हल्के प्रभाव का अनुमान लगाया है। जबकि इसी साल फरवरी की शुरुआत में एलन मस्क के स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट जल भी चुके हैं। तब पृथ्वी की कक्षा में मौजूद कंपनी के 40 स्टारलिंक सैटेलाइट एक ज्यादा शक्तिशाली कोरोनल मास इजेक्शन की चपेट में आकर तबाह हो गए थे।












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