नमक के दलदल क्या हैं, विश्व में 90% के विलुप्त होने की आशंका, जानें इसका दुष्परिणाम?
दुनिया में आने वाले दशकों में 90% से ज्यादा नमक के दलदल समुद्र में डूब जाएंगे। यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि इससे समुद्री अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।

ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से समुद्र का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन, अब इसकी वजह से एक बहुत ही गंभीर आशंका पैदा हुई है, जिसके बारे में पहले विशेष शोध नहीं किए गए थे। अब वैज्ञानिकों ने पाया है कि समुद्र के स्तर में इजाफे की वजह से दुनिया में जितने भी नमक के दलदल हैं, वह 90 प्रतिशत से अधिक जलमग्न हो जाएंगे। जबकि, यह जैव-विविधता को बनाए रखने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। समुद्र से जुड़ी अर्थव्यवस्था पर भी इसका बहुत व्यापक असर पड़ सकता है।

नमक के दलदल समुद्र में समा जाएंगे- शोध
पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में नमक के दलदल (salt marshes) की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही है। लेकिन, डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट के मुताबक एक नए शोध से पता चला है कि दुनिया में जितने भी नमक के दलदल हैं, उनमें से 90 फीसदी से ज्यादा समुद्र के स्तर बढ़ने से उसके भीतर समा सकते हैं। पिछले 50 वर्षों से मरीन बायोलॉजिकल लेबोरेटरी (MBL) के शोधकर्ता मैसाचुसेट्स में फालमाउथ स्थित ग्रेट सिप्पेविसेट मार्श में वनस्पतियों की निगरानी कर रहे हैं, जिससे दलदली घासों की प्रजातियों पर ज्यादा नाइट्रोजन स्तर के प्रभाव को जाना जा सके। लेकिन, नई रिसर्च उनकी चिंता भी बढ़ा दी है।

28 मार्च को प्रकाशित हुई है रिसर्च
अब तक के अनुभव में वैज्ञानिकों ने यही पाया है कि ज्यादा नाइट्रोजन स्तर से वनस्पतियों को लाभ होता है और दलदली सतह में भी विस्तार होता है। लेकिन, 28 मार्च, 2023 को जर्नल साइंस ऑफ द टोटल एन्वायरोमेंट में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि वैश्विक समुद्र स्तर में इजाफे की वजह से नमके के दलदल के डूबने की स्थिति में यह इकोसिस्टम को कायम रख पाना मुश्किल है। एक प्रेस रिलीज में इस शोध के लीड ऑथर इवान वैलिएला ने कहा है, 'अगर समुद्र के स्तर में बहुत कम की भी वृद्धि अनुमानित करें...तो भी दुनिया के 90 फीसदी से ज्यादा नमक के दलदलों के उसमें समा जाने या सदी के अंत तक कम हो जाने की की संभावना है।'

नमक के दलदल क्या हैं?
नेशनल ओशीऐनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक नमक के दलदल समुद्र के तट से सटी वह आर्द्रभूमि हैं,जो ज्वार द्वारा लाए गए खारे पानी से भर जाती हैं और फिर उसमें से पानी निकल जाता है। यह दलदली होती हैं, क्योंकि यह गहरी मिट्टी और पीट (पीट वनस्पति के सड़ने से बनती है, जो कई फीट तक मोटी हो सकती है) से बनी होती है। पानी से भरे होने और जड़ों की वजह से यह काफी स्पंजी होती है।
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नमक के दलदल डूबने का दुष्परिणाम?
नमक की दलदली भूमि को मत्स्य पालन, समुद्र तट और उसके पास बसे लोगों के लिए आवश्क माना जाते है। यह वहां की अर्थव्यवस्था और संस्कृति के अभिन्न हिस्से हैं। यह क्षेत्र कई समुद्री मछली प्रजातियों के लिए भोजन भी उपलब्ध कराते हैं, उन्हें शरण भी देते हैं और उनके लिए प्राकृतिक आवास भी उपलब्ध कराते हैं। 75 फीसदी से ज्यादा मत्स्य प्रजातियां इनके भरोसे हैं, जिनमें झींगा, नीला केकड़ा और कई तक की फिनफिश शामिल हैं। नमक के दलदल समुद्री लहरों से भी तटों के कटाव को रोकते हैं और उनके लिए एक दीवार का काम करते हैं। यह वर्षा जल को धीरे-धीरे सोखते हैं और उसे फिल्टर करके पानी की गुणवत्ता की रक्षा करते हैं और अतिरिक्त पोषक तत्वों को भी मेटाबोलाइज करने में सहायता करते हैं।

क्या हो सकते हैं उपाय?
लेकिन, इवान ने इस ओर इशारा दिलाया है कि यदि अनुमान के मुताबिक समुद्र का स्तर बढ़ना जारी रहा तो छोटे दलदली पौधों के लिए जगह नहीं रह जाएगी। वह इस तरह डूब जाएंगे कि बच नहीं सकेंगे। तब सिर्फ यही हो सकता है कि नमक के दलदल को ऊपर की ओर खिसकाया जाए। लेकिन, वैज्ञानिकों का मानना है कि नमक के दलदली पौधों की रक्षा के लिए यह उपाय भी सब जगह कारगर नहीं हो सकता है। कुछ स्थानों पर तो यह असभंव होगा। एमबीएल के एक वैज्ञानिक जेवियर ल्लॉरेट ने कहा है कि 'समुद्र स्तर में वृद्ध नमक के दलदल के लिए बहुत ही गंभीर खतरा है। इस इकोसिस्टम के साथ क्या होने जा रहा है, इसपर हमें जरूर ध्यान देना होगा और सीखना होगा कि कैसे होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है, ताकि ये दल दलदल प्रकति के साथ-साथ मानव के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखें।'













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