Iran Military Plant: ईरान के सैन्य ठिकाने पर इजरायल ने कराया हमला! अमेरिकी अधिकारियों का दावा
हाल के वर्षों में इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े लोगों और कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले अप्रैल 2021 में भूमिगत नतांज परमाणु केंद्र पर हमला किया गया था जिसका इल्जाम भी इजरायल पर लगा था।

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ईरान के केंद्रीय शहर इस्फहान में ड्रोन हमले की खबर की चर्चा दुनिया भर में हो रही है। ईरान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ये एक नाकाम हमला था, जिसमें तीनों ड्रोन हमलों को असफल कर दिया गया। एक सैन्य संयंत्र पर हुए इस हमले में हालांकि कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ, लेकिन इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। अब इस हमले के पीछे इजरायल का हाथ होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि अब तक इजरायल ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का ऐसा मानना है कि इस हमले के पीछे इजरायल का हाथ है।

अमेरिकी अधिकारियों ने जताया शक
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा है कि इस हमले में इजरायल शामिल है। नाम न छापने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि इसकी संभावना अधिक है इसमें इजरायल का हाथ है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इसमें अमेरिका की कोई भूमिका है या नहीं। यह हमला ऐसे वक्त हुआ है, जब ईरान और पश्चिम देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनातनी चल रही है। इसके साथ ही पश्चिमी देश ईरान पर ये आरोप लगा रहे हैं कि वह रूस को लंबी दूरी वाले ड्रोन अटैक की सप्लाई कर रहा है।

इजरायल पर नहीं की टिप्पणी
ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन ने इस ड्रोन हमले की आलोचना करते हुए इसे कायरतापूर्ण बताया है। वहीं सांसद हुसैन मिर्ज़ाई ने कहा है कि इसमें इजरायल का हाथ है इसकी सबसे अधिक संभावना है। हालांकि ईरान के रक्षा मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है कि हमला किसने किया। लेकिन अतीत में भी ईरान में कई हमले हो चुके हैं जिसमें इजरायल का हाथ बताया जाता रहा है। इजरायली रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले के लिए 3 ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया था। इनमें से 2 को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया गया था लेकिन तीसरा ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम में फंसने के बाद विस्फोट हो गया था। जिससे छत को मामूली क्षति पहुंची।
मंत्रालय ने नहीं किया अधिक खुलासा
इस्फहान संयंत्र राजधानी तेहरान से 350 किमी (217 मील) दूर दक्षिण में है। रक्षा मंत्रालय ने इस सैन्य संयंत्र के बारे में अधिक खुलासा न करते हुए इसे बस एक ‘वर्कशॉप' बताया। जब अमीर-अब्दुल्लाहियन से पूछा गया कि क्या यह देश के परमाणु कार्यक्रम को प्रभावित करेगा, तो उन्होंने जवाब दिया, "इस तरह के कदम हमारे परमाणु वैज्ञानिकों की इच्छा और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा हासिल करने के इरादे को प्रभावित नहीं कर सकते।"

पहले भी धमकी दे चुका है इजरायल
आपको बता दें कि विश्व शक्तियों के साथ अपने परमाणु समझौते के रद्द होने के बाद से ईरान की सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिस इस्फहान शहर पर यह हमला हुआ है, उस शहर में ईरान के कई परमाणु संयंत्र स्थापित हैं। साथ ही यहां पर यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम भी चल रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इजरायल के इस हमले का निशाना ईरान के ये परमाणु संयंत्र हो सकते हैं। बता दें कि ईरान की सेना कह भी चुकी है कि अगर कूटनीतिक तरीके से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक नहीं लगती है तो वह सैन्य तरीके से इसे निशाना बना सकते हैं।

ईरान पर पहले भी हो चुके हैं कई हमले
हाल के वर्षों में इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े लोगों और कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले अप्रैल 2021 में भूमिगत नतांज परमाणु केंद्र पर हमला किया गया था जिसका इल्जाम भी इजरायल पर लगा था। 2020 में ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक को मार डाला गया था जिसका इल्जाम भी इजरायल पर ही लगा था। हालांकि ईरान भले कितने इल्जाम लगाए लेकिन इजरायली अधिकारी कभी भी देश की गुप्त सैन्य इकाइयों या अपनी मोसाद खुफिया एजेंसी द्वारा किए गए कार्यों को स्वीकार नहीं करता है।












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