'सैन्य बल लीबिया के मुद्दों का समाधान नहीं, भाड़े के सैनिक वहां के लिए खतरा', UNSC में भारत
यूएनएससी की बैठक में सोमवार को भारत ने लीबिया के मुद्दों पर यूएनएससी की बैठक में अपना रुख स्पष्ट किया। कंबोज ने कहा कि लीबिया के मुद्दों का कोई सैन्य या सशस्त्र बल नहीं हो सकते।
India on Libya issues at UNSC: यूएनएससी की बैठक में सोमवार को भारत ने लीबिया के मुद्दों पर यूएनएससी की बैठक में अपना रुख स्पष्ट किया। बैठक मं संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि लीबिया के मुद्दों का कोई सैन्य या सशस्त्र समाधान नहीं है। इस विषय यूएनएससी समेत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जोर देने की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में काम्बोज ने कहा कि लीबिया की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि, "सुरक्षा परिषद ने अतीत में त्रिपोली में हिंसक झड़पों की निंदा की। पिछले महीने, हमने लीबिया में सशस्त्र समूहों के बीच और अधिक संघर्ष देखा, जिससे नागरिक हताहत हुए थे।" कंबोज ने आगे कहा कि राजनीतिक गतिरोध और उसके बाद लीबिया में सशस्त्र समूहों की लामबंदी में अक्टूबर 2020 में युद्धविराम समझौते की शुरुआत के बाद से हासिल किए गए लाभ को कमजोर करने की क्षमता है। तत्काल प्राथमिकता राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव कराने के लिए एक संविधान पर पहुंचने में सभी बकाया मुद्दों को हल करना है।
बैठक रुचिका कंबोज ने कहा, "स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना एक अत्यावश्यक अनिवार्यता है। सशस्त्र समूहों के बीच हिंसक झड़पें एक बार फिर से लीबिया में विदेशी बलों और भाड़े के सैनिकों की मौजूदगी से खतरा है। ये 2020 के लीबियाई युद्धविराम समझौता और सुरक्षा परिषद की घोषणाओं के खिलाफ है।
10 वर्षों से लीबिया हिंसा और अशांति की आग
लीबिया में 2011 के बाद से हिंसा और अशांति चरम पर पहुंच रही है। 2011 में दिवंगत नेता मुअम्मर गद्दाफी के शासन के पतन के बाद से वहां लगातार हिंसा फैली है। लीबिया के दलों के बीच चुनाव कानूनों पर असहमति के कारण लीबिया दिसंबर 2021 में आम चुनाव कराने में विफल रहा था।












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