अमेरिका में मोबाइल जांच के लिए भी वारंट जरूरी

US-mobile phones
वाशिंगटन। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि पुलिस बिना वारंट के हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल फोन की जांच नहीं कर सकती है।

यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी जीत की तरह है जो कि यह दलील देते हैं कि मोबाइल फोन की जांच करना निजी जिंदगी में अनुचित हस्तक्षेप है।

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि मोबाइल अमेरिका के लोगों के निजी जीवन का हिस्सा है।

यह फैसला उस समय आया जब मोबाइल फोन में मौजूद सबूतों के आधार पर दोषी पाए गए दो लोगों की अपील पर हाई कोर्ट विचार कर रहा था।

अमेरिका के संविधान के चौथे संशोधन के तहत पुलिस और अन्य सरकारी अधिकारियों को आमतौर पर किसी भी तरह की जांच करने से पहले जज से वारंट लेने की जरूरत होती है।

वारंट के लिए जरूरी होता है कि संदिग्ध के द्वारा अपराध करने के सबूत मौजूद हों।

जस्टिस राबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा है कि मोबाइल फोन में मौजूद चीजों पर संविधान का संरक्षण लागू होता है भले ही गिरफ्तार व्यक्ति के द्वारा रखे गए अन्य समानों से वे मात्रात्मक और गुणात्मक रूप से भिन्न होते हों।

आधुनिक मोबाइल फोन अन्य उपकरणों की तरह नहीं हैं। इसमें मौजूद चीजें अमेरिकियों की निजी जिंदगी का हिस्सा होती हैं। मोबाइल फोन की जांच से पहले पुलिस को कोर्ट से वारंट जरूर लेना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले अपने ही एक फैसले में कहा था कि हिरासत के दौरान पुलिस बिना वारंट के किसी संदिग्ध के पास मौजूद सभी चीजों की जांच कर सकती है।

अब बुधवार को आए इस फैसले के मुताबिक पहले वाला फैसला मोबाइल पर लागू नहीं होता है।

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