ड्रैगन की नाक के नीचे विध्वंसक जहाज लेकर पहुंचा US, बौखलाया चीन, ताइवान में भी छिड़ेगी जंग?

अमेरिकी विदेश विभाग ने इसी हफ्ते अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ताइवान के बारे में भाषा बदलकर बीजिंग को नाराज कर दिया है।

ताइपे, मई 11: ताइवान को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और यूक्रेन को बचाने में नाकामयाब रहने के बाद अमेरिका अब किसी भी तरह का कोई रिस्क लेना नहीं चाहता है। लेकिन, संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना ने मंगलवार को ताइवान जलडमरूमध्य में अपना एक और विध्वंसक जहाज भेज दिया है, जिसके बाद चीन की तरफ से काफी खतरनाक प्रतिक्रिया दी गई है।

पूर्वी एशिया के समुद्र में बढ़ा तनाव

पूर्वी एशिया के समुद्र में बढ़ा तनाव

ताइवान स्ट्रेट में अमेरिका के जहाज भेजने के बाद चीन के साथ पूर्वी एशिया में समुद्र में फिर से तनाव बढ़ गया है। अमेरिकन नेवी के 7वें फ्लीट ने कहा कि, यूएसएस पोर्ट रॉयल, एक टिकोनडेरोगा-क्लास गाइडेड-मिसाइल क्रूजर, ताइवान के पास "अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार" रवाना हुआ और अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन कर रहा है। अमेरिकी नौसेना मे अपने बयान में कहा है कि, अमेरिकी नौसेना और उसके सहयोगी ताइवान के चारों ओर नेविगेशन गश्त की नियमित स्वतंत्रता का संचालन करते हैं। आपको बता दें कि, इस पूरे श्रेक्ष पर चीन अपना दावा करता है, जबकि, इंटरनेशल कोर्ट में चीन का दावा खारिज हो चुका है, फिर भी चीन अपनी जिद छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।

चीन की खतरनाक प्रतिक्रिया

चीन की खतरनाक प्रतिक्रिया

वहीं, ताइवान स्ट्रेट में अमेरिकी विध्वंसक जहाज आने के बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ईस्टर्न थिएटर कमांड ने कहा कि, उसने मंगलवार को अमेरिकी क्रूजर को देखा है। इसके साथ ही चीन ने अमेरिका पर "ताइवान स्वतंत्रता अलगाववादी ताकतों" के लिए समर्थन दिखाने का आरोप लगाया है। इससे पहले भी अप्रैल के अंत में चीन की तरफ से इसी तरह की कड़ी प्रतिक्रिया उस वक्त दी गई थी, जब अमेरिकी नौसेना ने 180 किलोमीटर चौड़े ताइवान जलडमरूमध्य होते हुए अपने लड़ाकू युद्धपोत को भेजा था, जिसको लेकर पीएलए की पूर्वी थिएटर कमांड ने गहरा एतराज जताया था। वहीं, अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के नन-रेजिडेंट फेलो माइकल माज़ा ने कहा कि, बीजिंग के साथ टिट-फॉर-टेट एक्सचेंज में यह अभ्यास सबसे नया है, हालांकि अभी तक चिंता का कारण नहीं है।

क्या खतरनाक होगा ये तनाव?

क्या खतरनाक होगा ये तनाव?

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के नन-रेजिडेंट फेलो माइकल माज़ा का मानना है कि, ये तनाव भरे क्षण तो हैं, लेकिन अभी तक ये खतरनाक नहीं हुए हैं। उन्होंने अलजजीरा से बातचीत के दौरान कुछ हद तक तनाव होने की बात स्वीकार की है। वहीं, अमेरिकी जहाजों की आवाजाही के बीच पीएलए की नौसेना ने कड़ा युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। जबकि, शुक्रवार को, बीजिंग ने ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिटिफिकेशन जोन, जो दक्षिणी चीन और ताइवान के आसपास का क्षेत्र और समुद्री हिस्सा है, उसमें एक साथ 18 युद्धक विमानों को ताइवान के क्षेत्र में भेज दिया और यह 23 जनवरी के बाद सबसे बड़ी उड़ान थी, जब बीजिंग ने 39 विमान भेजे थे।

ताइवान स्ट्रेट में बढ़ता तनाव

ताइवान स्ट्रेट में बढ़ता तनाव

मंगलवार को, पीएलए ने अपने लियाओनिंग एयरक्राफ्ट करियर को जापानी द्वीप ओकिनावा के तट की तरफ भेज दिया, जो ताइवान के उत्तर-पूर्व में स्थित है और जो एक अमेरिकी सैन्य अड्डे का घर भी है। इस क्षेत्र पर भी चीन अपना दावा करता आया है, जबकि इस द्वीप को जापान अपना हिस्सा बताता है। ताइवान में डबलथिंक लैब के सैन्य और साइबर मामलों के सलाहकार लियाओ "किट्सच" येन-फैन ने कहा कि, पीएलए शायद लियाओनिंग की क्षमता का परीक्षण कर रहा था और इसपर संचालित होने वाले विमान कितनी तेजी से उड़ान भर सकते हैं और उतर सकते हैं, उसकी जांच कर रहा था। उन्होंने कहा कि, "वे धीरज और क्षमता का परीक्षण कर रहे हैं, और पिछले कुछ जहाज जो भेजे गये हैं, उससे वो अपनी क्षमता की जांच करने क साथ साथ सामने वाले के धैर्य की भी परीक्षा ले रहे थे'। हालांकि, उन्होंने कहा कि, लियाओनिंग परीक्षण का राजनीतिक अर्थ भी है, क्योंकि ताइवान पर अमेरिका ने अपने रूख में बदलाव किया है, जिससे बीजिंग काफी नाराज है।

ताइवान पर बदला अमेरिका का रूख?

ताइवान पर बदला अमेरिका का रूख?

उन्होंने कहा, अमेरिकी विदेश विभाग ने इसी हफ्ते अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ताइवान के बारे में भाषा बदलकर बीजिंग को नाराज कर दिया है। अमेरिकी वेबसाइट पहले कहता था, कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता है और 'एक चीन' की बात को स्वीकार करता है, जो ताइवान को मिलाकर पूरा होता है। लेकिन, अब अमेरिका का रूख बदल गया है और इसके स्थान पर अमेरिका ने यह लिख है कि, वो ताइवान को एशिया में एक करीबी सहयोगी के रूप में संदर्भित करता है। अमेरिकी की पुरानी नीति को लंबे समय से ताइवान की विवादित राजनीतिक स्थिति के समाधान के रूप में देखा जाता रहा है, जिसका औपचारिक नाम चीन गणराज्य है, हालांकि इसने 1990 के दशक में लोकतंत्र में संक्रमण के बाद से चीन का प्रतिनिधित्व करने के दावों को छोड़ दिया है।

कितना ताकतवर है ताइवान?

कितना ताकतवर है ताइवान?

ताइवान एक छोटा देश है, लिहाजा उसके पास सैन्य शक्ति तो कम है और चीन के मुकाबले कुछ भी नहीं है, लेकिन ताइवान को अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन का मजबूती से समर्थन मिला हुआ है। ताइवान की रक्षा के लिए हमेशा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर साउथ चायना सी में मौजूद रहता है और इस वक्त अमेरिका के साथ साथ जापान और ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर भी भारी हथियारों के साथ साउथ चायना सी में मौजूद हैं। ताइवान के राष्ट्रपति का भी मानना है कि, ताइवान जितना ज्यादा दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है, चीन उतना ज्यादा प्रेशर बनाता है। लेकिन, अब जबकि रूस, यूक्रेन पर हमला कर चुका है, ताइवान काफी ज्यादा प्रेशर में है। (सभी तस्वीर फाइल और प्रतीकात्मक)

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