MQ9B Drone: अमेरिका में नहीं उठी विरोध की एक भी आवाज.. ड्रोन डील पर US ने भारत को भेजा लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस

MQ9B Drone India-US Deal: भारत और अमेरिका ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए बाइडेन प्रशासन ने जनरल एटॉमिक्स से 31 MQ9B प्रीडेटर ड्रोन के अधिग्रहण के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय को अंतिम स्वीकृति पत्र (एलओए) भेज दिया है।

अमेरिका ने इस सप्ताह भारत को करीब 4 अरब डॉलर के ड्रोन डील के लिए क्लासीफाइड letter of acceptance (LOA) भेज दिया है।

MQ9B Drone India-US Deal

वाशिंगटन और दिल्ली स्थित अधिकारियों के मुताबिक, 31 प्रीडेटर ड्रोन सौदे के लिए भारत और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के अधिकारियों के बीच कीमत को लेकर आखिरी सौदेबाजी की गई और फिर सौदा तय करने के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय को LOA भेज दिया गया। पहले दावा किया गया था, कि खालिस्तान विवाद को लेकर ड्रोन डील संकट में आ गई है।

प्रीडेटर ड्रोन डील का रास्ता साफ

दावे में कहा गया था, कि खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की कथित हत्या की साजिश में भारत पर आरोप लगने के बाद अमेरिका के कुछ सांसदों ने ड्रोन डील पर आपत्ति जताई थी और डील को रोक दी थी, लेकिन अब LOA जारी कर दिया गया है, जिससे पता चलता है, कि इस डील का रास्ता अब साफ हो चुका है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने 1 फरवरी को ड्रोन सौदे को लेकर अधिसूचना जारी किया था, लेकिन मसौदा LOA को अमेरिकी सांसदों की संभावित आपत्तियों के लिए अनिवार्य 30 दिनों के लिए खुला रखा गया था। यानि, सांसदों को आपत्ति जताने के लिए 30 दिनों का वक्त दिया गया था, लेकिन भारत के साथ अमेरिकी समझौते पर सांसदों की तरफ से कोई वीटो नहीं होने के बाद, अंतिम एलओए भारत को भेजा दिया गया।

अब जब भारत को एलओए प्राप्त हो गया है, तो इस सौदे की स्टडी भारतीय नौसेना करेग और फिर अगर नौसेना को लगता है, कि ड्रोन डील की कीमत सही है, तो नौसेना अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय के जरिए सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) को भेज देगी। और सीसीएस से मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका को पैसे ट्रांसफर कर ड्रोन खरीद लिए जाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से जो 31 ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया चल रही है, उनमें से 16 ड्रोन भारतीय नौसेना को सौंपे जाएंगे, जबकि, इंडियन आर्मी और इंडियन एयरफोर्स को 8-8 ड्रोन सौंपे जाएंगे।

भारत ने 171 हेल-फायर एजीएम 114 आर मिसाइलों, लेजर गाइडेड बम, मिसाइल लॉन्चर, ग्राउंड स्टेशन, पनडुब्बी रोधी सोनोबॉय और पूर्ण एन्क्रिप्शन के साथ-साथ अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म के लिए निगरानी पूरक पैकेज के साथ 31 ड्रोन खरीदने का फैसला किया है।

अमेरिका ने letter of acceptance तब जारी किया है, जब भारत ने ड्रोन खरीदने के लिए अमेरिका को letter of intent भेजा था। जिसके तहत ये सौदा सरकार से सरकार के स्तर पर करने की बात कही गई थी।

भारत 31 अमेरिकी प्रीडेटर ड्रोन का अधिग्रहण ऐसे समय में कर रहा है, जब भारतीय नौसेना की दो स्काई गार्जियन ड्रोन (निहत्थे प्रीडेटर) की लीज जनवरी में समाप्त होने की कगार पर था। इसे पहले मार्च तक बढ़ाया गया और फिर इसी महीने 220-230 मिलियन डॉलर की लागत से चार साल के लिए और विस्तार के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

विश्लेषकों का कहना है, कि भारत-अमेरिका एमक्यू9बी सौदा इंडो-पैसिफिक में एक गेम चेंजर होगा, जो चीनी विंग लूंग II सशस्त्र ड्रोन के लिए एक प्रभावी काउंटर के रूप में काम करेगा, जिसे बीजिंग ने पाकिस्तान को भी बेचा है।

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