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अमेरिका में रूसी राष्ट्रपति के खिलाफ ‘युद्ध अपराध’ का प्रस्ताव पास, लेकिन क्या पुतिन को कर पाएंगे गिरफ्तार?

40 सदस्य देशों के अनुरोधों के बाद ICC के मुख्य अभियोजक करीम खान ने 2 मार्च को घोषणा की थी, कि वह यूक्रेन में संभावित युद्ध अपराधों की जांच शुरू करेंगे।

वॉशिंगटन, मार्च 16: यूक्रेन युद्घ में यूक्रेन को समर्थन देने के लिए अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए रूस के खिलाफ 'युद्ध अपराध' का प्रस्ताव पास कर दिया है। यानि, अमेरिकी सीनेट में अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ 'युद्ध अपराध' का प्रस्ताव पास कर दिया है। अमेरिकी सीनेट में रूस के खिलाफ जांच का प्रस्ताव भी पास किया गया है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं, कि क्या अमेरिका के इस कदम से यूक्रेन युद्ध थमेगा? और क्या अमेरिका में इतनी ताकत है, कि वो रूसी राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ मुकदमा चला सके?

अमेरिकी सीनेट में प्रस्ताव हुआ पास

अमेरिकी सीनेट में प्रस्ताव हुआ पास

अमेरिकी सीनेट में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन पर युद्ध थोपने को लेकर 'युद्ध अपराधी' करार देने को लेकर एक अहम प्रस्ताव पास किया गया है। इस प्रस्ताव को यूएस सीनेट में सर्वसम्मति से पास किया गया है और सीनेट के अंदर रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी सीनेटर्स ने एक मत से पुतिन को युद्ध अपराधी ठहराने के प्रस्ताव को पास कर दिया है। इस प्रस्ताव के तहत अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) को यूक्रेन पर हमला करने के लिए युद्ध अपराधों की जांच के लिए प्रोत्साहित किया गया। वहीं, प्रस्ताव को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर चक शूमर ने कहा कि, ''हम सभी डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर साथ मिलकर कहते हैं, कि यूक्रेन पर युद्ध थोपने के लिए पुतिन अपने अत्याचारों की जवाबदेही लेने से बच नहीं सकते हैं''।

अमेरिकी प्रस्ताव का मतलब

अमेरिकी प्रस्ताव का मतलब

अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ अपने सीनेट में जो प्रस्ताव पेश किया है, उसका मतलब सांकेतिक से ज्यादा कुछ नहीं है। इस प्रस्ताव का मतलब यूक्रेन के समर्थन के लिए अमेरिकी आक्रामकता को दर्शाता है, लेकिन इससे पुतिन की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सीनेट के इस प्रस्ताव में 'कानूनी ताकत' का इस्तेमाल करने की बात नहीं कही गई है। लेकिन, पुतिन के खिलाफ बाइडेन प्रशासन का एक और सख्त राजनीतिक लाइन को दर्शाता है। पिछले हफ्ते, अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने यूक्रेन पर आक्रमण के लिए रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध जांच के लिए आह्वान किया था। और अब अमेरिकी सीनेट में प्रस्ताव पास किया गया है। लेकिन, सवाल ये है, कि क्या रूसी राष्ट्रपति के खिलाफ मुकदमा चल पाएगा?

क्या होता है युद्ध अपराध?

क्या होता है युद्ध अपराध?

40 सदस्य देशों के अनुरोधों के बाद ICC के मुख्य अभियोजक करीम खान ने 2 मार्च को घोषणा की थी, कि वह यूक्रेन में संभावित युद्ध अपराधों की जांच शुरू करेंगे। ICC नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रामकता के अपराध की स्पष्ट परिभाषा देता है। और आईएसीसी के इस परिभाषा को 'रोम संविधि' नाम के एक संधि में भी शामिल किया गया है, जो आईसीसी की नींव बनाती है। इसके निर्देशों के मुताबिक, नागरिक आबादी को निशाना करना, जिनेवा सम्मेलनों का उल्लंघन करना, और लोगों के विशिष्ट समूहों को निशाना बनाकर उन्हें मारना, इन सभी तरह के कृत्यों में शामिल लोग, युद्ध अपराध का मुकदमा चलाए जाने योग्य हैं। युद्ध अपराधों में हत्या, अंग-भंग, क्रूर व्यवहार, बंधक बनाना, बलात्कार और यौन दासता को भी आईसीसी के दिशानिर्देशों में शामिल किया गया है और ये तमाम काम युद्ध के नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत वैसे हथियारों के इस्तेमाल पर भी रोक है, जो अंधाधुंध पीड़ा का कारण बन सकते हैं, जैसे रासायनिक या जैविक हथियारों के इस्तेमाल पर पाबंदी है।

देश पर नहीं, लोगों पर चलता है मुकदमा

देश पर नहीं, लोगों पर चलता है मुकदमा

सबसे दिलचस्प बात ये है, कि आईसीसी में व्यक्तियों पर मुकदमा चलता है, ना कि देशों के ऊपर। आईसीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसी भी व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है और ICC आमतौर पर शीर्ष अधिकारियों और नेताओं पर मुकदमा चलाने की कोशिश करता है, जिनके ऊपर युद्ध शुरू करने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी होती है। यूक्रेन में युद्ध के मामले में, जांचकर्ता पिछले और वर्तमान दोनों आरोपों पर गौर करेंगे। इसमें उन युद्ध अपराधों को शामिल करने की संभावना है जो पुतिन ने यूक्रेन से क्रीमिया के रूस के कब्जे के दौरान आदेश दिए थे।

ICC जारी कर सकता है वारंट

ICC जारी कर सकता है वारंट

यदि आईसीसी में सुनावाई के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो फिर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है, लेकिन दिक्कत ये है, कि बिना पुतिन की उपस्थिति के उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है और चूंकी रूस आईसीसी का सदस्य ही नहीं है, तो फिर पुतिन के अदालत में शामिल होने की संभावना ही नहीं है। यानि, या तो व्लादिमीर पुतिन को रूस की सेना गिरफ्तार कर उन्हें आईसीसी के हवाले कर दे, या फिर रूस के बाहर जाने के बाद, उस देश की सरकार पुतिन को गिरफ्तार कर आईसीसी को सौंप दे। ये दोनों ही स्थिति असंभव है।

क्या यूएनएससी देगा निर्देश?

क्या यूएनएससी देगा निर्देश?

इसके साथ ही, या तो किसी देश की सरकार या फिर यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल मामलों की जांच करने के लिए आईसीसी को निर्देश दे सकती है। चूंकि रूस यूएनएससी का स्थायी सदस्य है, इसलिए उसके पास वीटो पावर है, लिहाजा अगर संयुक्त राष्ट्र से रूसी राष्ट्रपति के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया भी जाता है, तो उसे रूस अपना वीटो इस्तेमाल कर रोक सकता है। यानि, पुतिन के खिलाफ 'युद्ध अपराध' चलाना सिर्फ सांकेतिक ही है और वास्तविक में ये असंभव है।

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