Trump Tariffs: दवाओं पर लगेगा 100% टैरिफ! ट्रंप ने कड़े किए मेटल इंपोर्ट के नियम, भारत पर कितना होगा असर?
Trump Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में बड़े बदलाव करते हुए 'टैरिफ बम' फोड़ दिया है। ट्रंप प्रशासन ने ब्रांडेड दवाओं (Pharmaceutical) के आयात पर 100% तक ड्यूटी लगाने और स्टील, एल्यूमीनियम व कॉपर (तांबा) पर लगने वाले टैरिफ को पूरी तरह बदलने का आदेश जारी किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतें पहले से ही बढ़ी हुई हैं।
ट्रंप ने दवाओं के आयात को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' से जोड़ते हुए विदेशी दवा कंपनियों के लिए सख्त शर्तें रखी हैं। विदेशी पेटेंट दवा निर्माताओं को अमेरिका में दवाओं के दाम कम करने होंगे और अपना उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट करना होगा। जो कंपनियां पूरी तरह अमेरिका शिफ्ट होंगी, उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। आंशिक रूप से शिफ्ट होने वाली कंपनियों पर 20% और जो कंपनियां शर्तें नहीं मानेंगी, उन पर 100% तक टैरिफ लगाया जाएगा।

- मित्र देशों को छूट: यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड के लिए टैरिफ की सीमा 15% तय की गई है। वहीं, ब्रिटेन के साथ एक विशेष समझौता हुआ है जिसके तहत ब्रिटिश दवाओं पर 3 साल तक जीरो टैरिफ रहेगा।
- समय सीमा: बड़ी दवा कंपनियों को इन नियमों के पालन के लिए 120 दिन और छोटी कंपनियों को 180 दिन का समय दिया गया है।
स्टील, एल्यूमीनियम और कॉपर टैरिफ में बड़ी कटौती
धातुओं के आयात को लेकर ट्रंप ने नियमों को सरल बनाने और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएं की हैं:
- 50% टैरिफ: कच्चे स्टील, एल्यूमीनियम और कॉपर पर 50% का आयात शुल्क बना रहेगा, लेकिन अब इसकी गणना 'इंपोर्ट वैल्यू' के बजाय अमेरिकी ग्राहकों द्वारा चुकाई गई 'बिक्री कीमत' (Sales Price) पर होगी। इससे कम कीमत दिखाकर टैक्स चोरी करने वालों पर लगाम लगेगी।
- डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स पर राहत: ऐसे उत्पाद जिनमें स्टील या एल्यूमीनियम का इस्तेमाल होता है, उन पर ड्यूटी 50% से घटाकर 25% कर दी गई है।
- 15% से कम वजन पर जीरो ड्यूटी: यदि किसी उत्पाद (जैसे इत्र की बोतल का ढक्कन या डेंटल फ्लॉस का कटर) में धातु की मात्रा वजन के अनुसार 15% से कम है, तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: बिजली ग्रिड और औद्योगिक उपकरणों के लिए टैरिफ को 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है ताकि देश में औद्योगिक निर्माण तेज हो सके।
- अमेरिकी मेटल: जो उत्पाद विदेशों में बने हैं लेकिन उनमें पूरी तरह से अमेरिकी स्टील या एल्यूमीनियम का उपयोग हुआ है, उन पर केवल 10% टैरिफ लगेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
प्रशासन का कहना है कि पुराने टैरिफ नियम बहुत जटिल थे, जिससे आयातकों को परेशानी होती थी। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले कुछ टैरिफ को अवैध घोषित करने के बाद सरकार को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई करना भी इसका एक उद्देश्य है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने इसे वैश्विक व्यापार के लिए "रीसेट बटन" बताया है।
भारत पर क्या होगा असर?
ट्रंप के इस फैसले का भारत पर मिला-जुला लेकिन गहरा असर पड़ सकता है:
- फार्मा सेक्टर पर दबाव: भारत अमेरिका को जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं का बड़ा निर्यातक है। 100% टैरिफ के डर से भारतीय दवा कंपनियों को या तो अपनी कीमतें काफी कम करनी होंगी या अमेरिका में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने होंगे, जिससे उनकी लागत बढ़ सकती है।
- निर्यात में चुनौतियां: स्टील और एल्यूमीनियम के डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स (जैसे ऑटो पार्ट्स या मशीनरी) पर 25% टैरिफ भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों के लिए एक चुनौती बना रहेगा, हालांकि 50% के मुकाबले यह थोड़ी राहत है।
- महंगाई का डर: यदि भारतीय कंपनियां बढ़े हुए टैरिफ का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा में टिकना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, अगर भारत सरकार अमेरिका के साथ ब्रिटेन या ईयू जैसा कोई विशेष ट्रेड एग्रीमेंट करने में सफल रहती है, तो भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है।












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