ओबामा के फेवरिट मैसूर के डॉक्टर विवेक मूर्ति हो सकते हैं बाइडेन की कोविड टास्क फोर्स का हिस्सा
वॉशिंगटन। 3 नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए और अब डेमोक्रेट जो बाइडेन देश के 46वें राष्ट्रपति होंगे। इन चुनावों को कोरोना वायरस महामारी के बीच आयोजित किया गया था। यह बीमारी इन चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा था और बाइडेन इस महामारी को लेकर लगातार रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप पर आक्रामक बने हुए थे। बाइडेन को कोरोना वायरस को आधार बनाकर किस तरह से ट्रंप पर हमला करना है, इसकी भूमिका तैयार की थी भारतीय मूल के डॉक्टर, डॉक्टर विवेक मूर्ति ने। अब ऐसी खबरें हैं कि मूर्ति, बाइडेन की तरफ से बनाई गई कोरोना वायरस टास्क फोर्स का हिस्सा हो सकते हैं।

37 साल की उम्र में बने सर्जन जनरल
43 साल के डॉक्टर विवेक मूर्ति कर्नाटक राज्य के मैसूर के रहने वाले हैं। बाइडेन की जीत के बाद भारत में भी जश्न का माहौल है। एक तरफ भारतीय मूल की कमला हैरिस अब देश की पहली महिला उपराष्ट्रपति हैं तो मूर्ति के भी एक बड़े पद पर आने की संभावनाएं अब प्रबल हो गई हैं। पेशे से सर्जन डॉक्टर मूर्ति की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने की थी। ओबामा प्रशासन में मूर्ति सबसे कम उम्र के सर्जन जनरल बने थे। नियुक्ति के समय उनकी उम्र 37 साल थी। उनके पिता लक्ष्मी नारायण मूर्ति के पास अब दोहरे जश्न की एक और वजह है। डॉक्टर मूर्ति ने मांड्या जिले के 32 सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर दान किए थे ताकि बच्चों की शिक्षा में सुविधा हो। उनके भांजे जो कि पेशे से एक जर्नलिस्ट हैं, उन्होंने बताया कि डॉक्टर मूर्ति हर वर्ष यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके गांव हालेगेरे में हर वर्ष एक हेल्थ कैंप का आयोजन हो।
क्यों चुना मूर्ति को और कैसे की मूर्ति की मदद
सोमवार को नए चुने गए राष्ट्रपति जो बाइडेन कोरोना वायरस टास्क फोर्स की पहली मीटिंग करने वाले हैं। इस मीटिेंग में डॉक्टर मूर्ति भी शामिल हो सकते हैं। बाइडेन इस बार एक महत्वाकांक्षी कार्यकाल की तरफ देख रहे हैं। उनका कार्यकाल स्वास्थ्य और आर्थिक संकट, इन दोहरी चुनौतियों के साथ शुरू होगा। ऐसे में अब वह उन सलाहकारों पर भरोसा कर रहे हैं जिन्हें सरकारी तंत्र का अनुभव रहा है। वह बाहरी लोगों और विचारधारा के विरोधाभासी लोगों की मदद नहीं ले रहे हैं। मूर्ति और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के पूर्व मुखिया डेविड केस्लर को एक कॉन्फ्रेंस कॉल की गई थी। यह कॉल उस समय की गई जब बाइडेन कैंपेन के दो लोग उस समय कोविड पॉजिटिव हो गए थे जब उन्होंने सीनेटर कमला हैरिस के साथ सफर किया था। बाइडेन अक्सर डॉक्टर मूर्ति और डाक्टर केस्लर से बात करते रहते हैं। दोनों ने उन्हें महामारी के शुरुआती दिनों बाइडेन को कई अहम जानकारियां मुहैया कराई थीं। रोजाना या फिर हफ्ते में चार-चार बार मूर्ति और केस्लर, बाइडेन से महामारी पर बात करे। उन्हें 80 से 90 पेज तक के डॉक्यूमेंट्स मुहैया कराए जाते। इनमें महामारी से लेकर वैक्सीन और टेस्टिंग समेत कई और बातों के बारे में महत्वपूर्ण बातें होती थीं।












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