भारत विरोधी US सांसद को जयशंकर ने दिखाया ठेंगा, बौखलाई प्रमिला जयपाल बोलीं, बहुत बड़ा मौका गंवाया

मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति को बदल दिया है और भारत विरोधी तत्वों को अब पूरी तरह से नजरअंदाज करना शुरू कर दिया है। जयशंकर ने पिछले साल यूरोप को भी आईना दिखाया था।

Pramila Jayapal on India

Pramila Jayapal on India: भारत विरोधी अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल को भारत के विदेश मंत्री ने ऐसा अपमान किया है, जिससे वो बौखला उठी हैं। पिछले कुछ सालों में, खासकर एस. जयशंकर जबसे भारत के विदेश मंत्री बने हैं, भारत की विदेश नीति काफी आक्रामक हो गई है, जिसका नमूना पिछले साल पूरी दुनिया देख चुकी है, जब भारत ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के आगे सिर झुकाने से इनकार करते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा। और इस बार भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल को करारा जवाब दिया है।

प्रमिला जमपाल क्यों बौखलाईं?

प्रमिला जमपाल क्यों बौखलाईं?

भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा है, कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की पिछले साल दिसंबर में हुई अमेरिका की यात्रा के दौरान उनके साथ कैपिटल हिल में होने वाली बैठक को रद्द करना भारत के लिए "कमजोरी का संकेत" और "विशाल चूक का अवसर" था। प्रमिला जयपाल ने कहा है, कि एस. जयशंकर ने उनसे मुलाकात को रद्द करते हुए बहुत बड़ा मौका गंवा दिया है। आपको बता दें, कि प्रमिला जयपाल अमेरिका की उन सांसदों और नेताओं की फेहरिस्त में आती हैं, जो अपने भारत विरोधी एजेंडे के लिए जानी जाती हैं और अकसर भारत के खिलाफ जहर उगलती रहती हैं। लिहाजा, भारत ने अब ऐसे नेताओं को भाव देना बंद कर दिया है और प्रमिला जयपाल की बौखलाहट इसी बात को लेकर है।

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    कश्मीर पर भी उगल चुकी हैं जहर

    कश्मीर पर भी उगल चुकी हैं जहर

    आपको बता दें, कि प्रमिला जयपाल भारत सरकार के कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त करने के फैसले की जमकर आलोचना करते हुए एक कैम्पेन तक चला चुकी हैं। उन्होंने मोदी सरकार के फैसले की जोरदार तरीके से विरोध करने की कोशिश की थी, जिसमें उनका साथ अमेरिका की मुस्लिम सांसदों ने दिया था। वहीं, प्रमिला जयपाल कश्मीर घाटी में प्रतिबंधों को हटाने की मांग को लेकर अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में एक द्विदलीय प्रस्ताव भी पेश कर चुकी हैं। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है, कि प्रमिला जयपाल का भारत को लेकर रवैया क्या रहा है। वहीं, प्रमिला जयपाल ने भारतीय विदेश मंत्री के साथ 18 दिसंबर को बैठक को रद्द करने को लेकर एक कॉलम वॉशिंगटन पोस्ट में लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है, कि "यह किसी भी महान लोकतंत्र के लिए कमजोरी का संकेत है, जब किसी बैठक में आप अपने आलोचकों को भाग लेने की अनुमति नहीं देते हैं।" उन्होंने कहा है, कि यह "दो देशों के लिए एक विशाल चूक का मौका था, जिसमें संवाद और असंतोष को महत्व दिया जाना था।"

    जयशंकर ने नहीं दिया भाव

    जयशंकर ने नहीं दिया भाव

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पिछले सप्ताह अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ आयोजित 2 + 2 मंत्रिस्तरीय संवाद के मौके पर प्रतिनिधि सभा और सीनेट की विदेशी संबंध समितियों के नेतृत्व से अलग से मिलना था। लेकिन, भारत ने हाउस ऑफ फॉरेन अफेयर्स कमेटी के साथ बैठक रद्द कर दी, क्योंकि भारतीय पक्ष को लगा, कि जयपाल इस अवसर का उपयोग भारतीय विदेश मंत्री के साथ "बहस" करने के लिए कर सकती हैं। लिहाजा, अमेरिकी सांसद की भारत के खिलाफ अपनी आक्रामक लहजों का लगातार इस्तेमाल कर रही हैं, जबकि इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के लोगों का सोचना है, कि इस मुद्दे को ज्यादा तूल दिए जाने की जरूरत नहीं है। लेकिन, प्रमिला जयपाल ने लिखा है, कि वह इस बात से हैरान हैं, कि "नई दिल्ली ने डेमोक्रेटिक की अगुवाई वाली हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी को सूचित किया, कि अगर मैं मौजूद हूं तो विदेश मंत्री बैठक में शामिल नहीं होंगे"।

    भारतीय अधिकारियों ने क्या कहा?

    भारतीय अधिकारियों ने क्या कहा?

    वहीं, भारतीय अधिकारियों ने प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है, लिहाजा, यह दर्शाता है कि सरकार ने रद्द की गई बैठक पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी थी। जयशंकर ने बैठक रद्द करने की पुष्टि की थी। अपनी अमेरिका यात्रा समाप्त करने से पहले उन्होंने पिछले सप्ताह संवाददाताओं से कहा था, कि "मुझे उन लोगों से मिलने में दिलचस्पी है, जो वस्तुनिष्ठ हैं और (जो) चर्चा के लिए खुले हैं, लेकिन ऐसे लोगों से नहीं, जो पहले से ही अपना मन बना चुके हैं।" वहीं, रद्द की गई बैठक के मुद्दे पर सीनेटर एलिजाबेथ वारेन और कमला हैरिस द्वारा समर्थित प्रमिला जयपाल ने चुप नहीं रहने की कसम खाई है। उन्होंने लिखा है, कि "कांग्रेस के सदस्य और एक भारतीय-अमेरिकी के रूप में, मैं मीडिया की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया जैसे लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों पर बोलना जारी रखूंगी।" उन्होंने आगे लिखा, कि "इन अधिकारों की रक्षा, खासकर सबसे कठिन परिस्थितियों के दौरान, लोकतंत्र के जीवित रहने और उसके पनपने के लिए एकमात्र तरीका है।"

    कौन हैं प्रमिला जयपाल?

    कौन हैं प्रमिला जयपाल?

    आपको बता दें, कि भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल को आव्रजन पर शक्तिशाली हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी के पैनल का रैंकिंग सदस्य नॉमिनेट किया गया है, जिससे वह उपसमिति के लिए नेतृत्व की भूमिका निभाने वाली पहली अप्रवासी बन गई हैं। एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा गया है, कि वाशिंगटन राज्य के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाली 57 साल की प्रमिला जयपाल ने आप्रवासन अखंडता, सुरक्षा और प्रवर्तन पर उपसमिति में काम करने के लिए कांग्रेस की सदस्य, जो लोफग्रेन का स्थान लिया है। वहीं, रैकिंग सदस्य नॉमिनेट होने के बाद उन्होंने कहा, कि "अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई पहली साउथ एशियाई महिला होने के नाते मैं सम्मानित महसूस कर रही हूं।"

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