अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जे के बाद पहली बार मिले अमेरिका और तालिबान, क्या सरकार को मिलेगी मान्यता?
लगभग 2 साल पहले अफगानिस्तान की सत्ता में वापसी के बाद तालिबान नेताओं ने पहली बार कतर में संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकारियों से मुलाकात की है। दोनों देशों के बीच यह बैठक दो दिन तक 30 दुलाई से 31 जुलाई तक हुई।
अफगान विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि दोनों पक्षों ने दो दिवसीय वार्ता के दौरान विश्वास बहाली के उपायों पर चर्चा की, जिसमें प्रतिबंधों और यात्रा प्रतिबंधों को हटाने के साथ-साथ विदेशों में रखी अफगान केंद्रीय बैंक की संपत्ति की वापसी भी शामिल है।

प्रवक्ता अब्दुल कहर बाल्खी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडलों ने नशीले पदार्थों से निपटने और मानवाधिकार मुद्दों पर भी चर्चा की। आपको बता दें कि सत्ता में वापसी के बाद से किसी भी देश ने तालिबान को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि उसके अधिकारियों ने तालिबान को बताया कि वाशिंगटन आर्थिक स्थिरता पर तकनीकी बातचीत के लिए तैयार है। बयान के मुताबिक अमेरिका ने अफगानिस्तान में उन पॉलिसी को बदलने पर जोर दिया, जिनके जरिए तालिबान ह्यूमन राइट्स को खत्म करने के साथ महिलाओं पर पाबंदियां बढ़ाता जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने तालिबान से लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं की नौकरी करने पर लगे प्रतिबंधों को समाप्त करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने तालिबान की हिरासत में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को रिहा करने पर भी जोर दिया।
इसके अलावा अमेरिका ने तालिबान से मीडिया प्रतिबंधों को समाप्त करने की भी अपील की। इस दौरान तालिबान ने अपने नेताओं पर लगे यात्रा प्रतिबंधों को हटाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका से 10 अरब डॉलर वापस लौटाने की मांग की है।
इस बैठक में अमेरिका की तरफ से अफगानिस्तान मामलों के विशेष प्रतिनिधि थॉमस वेस्ट शामिल हुए। उनके अलावा रीना अमीरी और करेन डेकर भी अमेरिका की ओर से शामिल थे। रीना अमीरी अफगानिस्तान में मानवाधिकार मामलों और महिलाओं की विशेष दूत हैं। वहीं, करेन डेकर अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन के चीफ हैं।
इस वार्ता के दौरान अमेरिका ने इस बात पर सहमति जताई कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान की जनता पर आतंकी हमले कम हुए हैं।












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