UN रिपोर्ट में दावा, विनाश की तरफ बढ़ रहे हैं इंसान, भारत में भी होगी बर्बादी, 2040 है बचने की सीमा रेखा
यूनाइटेड नेशंस ने क्लाइमेट चेंज को लेकर आज रिपोर्ट जारी की है, जिसका इंतजार वैश्विक स्तर पर की जा रही थी। इस रिपोर्ट को विश्व के 200 शीर्ष वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।
नई दिल्ली, अगस्त 09: यूनाइटेड नेशंस ने विश्व के मौसम और वातावरण को लेकर धमाकेदार रिपोर्ट जारी कर दी है और इस रिपोर्ट के आने के बाद विश्व की तमाम सरकारों के पैरों तले जमीन खिसक जाना तय माना जा रहा है। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इंसानों ने अंधाधुंध विकास करते हुए अपने सिर पर विनाश के बादल को बुला लिया है। यूनाइटेड नेशंस ने साफ तौर पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विश्व के हर हिस्से पर ग्लोबल वॉर्मिंग का प्रभाव पड़ेगा। वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेरोलॉजी साइंटिस्ट ने कहा है कि इसका असर सबसे ज्यादा एशिया महाद्वीप पड़ पड़ने वाला है। यूनाइटेड नेशंस ने कहा है कि 2040 तक वैश्विक तापमान में 1.25 डिग्री सेल्सियस का इजाफा होगा, जो इस धरती की स्थिति को बिगाड़ने के लिए काफी है।

2040 तक बढ़ेगा 1.5C तापमान
यूनाइटेड नेशंस ने क्लाइमेट चेंज को लेकर आज रिपोर्ट जारी की है, जिसका इंतजार वैश्विक स्तर पर की जा रही थी और इस रिपोर्ट के मुताबिक, पहले वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि 2050 इस्वी तक वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस का इजाफा होगा, लेकिन वैज्ञानिकों की उस रिपोर्ट से 10 साल पहले ही वैश्विक तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि 2030 और 2052 के बीच तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5C ऊपर बढ़ जाएगा, लेकिन अब इस बात पर मुहर लगाया गया है कि 2040 तक की ही वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। जलवायु परिवर्तन पर दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, इंसानों ने वातावरण, महासागरों और जमीन को गर्म कर दिया है। जिसका अंजाम इंसानों को ही भुगतना होगा।

इंसानों पर प्रभाव पड़ना शुरू
यूनाइटेड नेशंस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर के देशों पर ग्लोबल वॉर्मिंग का प्रभाव पड़ना शुरू हो चुका है और इस साल पूरी दुनिया में रिकॉर्ड स्तर पर तापमान में इजाफा दर्ज किया गया है। कनाडा और अमेरिका में करोड़ों जीव समुद्र के पानी गर्म होने की वजह से मारे गये हैं, वहीं, चीन, भारत और ब्रिटेन जैसे देशों में भीषण बाढ़ आई है, जबकि, तुर्की, ग्रीस और कनाडा में भीषण आग देखा गया है। पिछले महीने पश्चिमी यूरोप में दशकों में सबसे भीषण बाढ़ आई थी, जिसमें जर्मनी, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, स्विटजरलैंड और नीदरलैंड में भारी बारिश के बाद 180 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस गर्मी की शुरुआत में अमेरिका और कनाडा के पश्चिमी तट पर भीषण गर्मी ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली, जबकि जुलाई के अंत में इस क्षेत्र में आई बाढ़ से 300 से अधिक लोग मारे गए और लगभग 13 मिलियन अन्य प्रभावित हुए। इस हफ्ते ग्रीस में जंगल की आग भी लगी है, जिससे 2,000 से अधिक लोगों को पूरा क्षेत्र खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि ग्रीस 30 सालों में सबसे खराब गर्मी का सामना कर रहा है।

1.5C तापमान में इजाफे का असर
आपको बता दें कि 1.5C का निशान वह बिंदु माना जाता है जहां जलवायु परिवर्तन तेजी से खतरनाक हो जाता है। जलवायु परिवर्तन पर 2015 में पेरिस में हुए समझौते में विश्व के तमाम देश 1.5 डिग्री सेल्सियस तक वैश्विक तापमान को रखने के लिए तैयार हुए थे, लेकिन यूएन रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 पेरिस समझौता फेल हो चुका है और वैश्विक तापमान में पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नई रिपोर्ट को 'मानवता के लिए कोड रेड' कहा। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी उम्मीद है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती से बढ़ते तापमान को स्थिर किया जा सकता है। मेट ऑफिस हैडली सेंटर के प्रोफेसर रिचर्ड बेट्स और रिपोर्ट में योगदान देने वाले लेखक ने कहा कि 'आगे जाकर काफी ज्यादा जोखिम होने वाला है, लिहाजा अब अविलंब ध्यान देने का वक्त आ गया है'।

बड़े खतरे की तरफ बढ़ रही है दुनिया
यूनाइटेड नेशंस के वैज्ञानिकों ने 14 हजार से ज्यादा साइंटिफिक पेपर्स का रिसर्च करने के बाद ग्लोबर वॉर्मिंग पर अपनी रिपोर्ट जारी है, जिसमें पता चल रहा है कि इंसानों की वजह से पृथ्वी पर काफी तेजी से जलवायु परिवर्तन हो हरहा है, जिससे आने वाले वक्त में मौसम में काफी तेजी से परिवर्तन होगा और समुद्र में जल स्तर में इजाफा होगा, जिसका खामियाजा इंसानों को भुगतना पड़ेगा। वैज्ञानिकों ने कहा कि ''ये निश्चित है अब काफी गर्म लू चलेगा और इस सदी के अंत तक समुद्र के लेवल में 2 मीटर का इजाफा होगा, जिसकी वजह से दुनिया के कई शहर पानी में जूब जाएंगे। वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेरोलॉजी साइंटिस्ट स्वप्ना पनिकल ने कहा कि 'एशिया के ऊपर काफी खराब असर पड़ने की संभावना है और एशिया में समुद्र के पानी लेवल में तेजी से इजाफा होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि ''पहले जो समुद्र की एक्स्ट्रीम लहरे 100 सालों में एक बार आती थीं, वो हर 6 से 9 साल के अंदर में आकर भयानक तबाही मचाने वाली हैं।

दुनिया की सेहत खराब
रिपोर्ट तैयार करने वाले वैज्ञानिक प्रोफेसर पीयर्स फोस्टर, जो लीड्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं, उन्होंने एलबीसी रेडियो से कहा कि 'रिपोर्ट काफी बुरी खबरों के साथ है कि हम कहां हैं और हम कहां जा रहे हैं, लेकिन उम्मीद बस इतनी भर है कि हम जल्द से जल्द जागें''। उन्होंने कहा कि ''पहली बात यह है कि, अगर हम वास्तव में अगले 10 साल की समय सीमा के भीतर हमारे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने के लिए एक साथ मिल सकते हैं और कार्बन इस्तेमाल को कर देते हैं, तो एक अच्छा मौका है और हम कोशिश कर सकते हैं कि तापमान को लंबे समय तक 1.5 डिग्री से नीचे रखें।' आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की आज की रिपोर्ट को 60 देशों के 200 वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। यह 2013 के बाद से जलवायु परिवर्तन को लेकर यूनाइटेड नेशंस की पहली विस्तृत रिपोर्ट है, जो ग्लोबल वार्मिंग की गति और पैमाने के बारे में अभी तक की सबसे कठोर चेतावनी प्रदान करता है।












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