वीरता की गाथा: रूसी टैंकों को रोकने के लिए यूक्रेनी जवान ने खुद को बम से उड़ाया, एंट्री वाला ब्रिज किया तबाह
नई दिल्ली, 26 जनवरी: रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध जारी है। अब रूसी सैनिक राजधानी कीव के पास पहुंच गए हैं। रूस का दावा है कि जल्द ही वो राजधानी कीव पर पूरी तरह से कब्जा कर लेगा। इस युद्ध में यूक्रेनी सैनिकों का भी पराक्रम देखने को मिल रहा, जो अपने देश की रक्षा के लिए बलिदान दे रहे हैं। अब एक यूक्रेनी जवान के पराक्रम का किस्सा तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्रीमिया के जरिए आ रहे रूसी
दरअसल क्रीमिया पर रूस ने पहले ही कब्जा कर लिया था। अब क्रीमिया के रास्ते उसके सैनिक यूक्रेन की ओर कूच कर रहे हैं। शुरू में उनको रोकने के लिए यूक्रेनी सेना ने बहुत कोशिश की, लेकिन वो कामयाब नहीं हुए। इसके बाद उस पुल को उड़ाने का प्लान बनाया गया, जो क्रीमिया से यूक्रेन को जोड़ता है, ताकि रूसी सेना को रोका जा सके।

पुल उड़ाने में गई जान
यूक्रेनी सेना के मुताबिक जब रूसी टैंकों ने हमला किया, तो मरीन बटालियन के इंजीनियर विटाली शकुन खेरसॉन क्षेत्र में हेनिचेस्क पुल की रखवाली कर रहे थे। रूसी सेना को बढ़ता देख यूक्रेनी अधिकारियों ने फैसला किया कि वो पुल को उड़ा देंगे। इसकी जिम्मेदारी विटाली को दी गई। उनको पता था कि पुल को उड़ाने में उनकी जान को भी खतरा है, लेकिन वो पीछे नहीं हटे। वो पुल पर पहुंचे और बम से उसको उड़ा दिया। इस घटना में वो भी शहीद हो गए।

वीरता पुरस्कार से होंगे सम्मानित
विटाली की इस बहादुरी से रूसी सेना को यूक्रेन में घुसने के लिए दूसरा रास्ता चुनना पड़ा। ऐसे में यूक्रेनियों को जवाब देने के लिए और ज्यादा वक्त मिल गया। यूक्रेनी सेना ने अपने बयान में कहा कि हर ओर से यूक्रेनी लोग रूस को जवाब दे रहे हैं। दुश्मन को रोकने के लिए मरीन बटालियन ने पुल को उड़ा दिया। इस घटना में विटाली शकुन शहीद हो गए। यूक्रेनी सेना ने कहा कि वो जब तक जीवित रहेंगे, तब तक लड़ाई लड़ते रहेंगे। इसके अलावा शहीद जवान के लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा की गई है।












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