यूक्रेन ऐसे जीत रहा है सोशल मीडिया पर जंग

यूक्रेन के सोशल मीडिया कैंपेन का स्क्रीनशॉट
Defense of Ukraine
यूक्रेन के सोशल मीडिया कैंपेन का स्क्रीनशॉट

आठ महीनों के बाद भी यूक्रेन युद्ध का नतीजा नहीं निकला है. यूक्रेन जवाबी हमलों में कामयाबी हासिल कर रहा है जबकि दूसरे मोर्चों पर रूस की सेना अपने दबदबा बनाए हुए है. लेकिन इंटरनेट पर ये युद्ध बिलकुल इकतरफ़ा नज़र आता है.

सोशल मीडिया वॉलंटियरों की एक टीम का नेतृत्व कर रहीं कीएव की उद्यमी ओलेना कहती हैं, "ये देश मीम बनाने वालों का है. अगर ये मीम का युद्ध होता तो हम हम ही जीतते."

ओलेना उनका असली नाम नहीं है. ओलेना और उनकी टीम यूक्रेन की सेना के लिए बेहद संवेदनशील काम करती हैं और इसी वजह से उन्होंने अपनी पहचान छुपाने का आग्रह किया.

उनकी टीम चौबीस घंटे काम करती है, देश के किसी भी हिस्से से मिलने वाली ख़बर पर वो घंटेभर के भीतर ही प्रतिक्रिया जारी कर देते हैं. मंत्रालय के देश के भीतर और बाहर रहने वाले पाठकों और दर्शकों के लिए वो संगीत के साथ असरदार वीडियो बनाते हैं.

जब राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने विदेशी संसदों में यूक्रेन के इतिहास का हवाला देते हुए अपने भाषण दिए, ओलेना की पांच सदस्यों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने उसके इर्द-गिर्द अपने संदेश बनाए.

जून में ब्रिटेन का शुक्रिया अदा करते हुए वीडियो जारी किया जिसमें गुस्ताव होल्स्ट और द क्लैश के संगीत के अलावा ब्रितानी आइकन शेक्सपियर, डेविड बावी, लुइस हेमिल्टन के साथ-साथ युद्ध के मैदान में तैनात ब्रिटेन से मिले टैंक रोधी हथियारों को भी दिखाया गया.

हाल ही में जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सीज़र सेल्फ प्रोपेल्ड तोपें भेजीं तो यूक्रेन की तरफ़ से शुक्रिया करते हुए एक वीडिया जारी किया गया जिसका शीर्षक था, "रोमांटिक इशारे कई रूप में किए जाते हैं."

इस वीडियो में ग़ुलाबों, चॉकलेट, पेरिस के आसमान के साथ-साथ तोपों को दिखाया गया. शायद अनिवार्य रूप से इसके साथ सर्जे गेंसबर्ग और जेन बर्किन के गाने 'जे तेमे मोई नोन प्लस' का संगीत लगाया गया.

इसमें मैक्रों और ज़ेलेंस्की के बीच ब्रोमांस का संदेश तो था ही लेकिन ये अपने आप में विचारोत्तोजक और चुटीला भी था.

शुक्रिया कहने का मीम वाला अंदाज़

डिफेंस ऑफ़ यूक्रेन ने स्वीडन का शुक्रिया करते हुए ये वीडियो पोस्ट किया
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डिफेंस ऑफ़ यूक्रेन ने स्वीडन का शुक्रिया करते हुए ये वीडियो पोस्ट किया

ओलेना कहती हैं कि उनका सबसे पसंदीदा शुक्रिया वीडियो स्वीडन के लिए है. स्वीडन ने यूक्रेन को कार्ल गुस्ताव रॉकेट लांचर दिए हैं. क़रीब बीस हज़ार डॉलर का या रॉकेट लांचर रूस के 45 लाख डॉलर के टी-90 टैंक को नष्ट कर सकता है.

वो कहती हैं, "ये पूरा पैसा वसूल है."

और इस पर संगीत क्या है. अब तक आपको अंदाज़ा हो ही गया होग.

एबा का गाना- मनी, मनी मनी

ओलेना की टीम के प्रयासों की वजह से अब रक्षा मंत्रालय के ट्विटर पर दुनियाभर में 15 लाख फॉलोवर हैं. कई वीडियो को दस लाख से भी अधिक बार देखा गया.

अभी तक उनका सबसे चर्चित वीडियो अगस्त में क्राइमिया में रूस के ठिकानों पर हुए कई कामयाब हमलों के बाद पोस्ट किया गया था. इसे 22 लाख बार देखा गया है.

इस वीडियो में क्राइमिया में छुट्टियां मनाने आए रूसी लोगों का मज़ाक बनाया गया था और इस पर क्रुअल समर गीत का संगीत लगाया गया था.

ओलेना कहती हैं, "हम दुनिया को ये दिखाना चाहते हैं कि यूक्रेन ये युद्ध जीत सकता है क्योंकि कोई भी हार रहे पक्ष में निवेश नहीं करना चाहता है."

लेकिन ओलेना की एक और टीम विनाशक काम में लगी है. वो युद्ध में रूस को हो रहे नुक़सान को हाइलाइट करते हुए वीडियो बनाती है ताकि आक्रमणकारी बलों का आत्मविश्वास गिराया जा सके.

रूसी दर्शकों पर टार्गेट

सोशल मीडिया पर रूसी सेना को हो रहे नुक़सान के हज़ारों वीडियो पोस्ट किए जाते हैं. ऐसे में ओलेना की टीम के पास कंटेंट की कोई कमी नहीं है.

लेकिन बार-बार प्रयास करने के बाद उन्हें ये पता चल गया है कि किस तरह के वीडियो कामयाब होते हैं और कौन से वीडियो कामयाब नहीं होते.

ओलेना कहती हैं, "हमने मारे गए रूसी सैनिकों की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करने शुरू किए लेकिन बाद में हमें अहसास हुआ कि ये काम नहीं कर रहा है क्योंकि ये रूस के लोगों को हमारे ख़िलाफ़ एकजुट कर रहा था."

इसके बाद उनकी टीम ने रूस के सैनिकों की मानवता और अंतरात्मा को जगाने के लिए मारे जा रहे यूक्रेनी नागरिकों की तस्वीरों को पोस्ट करना शुरू किया लेकिन इसका भी कोई ख़ास असर नहीं हुआ.

ओलेना कहती हैं, "हमें अहसास हुआ कि वासत्व में वो इस पर गर्व करते हैं. वो इसकी बिलकुल भी आलोचना नहीं कर रहे थे. फिर हमें ये अहसास हुआ कि हमें इस काम को और भी चालाकी से करना है."

यूक्रेन की तरफ़ से जारी इस वीडियो में रूसी नागरिकों को चेताया गया है कि अभी उन्हें और बड़े नुक़सान झेलने है
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यूक्रेन की तरफ़ से जारी इस वीडियो में रूसी नागरिकों को चेताया गया है कि अभी उन्हें और बड़े नुक़सान झेलने है

अब वॉलंटियर रूस की सोशल मीडिया फीड की निगरानी करते हैं. देश के ख़ास हिस्सों में रूस की कमज़ोरी को देखते हैं और फिर उसे लक्षित कर अपना कंटेंट बनाते हैं.

ओलेना कहती हैं, "अगर आप सारातोव में ये करते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि सारातोव में क्या चल रहा है. अगर आप निज़नी नोवोग्रोड में ये काम कर रहे हैं तो आपको बता होना चाहिए की वहां क्या हो रहा है."

इस काम का कितना असर हो रहा है इसका पता करना बहुत मुश्किल है लेकिन व्लादिमिर पुतिन के नए सैनिकों को भर्ती करने के आदेश ने वॉलंटियरों को बहुत सामग्री उपलब्ध करा दी है.

ओलेना कहती हैं, "हम रूस में सैनिक भर्ती का इंतेज़ार कर रहे थे. हम ये जानते थे कि इससे उनका आत्मविश्वास बहुत डिगा होगा."

ओलेना की टीम को सबसे ज़्यादा कंटेंट टेलीग्राम पर मिलता है. वो इसे खजाने की संज्ञा देती हैं.

रक्षा मंत्रालय के लिए कंटेंट तैयार करने वाले स्वयंसेवक एक विशाल, जीवंत, उग्र देशभक्त और बेतहाशा अपरिवर्तनीय समुदाय का एक छोटा सा हिस्सा हैं, जो कभी-कभी अद्भुत गति के साथ ज़मीन पर होने वाली घटनाओं पर प्रतिक्रिया करते हैं.

क्राइमिया के कर्च ब्रिज पर जब हमला हुआ तो यूक्रेन ने इसे सोशल मीडिया पर ख़ूब भुनाया
AFP
क्राइमिया के कर्च ब्रिज पर जब हमला हुआ तो यूक्रेन ने इसे सोशल मीडिया पर ख़ूब भुनाया

कई ऐसे टेलीग्राम चैनल भी हैं जिनके फॉलोवर की संख्या लाखों में हैं.

ऐसा ही एक चैनल है जिसका नाम है यूक्रेनियन ऑफेंसिव. इसे 96485 लोग फॉलो करते हैं.

इस चैनल का नारा है, "सिविल मीम मोर्चे पर 2014 से सूचना युद्ध करते हुए"

इस चैनल पर सैन्य अपडेट के अलावा रूस के अलावा कभी-कभी पश्चिमी मीडिया को भी ट्रोल किया जाता है. बीबीसी भी इसमें शामिल है.

दूसरे अन्य चैनलों की ही तरह ये चैनल भी युद्ध के वीभत्स दृश्य दिखाने में हिचकता नहीं है. मारे गए रूसी सैनिकों के शवों के वीडियो यहां ख़ूब साझा किए जाते हैं.

हाल ही में जब क्राइमिया को रूस से जोड़ने वाले कर्च ब्रिज पर हमला किया गया तो यूक्रेन की साइबर आर्मी ने ज़बरदस्त जश्न मनाया और इंटरनेट पर इससे जुड़े मीम की बाढ़ सी आ गई.

लेकिन यूक्रेन ऐसे ही डिजीटल निंजा की सेना नहीं बन गया है. आठ साल से डोनबास क्षेत्र में चल रहे युद्द ने लोगों को अपने कौशल को बढ़ाने का पर्याप्त मौका दिया है.

अब लोग सिर्फ़ फ़र्ज़ी सूचनाओं का पर्दाफ़ाश करना ही नहीं बल्कि अपने लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हास्य कंटेट भी तैयार करना जानते हैं.

यूक्रेन के सेंटर फॉर इंफोर्मेशन एंड स्ट्रेटेजिक सिक्यूरिटी के प्रमुख इहोर सोलोवे कहते हैं कि मौजूदा सोशल मीडिया माहौल आधिकारिक और लोकप्रिय भावना के दुर्लभ संमिलन को दर्शाता है.

वो कहते हैं, "हम इतिहास में शायद ये पहली बार देख रहे हैं जब देश के नागरिक सरकार के साथ हैं और उसकी मदद भी कर रहे हैं."

"सेना अपना काम कर रही है जबकि दूसरी तरफ समाज कंटेट बना रहा है, अपनी रचनात्मकता दिखा रहा है. क्योंकि हर कोई अपने आप को भविष्य के लिए ज़िम्मेदार महसूस कर रहा है."

रूस यूक्रेन को कैसे जवाब दे रहा है?

कीएव की राजधानी में हैकरों की ये कलाकृति बनी हैं
BBC
कीएव की राजधानी में हैकरों की ये कलाकृति बनी हैं

रूस की पहचान सत्ता केंद्र क्रेमलिन से संबंध रखने वाले ट्रोल फॉर्म और स्कैम करने वालों के गढ़ के रूप में रही है, लेकिन ये बात हैरान करती है कि रूस यूक्रेन को बहुत अधिक जवाब नहीं दे पा रहा है.

इसी महीने रूस को दो चर्चित प्रैंक करने वालों ने यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्री कुलेबा को बेवकूफ़ बना दिया. कुलेबा को लग रहा था कि वो मास्को में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल मैकफॉल से बात कर रहे हैं.

इसके कुछ हिस्सों को रूस के सरकारी मीडिया पर भी प्रसारित किया गया था. इसमें कुलेबा ये स्वीकार करते हुए दिख रहे थे कि क्रामिया और रूस में हुए हालिया हमलों के लिए यूक्रेन ही ज़िम्मेदार है.

हालांकि ये प्रैंक 8 अक्तूबर को कर्च ब्रिज पर हुए हमले से पहले किया गया था.

ओलेना कहती हैं कि अगर रूस के पास ऐसी ही रचनात्मक इंटरनेट आर्मी है तो अभी तक उन्होंने उसे नहीं देखा है.

वो कहती हैं, "रूसी अभी तक कुछ भी रोचक नहीं कर सके हैं. ना हास्य है, ना सुंदरता, ना ही दर्द और ना ही करुणा"

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