• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

ट्रंपलोमेसी: ट्रंप ने दुनिया को और ख़तरनाक़ बना दिया है?

By Bbc Hindi

डोनल्ड ट्रंप
REUTERS/Carlos Barria
डोनल्ड ट्रंप

अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने अंदाज़ में अपने 'अमरीका फर्स्ट' की नीति लागू कर दी है, जिसके बाद से दुनिया में जारी अनिश्चितता का दौर और गहरा गया है. इस कारण उनके सहयोगी और प्रतिद्वंदी दोनों ही चिंता में पड़ गए हैं.

लेकिन क्या ट्रंप की इस नीति यानी ट्रंपलोमेसी के कारण दुनिया अधिक ख़तरनाक़ जगह बन गई है?

अगर आप ग़ौर से देखें तो पता चलेगा कि असल में ऐसा नहीं है. राषट्रपति ट्रंप के फ़ैसलों से ख़ासकर सोशल मीडिया और ट्विटर पर डर का माहौल ज़रूर दिखा है लेकिन उन्होंने जिन सहयोगियों के बारे में सवाल उठाए हैं उन्होंने उनके साथ संबंधों को ख़राब नहीं किया है.

क्या ट्रंप ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली?

एशियाई दौरे पर चीन में नहीं गली ट्रंप की दाल!

उन्होंने कोई नई जंग भी शुरू नहीं किया है और देखा जाए तो काफी हद तक उन्होंने अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा की राह पर चलने की कोशिश की है. उनके फ़ैसलों से कुछ हलचल ज़रूर हुई है लेकिन उन्होंने किसी चीज़ को अब तक तबाह नहीं किया है.

लेकिन क्या इस नए कमांडर-इन-चीफ़ ने दुनिया में एक संकट की स्थिति पैदा करने में अहम भूमिका निभाई है? पढ़िए मेरा विश्लेषण -

मध्यपूर्व में इस्लामिक स्टेट पर जीत

सीरिया
DELIL SOULEIMAN/AFP/Getty Images
सीरिया

ट्रंप इराक़ और सीरिया में कथित इस्लामी चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट को लगभग समाप्त कर चुके हैं. इस्लामिक राज्य की स्थापना करने के उद्देश्य के लिए काम करने वाला ये समूह ख़त्म हो चुका है और इसके बचे-खुचे लड़ाके अब ख़ुद को बचाने में जुटे हैं.

ये मान सकते हैं कि ये समूह अब दुनिया के कई देशों में फैल चुका है और ये ब्रैंड अतिवादियों को हिंसा करने के लिए प्रेरित भी करता है. लेकिन ये भी सच है कि इसका केंद्र अब सशक्त नहीं रहा और इस कारण इसका ख़तरा भी अब पहले जैसा बड़ा गंभीर नहीं है.

अमरीका ने सीरिया के सुखोई विमान को मार गिराया

'उम्मीद है ज़रूरत नहीं होगी पर और हमलों के लिए तैयार'

आप इस बात चर्चा कर सकते हैं कि इसका श्रेय ट्रंप को लेना चाहिए या उन्होंने सिर्फ़ बराक ओबामा का अधूरा काम ही पूरा किया है. उन्होंने ओबामा की ही राह पर आगे कदम बढ़ाए हैं.

उन्होंने स्थानीय स्तर पर युद्ध कर रहे सैनिकों को हथियार मुहैया कराए हैं, हवाई और ज़मीनी हमले भी तेज़ कराए हैं. लेकिन उन्होंने इस अभियान को तेज़ी से आगे बढ़ाया है और अमरीकी कमांडरों को फ़ैसले लेने के अधिक अधिकार दिए हैं.

इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ काम कर रहे वैश्विक गठबंधन के लिए स्पेशल राजदूत ब्रैट मैक्गर्क ओबामा और ट्रंप दोनों के ही साथ काम कर चुके हैं. उनका कहना है कि "इस अभियान में इसका बड़ा योगदान रहा है."

इसे ट्रंप की विदेश नीति की सबसे बड़ी सफलता माना जाता है.

मध्यपूर्व में अस्थिरता - ईरान

ईरान बुशहर परमाणु संयंत्र
BEHROUZ MEHRI/AFP/Getty Images
ईरान बुशहर परमाणु संयंत्र

साल भर पहले ईरान के परमाणु अभियान के कारण पैदा हुए ख़तरे के बाद उस पर लगाम लगाने के लिए अमरीका और विश्व की पांच और शक्तियों ने ईरान के साथ एक समझौता किया.

बड़े पैमाने पर देखें तो ये समझौता कारगर भी था लेकिन ट्रंप का कहना है कि इसमें कई दिक्कतें हैं, जिन्हें "दुरुस्त करना" ज़रूरी है. वो अब इसे ख़ारिज करने की धमकी दे रहे हैं. उनका कहना है कि जिन यूरोपीय देशों ने ये समझौता करने में मदद की थी वो कड़ा रुख़ अख्तियार करें.

ईरान के लिए ये आख़िरी मौका है: ट्रंप

'यमन में विद्रोहियों को मिसाइल दे रहा है ईरान'

ट्रंप परमाणु हथियारों पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगाना चाहते हैं ताकि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोका जा सके और ईरान की 'नुक़सान पहुंचाने वाली' उन हरकतों को रोका जा सके जो इस समझौते में शामिल नहीं हैं.

ये वो कुछ चीज़ें हैं जिन पर यूरोपीय देशों को फ़ैसला लेना ज़रूरी है लेकिन इससे परमाणु समझौता कतई कमज़ोर नहीं होना चाहिए.

इस समझौते के रद्द होने के तीन बड़े ख़तरें हैं - मध्यपूर्व में अधिक अस्थिरता (ख़ास कर तब जब ट्रंप ईरान के क्षेत्रीय प्रतिद्वंदी सऊदी अरब का करीबी है), द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले ट्रांस-अटलांटिक समझौते का कमज़ोर हो जाना.

संयुक्त राष्ट्र में निरस्त्रीकरण अधिकारी के तौर पर काम कर चुकीं एंग्ला केन कहती हैं कि इसका असर परमाणु निरस्त्रीकरण संधि पर भी असर पड़ सकता है जो ईरान के साथ हुए समझौते का आधार था.

ये ख़तरनाक है.

रडार पर लौट आया परमाणु युद्ध का ख़तरा

किम जोंग-उन
JUNG YEON-JE/AFP/Getty Images
किम जोंग-उन

उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने परमाणु हथियार बना कर और अमरीका को उनकी धमकी दे कर दुनिया को अधिक ख़तरनाक जगह बना दिया है.

लेकिन ट्रंप ने उनकी हर बात का जवाब दे कर इस पूरे माहौल को ही ख़तरनाक़ बना दिया है जिससे अब अचानक ही युद्ध या हमले की आशंका बढ़ गई है.

कभी वो अमपानजनक और धमकी भरे ट्वीट करते हैं, तो कभी बातचीत करने की अपनी इच्छा ज़ाहिर करते हैं. फिलहाल वो दूसरे मूड में हैं और विंटर ओलंपिक के चलते उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच चल रही वार्ता का समर्थन कर रहे हैं.

ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी समर्थन भी हासिल किया है ताकि उत्तर कोरिया पर परमाणु हथियारों को छोड़ने के लिए दवाब बनाया जा सके.

उत्तर कोरिया अमरीका से जंग करने को तैयार?

'अमरीका को उत्तर कोरिया ब्लैकमेल कर रहा है'

ट्रंप और किम जोंग-उन
Adam Berry/Getty Images
ट्रंप और किम जोंग-उन

जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन में डिप्टी सेक्रेटरी के तौर पर काम कर चुके जॉन नेग्रोपॉन्ट कहते हैं कि इससे पता चलता है कि ट्रंप दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

वो कहते हैं, "लोग उनसे ख़फ़ा हैं क्योंकि उन्होंने किम जोंग-उन को संयुक्त राषट्र में रॉकेट मैन कहा और इससे दुनिया को ख़तरा हो गया. बस भी कीजिए. लाठियों और हथियारों से नुकसान होता है, शब्दों से नहीं. "

सेंटर फॉर अ न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी में एशिया के एक विशेषज्ञ पैट्रिक क्रोनिन कहते हैं, ट्रंप का किसी एक बात पर स्थिर ना रहना सही है. वो कहते हैं, "किम जोंग-उन को लगता है कि हम शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगे और इस तरह के तनाव में ट्रंप के बयान बिल्कुल सही हैं, आप चाहे इन्हें बचकाने तरीके ही कहें. "

लेकिन 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के बाद से ये पहली बार है जब अमरीका ने किस देश को परमाणु हमले की चेतावनी दी है.

ये अपने आप में एक ख़तरनाक़ कदम है.

अमरीका: उत्तर कोरिया का मिसाइल टेस्ट दुनिया के लिए ख़तरा

फिर लौट आया कोल्ड वॉर

व्लादिमीर पुतिन
EPA/ALEXEI DRUZHININ / SPUTNIK / KREMLIN POOL
व्लादिमीर पुतिन

हाल में हवाई में मिसाइल हमले की ग़लत चेतावनी जारी कर दी गई थी. लेकिन ये चेतावनी कर्मचारी के ग़लत बटन दबाने की वजह से जारी हुई.

बिल क्लिंटन प्रशासन में सेक्रेटरी रह चुके विलियम पेरी ग़लत चेतावनी के बारे में जानते हैं. वो कहते हैं कि ख़तरा अब लौट आया है. वो कहते हैं, "अमरीका और रूस एक दूसरे का साथ आक्रामक तेवर लिए नज़र आ रहे हैं और इस कारण कोल्ड वॉर का ख़तरा फिर से लौट आया है."

लेकिन ये केवल रूस और अमरीका की ग़लती नहीं है क्योंकि दोनों ही अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं और कोल्ड वॉर का ख़तरा बढ़ रहा है.

क्या अमरीका की बादशाहत ख़त्म कर देंगे पुतिन?

पुतिन ने 755 अमरीकी राजनयिकों से रूस छोड़ने को कहा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल में यूक्रेन में अपनी हस्तक्षेप बढ़ाया है. ओबामा प्रशासन के दौरान दोनों राष्ट्रपतियों ने आपस में बात करना बंद कर दिया था.

ट्रंप पुतिन से बात करना चाहते हैं लेकिन वो ऐसा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों में रूस की कथित हस्तक्षेप को लेकर अमरीका में विरोध हो रहा है.

विडंबना ये है कि दोनों देशों के रिश्ते ओबामा के दौर से भी निचले स्तर पर हैं. और इसे चेतावनी के तौर पर लिया जाना चाहिए.

ये ख़तरनाक़ है.

कूटनीति में बढ़ रही समस्याएं

अमरीकी हेलिकॉप्टर
SAUL LOEB/AFP/Getty Images
अमरीकी हेलिकॉप्टर

ट्रंप ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि वो राजनयिकों की जगह जनरलों को अधिक तवज्जो देते हैं.

उन्होंने विदेश विभाग के बजट में कटौती का प्रस्ताव दिया है और उनके ही दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधी फ़ैसले लेने में विदेश विभाग का दख़ल कम हुआ है.

9/11 के हमलों के बाद से अमेरिकी विदेश नीति का सैन्यकरण हो रहा है. ट्रंप ने इस प्रक्रिया को तेज़ किया है. ऐसा दिखता नहीं कि ट्रंप को कूटनीति की अधिक समझ है या वो इसके बारे में कोई चिंता है.

एक बार फ़ॉक्स न्यूज़ में एक कार्यक्रम के दौरान विदेश विभाग में खाली पड़े स्थानों के बारे में उनसे पूछा गया था तो उन्होंने इसके जवाब में कहा था, "सिर्फ मैं ही हूं जो महत्वपूर्ण है."

कूटनीति एक तरह से स्वास्थ्य सेवा की तरह है, इससे कई बिमारियों से बचा जा सकता है. इसके कमज़ोर होने पर तनाव बढ़े या युद्ध की आशंका बढ़ जाती है.

ये ख़तरनाक़ है.

'ज़मीनी हमले से ही उत्तर कोरिया की तबाही संभव'

जब ग़लती से मिसाइल हमले का अलर्ट जारी हो गया...

क्या पीछे हट रहा है अमरीका?

जलवायु परिवर्तन
PAUL J. RICHARDS/AFP/Getty Images
जलवायु परिवर्तन

वैश्विक समस्याओं को साथ में सुलझाने की कई अंतरराष्ट्रीय कोशिशों से यानी समझौतों से अमरीका बाहर निकलने की राह अपना रहा है. पेरिस जलवायु समझौते से अमरीका को बाहर निकलना अब तक का उनका सबसे चर्चित फ़ैसला रहा है.

ये बात सच है कि समझौते से बाहर जाने की प्रक्रिया में चार साल लगते हैं लेकिन अमरीका और कई निजी कंपनियां स्वच्छ ऊर्जा की अपनी योजनाओं पर काम करना शुरू कर चुकी हैं.

लेकिन ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए अमरीका जो कर सकता था अब वह वो नहीं करेगा.

मोटे तौर पर, ट्रंप की 'अमरीका फर्स्ट नीति' के कारण उन गठबंधन और समझौतों पर असर पड़ रहा है जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में शांति बनाए रखने की कोशिशें कीं.

ट्रंप कम से कम अमरीका के नेतृत्व लेने वाले पारंपरिक भूमिका से पीछे हट रहे हैं.

'द अटलांटिक' में काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स के रिचर्ड हैस लिखते हैं, कि अगर अमरीका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए समझौतों से हटने की फ़ैसला करता है तो उनकी जगह कोई और देश नहीं ले सकता.

ये एक चेतावनी है.

अमरीका पेरिस समझौते से बाहर होगा: ट्रंप

पेरिस समझौते में शामिल होगा सीरिया, अमरीका पड़ा अकेला

अविश्वसनीय और अप्रत्याशित

आप कह सकते हैं कि ट्रंप 'अमरीका फर्स्ट' की अपनी नीति से कम और अपने अस्थिर व्यक्तित्व से अधिक प्रेरित हैं.

इस कारण अमेरिकी विदेश नीति पर बड़ा असर पड़ा है, जो अब ट्वीट के ज़रिए सामने आती है और अक्सर प्रशासन के आला अधिकारियों के विचारों से मेल नहीं खाती.

ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनके ट्वीट्स की अनिश्चितता से फ़ायदा हो सकता है या फिर इन्हें अनदेखा कर दिया जाना चाहिए.

और यह ठीक नहीं- दुनिया पहले ही अनिश्चितता के दौर में है और ऐसे में व्हाइट हाउस की अनिश्चितता सहीं नहीं लगती

ये ख़तरनाक़ है.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Trumplomacy Trump has made the world more dangerous
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X