H1B वीजा का ये प्रस्ताव बना कानून तो भारतीय कंपनियों को अमेरिका में होगी परेशानी
वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की एक समिति ने बुधवार को एच -1 बी वीजा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियमों का प्रस्ताव पर मतदान के लिए मंजूरी दे दी। यह अमेरिका में काम कर रहे भारतीय आईटी कंपनियों को आवश्यक रूप से प्रभावित कर सकती है। रिपब्लिकन सांसद डेरेल इसा द्वारा प्रस्तावित गए विधेयक में जो प्रस्ताव किया गया है वो भारतीय कंपनियों द्वारा अनुपालित किए जाने वाले व्यापार मॉडल पर आधारित है। इसमें H1B वीजा के आधार पर विदेशियों और अमेरिकी निवासियों को दिए जाने वाले भुगतान का जिक्र किया गया है। हालांकि, यह विधेयक, जिस पर इसा ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन है, इसे लंबा रास्ता तय करना होगा। इसे पहले हाऊस में पास होना है और फिर इसी प्रक्रिया से सीनेट में। इसके बाद यह बिल एक समिति द्वारा फुल अपर चेंबर के सामने रखी जाएगा जिस पर वोटिंग होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होंगे।

इस नए बिल में एच -1 बी पर निर्भर कंपनियों के लिए इसे और अधिक मुश्किल बनाने की बात की गई है। बिल में कहा गया है कि जिस कंपनी में 15 फीसदी से अधिक कर्मचारी H1B वीजा पर हैं, इसे 20 फीसदी किया जाए। इसमें अधिकतर भारतीय कंपनियां ही शामिल हैं। विधेयक में 60,000 डॉलर से 90,000 डॉलर के वर्तमान सैलरी से 50% वेतन वृद्धि का प्रस्ताव है। इसके लिए यह तर्क दिया गया है कि न्यूनतम दर अलग-अलग समय और संदर्भ में दशकों पहले तय की गई थी।
अमेरिका, अमेरिकी कंपनियों को विदेशों से 65,000 अत्यधिक कुशल विदेशी श्रमिकों और अमेरिकी विद्यालयों और कॉलेजों में दाखिला रखने वाले विदेशी छात्रों के बीच 20,000 लोगों को काम पर रखने की अनुमति देता है। इस वीजा की एक बड़ी संख्या भारतीय आईटी कंपनियों पर जाती है, जिन पर अमेरिकी श्रमिकों को बदले उनका इस्तेमाल करने का आरोप है।












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