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'ये लड़कियां हैं, माएं नहीं': वो देश जहां रोज़ छह लड़कियाँ करवाती हैं गर्भपात

By BBC News हिन्दी

ये लड़कियां हैं, माएं नहीं: एक ऐसा देश जहां हर दिन छह बच्चियों को अबॉर्शन कराना पड़ता है
Getty Images
ये लड़कियां हैं, माएं नहीं: एक ऐसा देश जहां हर दिन छह बच्चियों को अबॉर्शन कराना पड़ता है

मेलानिया एमोरिम स्त्री रोग चिकित्सा के अपने करियर की शुरुआत में ही थीं जब उनका सामना एक टीनेज प्रेग्नेंसी के मामले से हुआ.

यह 13 साल की एक लड़की थी जिसके हाथ और पैर लकवाग्रस्त थे. लड़की के साथ उसके घर के पीछे रेप हुआ था. उस वक्त उनकी मां घर के कामकाज निबटा रही थीं.

ब्राज़ील के उत्तर-पश्चिमी इलाके के एक हॉस्पिटल में उन्हें गर्भपात के लिए ले जाया गया था. लेकिन, कोई भी डॉक्टर इसके लिए तैयार नहीं था.

डॉ. एमोरिम ने बीबीसी को बताया, "लड़की की मां कपड़े धोने का काम करती थी और वे उसे घर के बाहर छोड़ गई थीं. हमला होने के बाद वह लड़की गर्भवती हो गई."

"हॉस्पिटल में कोई भी उसे छूना नहीं चाहता था. वे कहते थे कि वे गर्भपात के खिलाफ हैं."

डॉ. एमोरिम कहती हैं, "मेरी उम्र कम थी, लेकिन मैंने यह गर्भपात किया. मुझे यकीन था कि मैं उस बच्ची की जिंदगी बचा रही हूं और एक रेप पीड़ित के तौर पर यह उसका अधिकार था."

डॉ. एमोरिम ने टीनेज प्रेग्नेंसी पर 30 साल तक काम किया है और वे ऐसे मामलों में विशेषज्ञता रखती हैं जहां लड़कियां रेप के बाद गर्भवती हो जाती हैं.

डॉक्टर मेलानिया एमोरिम
Reprodução
डॉक्टर मेलानिया एमोरिम

हर घंटे रेप के चार मामले

ब्राज़ील में 10 साल की एक लड़की के साथ उसके चाचा ने लगातार रेप किया जिससे वह गर्भवती हो गई. आख़िर में उसका गर्भपात कराना पड़ा. इस घटना ने पूरे ब्राज़ील को हिलाकर रख दिया.

यह घटना एस्पिरिटो सैंटो राज्य के साओ मैटियस में हुई थी.

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब उस बच्ची को गर्भपात के लिए पड़ोस के राज्य में ले जाना पड़ा. उस बच्ची के निजी ब्यौरे एक दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट ने ऑनलाइन साझा कर दिए थे.

इस गर्भपात को रोकने के लिए अदालत में भी फ़रियाद लगाई गई और धार्मिक समूहों ने विरोध-प्रदर्शन भी किए. कुछ आंदोलनकारियों ने तो उस अस्पताल में भी घुसने की कोशिश की जिसमें वह लड़की भर्ती थी.

ब्राज़ील का कानून केवल उस दशा में प्रेग्नेंसी को ख़त्म करने की इजाज़त देता है जबकि यह कोई रेप का मामला हो या फिर इस गर्भ से महिला के जीवन को ख़तरा हो.

छह साल की उम्र से अपने चाचा के यौन शोषण का शिकार हो रही इस 10 साल की लड़की के गर्भपात के लिए एक जज ने पहले ही इजाज़त दे दी थी.

डॉ. एमोरिम कहती हैं कि इस तरह की मेडिकल स्थितियां असामान्य नहीं हैं. ब्राज़ील के पब्लिक हेल्थ सिस्टम एसयूएस पर 10 से 14 साल की लड़कियों के औसतन कम से कम 6 अबॉर्शन के दर्ज होते हैं.

यौन हिंसा के आँकड़े भी चौंकाने वाले हैं. एक एनजीओ ब्राज़ीलियन पब्लिक सेफ्टी फोरम के इकट्ठे किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि ब्राज़ील में 13 साल से कम उम्र की चार लड़कियों का हर घंटे रेप होता है.

लड़कियाँ करवाती हैं गर्भपात

कम उम्र की लड़कियों में प्रेग्नेंसी बेहद खतरनाक

डॉक्टर बताती हैं कि 10 साल की बच्ची के गर्भपात को रोकने की कोशिशें देखकर उनमें परेशानी, गुस्सा, आश्चर्य और हताशा के मिलेजुले भाव पैदा हुए.

इस उम्र में गर्भवती होना बेहद जोखिम भरा माना जाता है. यूनिसेफ की एक स्टडी बताती है कि 15 साल की उम्र से पहले गर्भवती होने वाली लड़कियों में बच्चे पैदा करते वक्त जान गंवाने की आशंका उम्र के बीसवें दशक में चल रही लड़कियों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा होती है.

लैटिन अमरीका में युवा प्रेग्नेंट लड़कियों पर की गई अमरीकन जर्नल ऑफ ऑब्सटीट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी की एक स्टडी में पता चला है कि 15 साल या उससे कम उम्र की लड़कियों में गंभीर एनीमिया होने और प्रसवोत्तर हैमरेज होने का ज्यादा जोखिम होता है.

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बच्चे के लिए खतरा

नवजात बच्चों के मरने का भी इसमें ज्यादा खतरा होता है.

मेलानिया एमोरिम बताती हैं कि 10 से 15 साल की युवा बच्चियों में प्री-इक्लैंप्सिया और इक्लैंप्सिया का ज्यादा जोखिम होता है. ये ऐसी स्थितियां होती हैं जिनके चलते रक्तचाप बढ़ जाता है और इसकी वजह से मरीज कोमा में भी जा सकता है.

डॉक्टर कहती हैं, "इन लड़कियों के बच्चों का वजन बढ़ना भी मुश्किल भरा हो सकता है. लड़की के शरीर की बनावट के हिसाब से इन बच्चों की ग्रोथ भी कमजोर रह सकती है और ऐसे में कई बच्चे वक्त से पहले पैदा हो जाते हैं."

13 साल या उससे कम उम्र की लड़कियों में प्रेग्नेंसी तो और भी ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि उनके शरीर विकसित होने की प्रक्रिया में होते हैं.

वे बताती हैं, "उनके शरीर और अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हुए होते हैं."

"गर्भपात इन लड़कियों के लिए कहीं ज्यादा सुरक्षित होता है"

डॉ. एमोरिम कैंपिना ग्रांड फेडरल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी हैं. वे कहती हैं कि बच्चे पैदा करने की बजाय कानूनी तरीके से गर्भपात इन लड़कियों के लिए ज्यादा सुरक्षित होता है.

"सबसे खराब चीज असुरक्षित गर्भपात होता है जिसमें महिला को यह सब छिपकर करना पड़ता है."

डॉ. एमोरिम कहती हैं कि ऐसे देश जहां पर बाल विवाह को मंजूरी है, वहां हुए अध्ययनों से पता चलता है कि ब्लैडर और वजाइना के बीच आंतरिक चोटों के मामले एक आम बात हैं.

मेलानिया एमोरिम यौन हिंसा पीड़ितों के लिए भी काम करती हैं. बतौर गायनेकोलॉजिस्ट उन्होंने छह महीने से लेकर 92 साल की उम्र तक के पीड़ितों की सहायता की है.

वे बताती हैं, "हमें रेप से बचाने में उम्र कोई फैक्टर नहीं है. हम महिलाएं किसी भी उम्र में सुरक्षित नहीं हैं."

कई लड़कियों को पता नहीं होता कि वे कानूनी तौर पर गर्भपात करा सकती हैं

प्रेग्नेंसी का हर मामला गर्भपात तक नहीं जाता. डॉक्टर का कहना है कि रेप की कुछ युवा पीड़ित लड़कियां बच्चे के जन्म से ठीक पहले अस्पताल आती हैं.

"कई लड़कियों को पता ही नहीं होता कि वे कानूनी तौर पर गर्भपात कराने का हक रखती हैं."

एमोरिम मैटरनल डेथ के एक ऐसे ही अपने पहले केस को याद करती हैं. वे उस वक्त महज 17 साल की थीं और मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं.

वे कहती हैं, "वह एक 13 साल की लड़की थी जो कि अवैध रूप से किए गए अबॉर्शन की वजह से मर गई. सबसे बुरी बात यह थी कि वह कानूनी तौर पर गर्भपात करा सकती थी."

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ये लड़कियां हैं, माएं नहीं: एक ऐसा देश जहां हर दिन छह बच्चियों को अबॉर्शन कराना पड़ता है

अलग मामला

लेकिन, डॉ. एमोरिम मानती हैं कि साओ मैटियस वाला मामला उनके करियर के दूसरे सभी मामलों से अलग है. इसकी वजह यह है कि पीड़िता के नाम और हॉस्पिटल का खुलासा कर दिया गया था.

वे बताती हैं, "इस तरह के गर्भपात की गारंटी कानून में है और गोपनीयता का सम्मान किया जाना चाहिए."

"निजी ब्यौरा कैसे बाहर आया इसकी जांच होनी चाहिए. यह एक बेहद गंभीर स्थिति है. कोई शख्स कैसे उस लड़की की जानकारियों तक पहुंचा?"

10 साल की लड़की की प्रेग्नेंसी के बारे में 8 अगस्त को पता चला. इस मामले की खबरें राष्ट्रीय बहस का विषय बन गईं और इसमें सरकारी मंत्री तक शामिल हुए.

न्यायिक आदेश होने के बावजूद डॉक्टरों के 14 अगस्त को अबॉर्शन करने से इनकार करने के बाद इस मसले पर बहस और तेज़ हो गई. डॉक्टरों का कहना था कि जेस्टेशन की अवधि ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय की तय की गई 22 हफ्ते की सीमा को पार कर चुकी है.

ये लड़कियां हैं, माएं नहीं: एक ऐसा देश जहां हर दिन छह बच्चियों को अबॉर्शन कराना पड़ता है
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रिकवरी और अरेस्ट

विटोरिया के हॉस्पिटल ने कहा कि गर्भपात नहीं करने का फैसला तकनीकी आधार पर लिया गया और इसके पीछे कोई वैचारिक मतभेद नहीं था.

लड़की को आखिर में तीन दिन बाद 1,650 किमी दूर रेसीफ में गर्भपात कराना पड़ा.

डॉ. एमोरिम कहती हैं, "लीगल अबॉर्शन करना गर्भवती महिलाओं के लिए काम करने वाले किसी भी अस्पताल की जिम्मेदारी है."

बताया गया है कि लड़की स्वस्थ है. उनके चाचा को 18 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया है.

डॉ. एमोरिम का कहना है कि यौन शोषण की शिकार दूसरी लड़कियों की तरह से ही उसे भी मनोवैज्ञानिक देखभाल मिल रही है.

वे कहती हैं, "रेप हमेशा के लिए अपने जख्म छोड़ जाता है. अस्पताल आने वाली लड़कियां सदमे में रहती हैं. ये बच्चियां होती हैं माएं नहीं होती हैं."

"वे अपने गर्भ में हिंसा की निशानी नहीं चाहती हैं."

BBC Hindi
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English summary
'These are girls, not mothers': the country where six girls get abortions every day
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