पीरियड्स के बारे में लड़के-लड़कियों को साथ में पढ़ाएं

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पीरियड्स यानी माहवारी एक ऐसा विषय है जिसके संबंध में आज भी हमारे समाज में खुलकर बात नहीं की जाती. आज भी पीरियड्स के संबंध में लोगों का ज्ञान आधा-अधूरा ही है.

इसी विषय पर ब्रिटेन की एक चैरिटी संस्था का कहना है कि लड़के और लड़कियों को स्कूल में एक साथ पीरियड्स के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए.

प्लान इंटरनेश्नल यूके नामक इस चैरिटी संस्था का कहना है कि पीरियड्स के बारे में स्कूल में चर्चा होनी चाहिए. इसका अधूरा ज्ञान आगे चलकर नुकसानदायक साबित होता है.

पीरियड्स पर बोलने पर शर्माती हैं लड़कियां

इस संस्था ने 14 से 21 साल तक की 1000 लड़कियों के बीच एक सर्वे करवाया, जिसमें निकलकर आया कि लगभग 50 प्रतिशत लड़कियां पीरियड्स के विषय में बात करने पर शर्म महसूस करती हैं.

प्लान इंटरनेश्नल यूके संस्था में लड़कियों की प्रमुख कैरी स्मिथ कहती हैं, ''मेरे ख्याल से पीरियड्स को लेकर एक तरह का टैबू बना हुआ है, लड़के या लड़कियां किसी को भी पीरियड्स के बारे में सही तरीके से नहीं पढ़ाया जाता.''

इस सर्वे में शामिल सात में से एक लड़की ने माना कि जब उन्हें पहली बार पीरियड्स होने शुरू हुए तो उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी.

नीना अभी 18 साल की हैं, उन्हें 12 साल की उम्र में पीरियड्स शुरू हुए. वे बताती हैं, '' मैनें अपने नीचे देखा तो वहां खून था, मैं डर गई. मेरी मां ने मुझे एक सैनिटरी पैड और तौलिया दिया लेकिन पीरियड्स के बारे में कुछ नहीं बताया. मैं सोच रही थी कि कहीं मैं मर ना जाऊं.''

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इसी तरह 18 वर्षीय एक और लड़की इनिस ने अपना अनुभव साझा किया और बताया कि वे इस संबंध में अपने पुरुष मित्र से बात करने में सहज महसूस नहीं कर रही थीं.

वे बताती हैं, ''मेरे पीरियड्स चल रहे थे और मैं सैनिटरी पैड खरीदना चाहती थी, तभी मेरे दोस्तों ने पैड खोज लिए और वे कहने लगे कि हमें हवा में लोहे सी गंध आ रही है, उस वक्त में कोने में दुबकी हुई थी.''

हालांकि क्लेयर का अनुभव थोड़ा अलग है. वे भी 18 साल की हैं और यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं. क्लेरा कहती हैं कि वे इस संबंध में अपने भाई के साथ बात कर लेती हैं.

क्लेरा बताती हैं, ''अगर हम लड़कों को इस बारे में बता देंगी तो वे मर थोड़े ही ना जाएंगे. इसलिए बेझिझक इस बारे में बात करो.''

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सर्वे के अनुसार सिर्फ 24 प्रतिशत लड़कियां ही अपने पुरुष मित्रों के साथ पीरियड्स के संबंध आराम से बातें कर पाती हैं.

क्या है पुरुषों की राय ?

इस संबंध में पुरुषों की राय थोड़ा जुदा है. 19 वर्षीय युवक निदार कहते हैं कि वे पीरियड्स के बारे में जानने को इच्छुक नहीं हैं.

वे कहते हैं, ''यह सब प्राकृतिक है, पीरियड्स का होना लड़कियों की गलती नहीं है, लेकिन इसे इतना ज्यादा बताने की जरूरत भी नहीं है. अगर मुझे फ्लू हो जाता है, तो क्या मैं सबको बताता फिरूंगा कि आज मुझे फ्लू है.''

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वहीं प्लान इंटरनेश्नल यूके की प्रमुख कैरी स्मिथ कहती हैं लड़कों ने उन्हें बताया कि वे पीरियड्स के विषय में और जानकारियां प्राप्त करना चाहते हैं.

इंग्लैंड के शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने इस संबंध में बताया कि उनके शिक्षा कार्यक्रमों में मासिक धर्म, सेक्स और रिलेशनशिप संबंधी बातें पहले से भी शामिल हैं.

वे कहते हैं, ''स्कूल इस संबंध में खुद फैसला ले सकते हैं. वे छात्रों को मासिक धर्म के संबंध में अलग से विशेषज्ञ बुलाकर शिक्षा दे सकते हैं.''

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