भारतीय दूतावासों में तालिबान लड़ाकों के घुसने की खबर, स्थानीय कर्मचारियों ने किया खंडन
काबुल, 20 अगस्त। रविवार 15 अगस्त को राजधानी काबुल पर नियंत्रण के साथ ही तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा हो गया है। देश पर कब्जे के बाद तालिबान ने दावा किया था कि वह विदेशी दूतावासों को काम करने देंगे। इसके साथ ही उन्होंने विदेशी मिशनों में काम करने वाले लोगों को सुरक्षा देने की बात भी कही थी लेकिन अफगानिस्तान से आ रही खबरों में कहा गया है कि तालिबान लड़ाके भारत के दो दूतावासों में घुसे थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा था कि तालिबान ने कंदहार और हेरात में भारतीय वाणिज्य दूतावासों में घुसकर तलाशी ली थी। हालांकि काबुल स्थित भारतीय मिशन के स्थानीय कर्मचारियों ने भारतीय मिशनों में तालिबान के घुसने से इनकार किया है।

कंधार और हेरात में तालिबान के घुसने की खबर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान लड़ाके कंधार और हेरात स्थिति भारतीय वाणिज्य दूतावासों में घुसे थे और वहां पर तलाशी ली थी। बुधवार को तालिबान लड़ाके दूतावासों को ताला तोड़कर अंदर घुस गए थे और अंदर कागजातों की खोजबीन की। इसके बाद वे दूतावासों में खड़े कुछ वाहनों को अपने साथ लेकर चले गए थे।
रिपोर्ट में कहा गया गया है कि खुफिया इनपुट में कंधार और हेरात स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावासों में तालिबान द्वारा तलाशी लिए जाने की खबर सामने आई थी। जिसके बाद काबुल स्थित स्थित दूतावास के स्थानीय कर्मचारियों ने कहा है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है
बता दें कि तालिबान ने भले ही सभी को आम माफी की बात कही है लेकिन आतंकी समूह के खाने के और दिखाने के दांत अलग-अलग हैं। अफगानिस्तान से जो खुफिया रिपोर्ट सामने आई हैं उसके मुताबिक तालिबान के लड़ाके अफगानिस्तान की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी एनडीएस में काम करने वालों की तलाश के लिए घर-घर में तलाशी ले रहे हैं। साथ ही लोगों को धमकाया जा रहा है कि वे एनडीएस में काम करने वालों के बारे में जानकारी दें वरना उन्हें सजा दी जाएगी। अफगान खुफिया एजेंसी में काम करने वाले कर्मचारियों के रिश्तेदारों और घर वालों को भी धमकाने की जानकारी सामने आई है।

तालिबान का असली चेहरा आया सामने
तालिबान नेतृत्व ने इस सप्ताह की शुरुआत में ही अपने लड़ाकों को दूसरे देशों के खाली दूतावासों में न घुसने का आदेश दिया था और उनके वाहनों में भी तोड़फोड़ न करने को कहा गया था। लेकिन भारतीय मिशनों पर तालिबान के छापों की खबरों ने तालिबान का असली चेहरा सामने ला दिया है।
अफगानिस्तान में भारत अपने चार दूतावास संचालित कर रहा था। तालिबान की बढ़त के बीच भारत ने कंधार, हेरात और मजार-ए-शरीफ स्थित दूतावासों को पहले ही खाली कर दिया था। काबुल स्थित दूतावास से भी अधिकांश कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया है लेकिन अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वापस लाने के बचाव प्रयासों में समन्वय के लिए इसे खोले रखा गया है।

अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए अभियान जारी
अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत काबुल एयरपोर्ट पर बचाव मिशन जारी रखे हुए है जिसके तहत मंगलवार को 120 लोगों को वापस लाया गया था। जबकि अन्य भारतीय जो वहां अभी भी फंसे हुए हैं उन्हें वापस लाने के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय प्रयास कर रहा है।
इसके पहले जानकारी आई थी कि सोमवार को जब काबुल में भारतीय दूतावास से राजनयिकों और भारतीय नागरिकों को निकाले जाने की योजना बन रही थी उस दौरान तालिबान लड़ाके गेट पर आ गए थे और बाहर जाने से रोक दिया था। हालांकि बाद में दूतावास ने तालिबान से संपर्क किया जिसके बाद तालिबान ने उन्हें एयरपोर्ट तक निकलने में मदद की थी। समाचार एजेंसी एएफपी ने इस बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की थी। हालांकि तालिबान के द्वारा मदद लेने के बारे में भारत ने कुछ भी नहीं कहा है।












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