तालिबान काबुल में दाख़िल: अशरफ़ ग़नी अफ़ग़ानिस्तान से भागकर कहां गए हैं?
अफ़ग़ानिस्तान इस समय पूरी तरह तालिबान के नियंत्रण के क़रीब पहुंच चुका है और राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देश छोड़कर जा चुके हैं. ऐसी रिपोर्ट भी हैं कि उपराष्ट्रपति अमीरुल्लाह सालेह ने भी काबुल छोड़ दिया है.
तालिबान ने काबुल की ओर अपनी बढ़त तब बनाई जब अधिकारियों ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति ग़नी भाग गए हैं.
शुरुआती रिपोर्ट्स से यह पता चलता है कि वो ताजिकिस्तान भागे हैं. हालांकि, अल-जज़ीरा ने रिपोर्ट किया है कि ग़नी, उनकी पत्नी, सेना प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद गए हैं.
उन्होंने राष्ट्रपति के व्यक्तिगत बॉडीगार्ड के हवाले से यह बात कही है. हालांकि, सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है.
देश से भागने पर दी सफ़ाई
वहीं, एक फ़ेसबुक पोस्ट में अफ़ग़ान नागरिकों को संबोधित करते हुए ग़नी ने कहा है कि राजधानी को छोड़ना एक कठिन फ़ैसला था जो कि उन्होंने रक्तपात को रोकने के लिए लिया.
वो लिखते हैं कि उनके रहते हुए तालिबान के काबुल में आने के बाद झड़प होती जिससे लाखों लोगों की ज़िंदगियां ख़तरे में पड़ जातीं.
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "आज मुझे एक मुश्किल फ़ैसला करना था कि या तो मैं सशस्त्र तालिबान जो महल (राष्ट्रपति भवन) में दाख़िल होना चाहते थे उनके सामने खड़ा हो जाऊं या फिर अपने प्यारे मुल्क जिसकी बीते 20 सालों में सुरक्षा के लिए मैंने अपनी ज़िंदगी खपा दी उसे छोड़ दूं."
"अगर इस दौरान अनगिनत लोग मारे जाते और हमें काबुल शहर की तबाही देखनी पड़ती तो उस 60 लाख आबादी के शहर में बड़ी मानवीय त्रासदी हो जाती."
उन्होंने आगे लिखा कि तालिबान ने तलवारों और बंदूक़ों के ज़ोर पर जीत हासिल कर ली है, और अब मुल्क की अवाम के जानो माल और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी तालिबान पर है.
उन्होंने कहा, "मगर वो दिलों को जीत नहीं सकते हैं. इतिहास में कभी भी किसी को सिर्फ़ ताक़त से ये हक़ नहीं मिला है और न ही मिलेगा. अब उन्हें एक ऐतिहासिक परीक्षा का सामना करना है, या तो वो अफ़ग़ानिस्तान का नाम और इज़्ज़त बचाएंगे या दूसरे इलाक़े और नेटवर्क्स."
अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने की आलोचना
अफ़ग़ानिस्तान के हाई काउंसिल फ़ॉर नेशनल रिकंसिलिएशन के चैयरमेन अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने देश छोड़ दिया है.
यह हाई काउंसिल तालिबान से बातचीत करने के लिए गठित किया गया था.
फ़ेसबुक पर एक वीडियो में अब्दुल्ला ने ग़नी को 'पूर्व राष्ट्रपति' बताते हुए कहा है कि 'उन्होंने राष्ट्र को ऐसी स्थिति में छोड़ा है. ख़ुदा उनको ज़िम्मेदार ठहराएगा और राष्ट्र भी न्याय करेगा.'
कौन हैं अशरफ़ ग़नी
ग़नी दो बार अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति चुने गए थे. पहली बार 2014 और दूसरी बार 2019 में.
वो एक पूर्व तकनीक शास्त्री हैं जो देश के चर्चित शिक्षाविद रहे हैं. उन्होंने अपना अधिकतर करियर अफ़ग़ानिस्तान के बाहर ही पूरा किया लेकिन वो कई सालों के युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण के लिए वापस आए.
जब उन्होंने राष्ट्रपति कार्यालय को संभाला तो उन्हें एक बेहद ईमानदार शख़्स के तौर पर देखा गया. हालांकि, उन्हें जल्द ही ग़ुस्सा होने वाले शख़्स के तौर पर भी जाना गया.
देश के बहुसंख्यक पश्तून समुदाय से आने वाले ग़नी ने तब कार्यालय संभाला था जब 2014 में अधिकतर विदेशी सैनिक देश छोड़ रहे थे.
उन्होंने देश से विदेशी सेनाओं के जाने और तालिबान के साथ लगातार झगड़ालू शांति वार्ता पर नज़र रखी. लेकिन तालिबान उनकी सरकार को हमेशा अमेरिका की कठपुतली ही कहता रहा.
एक दिन में काबुल में दाख़िल कैसे हुआ तालिबान
तालिबान रविवार की सुबह राजधानी काबुल के बाहरी छोर पर पहुंच चुका था. तालिबान ने कहा है कि वो शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब आधिकारिक तौर पर राजधानी के उन इलाकों पर अपना नियंत्रण बना रहे हैं जहां से सैन्यबल हट चुका है.
काबुल के कई इलाक़ों में चोरी और लूटपाट की ख़बरों के बाद तालिबान ने एक बयान जारी किया कि उसके लड़ाके अराजक तत्वों को रोकने के लिए शहर में दाख़िल हो रहे हैं.
बीते दस दिनों के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में कई प्रांतों की राजधानियों और अधिकांश बड़े शहरों पर नियंत्रण बनाते हुए तालिबान आखिरकार रविवार को काबुल पहुंच गया.
- अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी क्या बाइडन की सबसे बड़ी भूल साबित होगी?
- अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आने से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार में आम लोगों को मिलेगी हिस्सेदारीः तालिबान
इस बीच तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने बीबीसी से बात की जिसमें उन्होंने कहा कि "अफ़गानिस्तान में तालिबान किसी से बदला नहीं लेगा."
उन्होंने कहा, "हम अफ़ग़ानिस्तान के लोगों, ख़ासकर काबुल के लोगों को ये भरोसा देना चाहते हैं कि उनकी जान और संपत्ति सुरक्षित है. किसी से भी बदला नहीं लिया जाएगा."
शाहीन ने कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के सेवक हैं.
सुहैल शाहीन ने कहा कि तालिबान शासन की सरकार में अफ़ग़ानिस्तान के आम लोगों को भी हिस्सेदारी मिलेगी, यानी जो लोग तालिबान में शामिल नहीं हैं वो भी सरकार में शामिल होंगे.
काबुल पहुंचने के बाद तालिबान ने अपने लड़ाकों से राजधानी के एंट्री पॉइंट पर ही रुकने को कहा था. उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वो देश नहीं छोड़ें, देश में ही रहें. साथ ही ये स्पष्ट किया था जो लोग शहर छोड़कर जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दिया जाएगा.
राजधानी काबुल में मौजूद संवाददाताओं का कहना है कि एयरपोर्ट पर लंबी कतारें लगी हुई हैं और लोग भागना चाहते हैं. कुछ दुकानें और सरकारी दफ़्तरों को ख़ाली करा लिया गया है.
इसके बाद ही राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के देश छोड़ने की ख़बर आई और साथ ही तालिबान लड़ाके काबुल में भी घुस गए.
काबुल में घुसने के दौरान तालिबान ने अपने लड़ाकों को यह निर्देश भी दिया कि आम लोगों को परेशान न किया जाए और किसी के घर में दाख़िल न हुआ जाए.
- अफ़ग़ानिस्तान युद्ध अमेरिका को कितना महंगा पड़ा है?
- अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने रणनीति तो बदली है, लेकिन क्या चेहरा भी बदलेगा?
और क्या-क्या हुआ:
- अमेरिका काबुल दूतावास से 5,000 सुरक्षाबलों की सहायता से अपने लोगों को निकाल रहा है. लोगों को एयरपोर्ट पर सैन्य जहाज़ में चढ़ते देखा गया.
- राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सुरक्षाबलों के बाहर जाने के फ़ैसले का बचाव किया, कहा कि वो 'देश के दूसरे नागरिक संघर्ष में अमेरिकी मौजूदगी को' उचित नहीं ठहरा सकते हैं.
- रविवार की सुबह तालिबान लड़ाकों ने पूर्वी शहर जलालाबाद को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. इसका अर्थ यह है कि अब तालिबान पड़ोसी देश पाकिस्तान जाने वाले हर रास्ते को नियंत्रित करता है.
जलालाबाद में क्या हुआ था?
रविवार की सुबह आई रिपोर्ट में कहा गया था कि तालिबान ने नांगरहार प्रांत की राजधानी को बिना गोली चलाए क़ब्ज़े में ले लिया है.
रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को शहर में तैनात एक अफ़ग़ान कर्मचारी ने बताया, "जलालाबाद में कोई संघर्ष नहीं हुआ है क्योंकि गवर्नर ने तालिबान के आगे पहले आत्मसमर्पण कर दिया है."
"तालिबान को जाने के लिए रास्ता देना लोगों की ज़िंदगी बचाने का एकमात्र रास्ता था."
- अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी क्या बाइडन की सबसे बड़ी भूल साबित होगी?
- तालिबान का अफ़ग़ानिस्तान की प्रांतीय राजधानी पर कब्ज़ा कितनी बड़ी जीत है?
पत्रकार तारिक़ ग़ज़नीवाल ने कुछ तस्वीरें ट्वीट की थीं जिसमें देखा जा सकता है कि प्रांतीय गवर्नर तालिबान को कंट्रोल दे रहे हैं.
https://twitter.com/TGhazniwal/status/1426730960834469890
जलालाबाद को नियंत्रण में लेने का अर्थ है कि तालिबान ने पाकिस्तान को देश से जोड़ने वाले रास्ते को भी नियंत्रित कर लिया है.
दिन भर काबुल में क्या हुआ?
वॉल स्ट्रीट जर्नल के संवाददाता यरोसलाव त्रोफ़िमोव ने दोपहर बाद काबुल से बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को बताया कि छिटपुट गोलीबारी को सुना जा सकता है.
उन्होंने बताया कि लोग एटीएम से पैसे निकाल रहे हैं और डिप्लोमैटिक मिशन का बेस ग्रीन ज़ोन ख़ाली हो रहा है और देश से बाहर जाने वालीं उड़ानें पूरी तरह बुक हैं.
तालिबान की रणनीति का एक हिस्सा ऐसा लग रहा है कि लड़ाके पहले से ही शहरों के भीतर गुप्त रूप से मौजूद हैं.
त्रोफ़िमोव ने बताया, "तालिबान अपने हथियारबंद लड़ाकों को काबुल नहीं भेज रहा है क्योंकि वे पहले से ही शहर में मौजूद हैं. इसी तरह से हेरात शहर में हुआ था जहां पर एकाएक शहर के केंद्र में लड़ाई शुरू हो गई थी."
संघर्ष के कारण ढाई लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और कई लोगों ने राजधानी में शरण ली है.
तालिबान के नियंत्रण वाले इलाक़ों से भागकर आए कुछ लोगों का कहना है कि लड़ाके लोगों से मांग कर रहे हैं कि वे अपनी अविवाहित लड़कियों और महिलाओं को उन्हें शादी के लिए दे दें.
परवान से भागकर काबुल अपनी दो बहनों के साथ आईं 35 वर्षीय महिला मुज़दा कहती हैं कि उन्हें या तो अपनी ज़िंदगी ख़त्म करनी होगी या फिर तालिबान उनकी जबरन शादी कर देगा.
उन्होंने एएफ़पी समाचार एजेंसी से कहा, "मैं दिन और रात रो रही हूं."
- मोहम्मद इस्माइल ख़ान: अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को टक्कर देने वाला 'बूढ़ा शेर'
- क्या पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को मान्यता देने की जल्दी में है?
https://www.youtube.com/watch?v=MSZAHonKBBM
तालिबान के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों से भागकर आईं महिलाओं का कहना है कि उन्हें बुर्क़ा पहनने के लिए मजबूर किया जा रहा है. लड़ाके कथित तौर पर सामाजिक नियम तोड़ने के लिए लोगों को पीट भी रहे हैं.
17 वर्षीय एक लड़के अब्दुल्ला ने एएफ़पी समाचार एजेंसी से कहा कि तालिबान के नियंत्रण के बाद वो और उनका परिवार उत्तरी शहर कुंदुज़ से भागकर आए हैं और काबुल के एक पार्क में टेंट में सो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि उन्हें और दूसरे युवाओं को कुंदुज़ में रॉकेट से चलने वाले ग्रेनेड और दूसरे हथियारों को लड़ाकों के लिए उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
इससे पहले शनिवार को तालिबान ने सरकार के आख़िरी गढ़ मज़ार-ए-शरीफ़ को भी बिना लंबी लड़ाई के अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.
शनिवार को टीवी पर प्रसारित किए गए पहले से रिकॉर्ड भाषण में राष्ट्रपति ग़नी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता अफ़ग़ान सुरक्षाबलों को फिर से संगठित करना है ताकि लोगों को विनाश और विस्थापित होने से बचाया जा सके. तब इस तरह की अटकले भी लगाई गई थीं कि ग़नी अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर सकते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












Click it and Unblock the Notifications