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स्विटजरलैंड की जनता रविवार को तय करेगी गायों के सींग हों या नहीं

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बर्न। अगर आपको लगता है कि सिर्फ भारत या फिर नेपाल में ही गायों को पवित्र मानते हैं और इनकी पूजा होती तो आप गलत हैं। यूरोप में एक देश ऐसा भी है जहां पर भले ही गायों की पूजा नहीं की जाती है लेकिन उन्‍हें वह दर्जा दिया जाता है जिसकी वजह से लोग उनके शारीरिक कष्‍ट के बारे में सोच पा रहे हैं। रविवार को स्विस जनता इस बात पर वोटिंग करेगी कि गायों के सिर पर सींग होने चाहिए या फिर इन्‍हें हटा देना चाहिए। हालांकि जनमत संग्रह में बकरियों को भी शमिल किया गया है। यहां के एक किसान आरमिन कैपॉल की ओर से आठ वर्ष पहले एक मुहिम की शुरुआत की गई थी और अब हो सकता है कि उनकी यह मुहिम रंग ले आए।

67 वर्ष के कैपॉल बने प्रेरणा

67 वर्ष के कैपॉल बने प्रेरणा

67 वर्ष के कैपॉल एक किसान हैं। उन्‍होंने अकेले ही स्विट्जरलैंड में एक कैंपेन की शुरुआत साल 2010 में की थी। इस कैंपेन के तहत स्विस वोटर्स मतपत्र के जरिए इस बात के लिए वोट करेंगे कि अगर स्विस किसान को अपनी गायों और बकरियों के सींगों को नहीं हटाएंगे तो फिर उन्‍हें अतिरिक्‍त खर्च को वहन करने के लिए सरकार की तरफ से सब्सिडी दी जानी चाहिए। कैपॉल ने देश के कृषि विभाग को चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में उन्‍होंने सींग को हटाते समय गायों को होने वाली तकलीफ के बारे में बात की थी। जब अथॉरिटीज की तरफ से किसी तरह का कोई एक्‍शन नहीं लिया गया तो फिर उन्‍होंने साल 2014 में एक सिग्‍नेचर कैंपेन शुरू कर दिया।

कैपॉल ने इकट्ठा किए 10,000 सिग्‍नेचर

कैपॉल ने इकट्ठा किए 10,000 सिग्‍नेचर

इस कैंपेन में उन्‍होंने 100,000 सिग्‍नेचर इकट्ठा किए और इस देश में जनमत संग्रह के लिए इतने पर्याप्‍त होते हैं। कैपॉल को खुद भी यकीन नहीं हो पा रहा है कि उनका प्रयास इतना सफल हो सकता है। बर्न स्थित संसद के मीडिया सेंटर में हुई प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में उन्‍होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'मुझे भी नहीं मालूम था कि एक दिन मैं यहां पर बैठूंगा।' उन्‍होंने कहा कि वह सिर्फ गायों और बकरियों की आवाज बनना चाहते थे। बहुत से लोग स्विट्जरलैंड में मानने लगे हैं कि कैपॉल की वजह से ही आज यह पहल जानवरों के सम्‍मान से जुड़ गई है। एक अनुमान के मुताबिक स्विट्जरलैंड में 10 से 25 प्रतिशत गाय ही ऐसी बची हैं जिनके सिर पर सींग है।

किसानों को दी जाए सब्सिडी

किसानों को दी जाए सब्सिडी

हालांकि किसानों के लिए अपनी गायों को बिना सींग का करना एक महंगा सौदा साबित हो सकता है। सींग के साथ गायों के होने पर जगह ज्‍यादा लगती है और साथ ही किसानों को भी ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ती है। कैपॉल और उनकी साथियों ने जानवरों की सींग हटाने से रोकने के बजाय किसानों को सब्सिडी देने की मांग की है। इसके अलावा उन्‍होंने कहा कि किसानों को उसी पल ऐसे विकल्‍प दिए जाएं जिसके जरिए किसान फैसला कर सकें कि उन्‍हें गायों की सींग हटानी है या नहीं।

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English summary
Swiss are having a referendum about cow horns on this Sunday.
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