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भारत के दोनों दुश्मन तेजी से बना रहे न्यूक्लियर हथियार, भारत ने भी उठाया 'डेंजरस' कदम

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नई दिल्ली, जून 15: भारत के दोनों दुश्मन चीन और पाकिस्तान काफी तेजी से न्यूक्लियर हथियार बना रहे हैं, जिसको देखते हुए भारत भी न्यूक्लियर हथियार बनाने की रेस में शामिल हो चुका है। ये खुलासा किया है स्वीडिश थिंक टैंक ने। एक रिपोर्ट जारी कर बताया गया है कि एशिया के तीनों देश काफी तेजी से अपने-अपने न्यूक्लियर हथियारों का भंडार बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपने सैन्य हथियारों की आधुनिकीकरण के बीच में है, जबकि भारत और पाकिस्तान भी काफी तेजी से न्यूक्लियर हथियारों की रेस में शामिल हैं। (सारी तस्वीरें-फाइल)

न्यूक्लियर हथियारों की रेस

न्यूक्लियर हथियारों की रेस

स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानि SIPRI ईयर बुक 2021 के अनुसार, चीन अपने परमाणु हथियारों के विकास के सफर में आधुनिकीकरण और विस्तार के बीच में है, और भारत और पाकिस्तान भी अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहे हैं। सिपरी के एसोसिएट सीनियर फेलो हंस एम. क्रिस्टेंसन ने कहा कि ' पिछले कुछ सालों से परमाणु हथियारों के बनने की रफ्तार धीमी पड़ गई थी लेकिन एक बार फिर से वैश्विक सैन्य भंडार में परमाणु हथियारों की संख्या तेजी से बढ़ती हुई दिखाई दे रही है, जो एक चिंताजनक बात है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और रूस के बीच चले शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से वैश्विक परमाणु भंडार बढ़ने की दर में गिरावट आई थी, जिसमें एक बार फिर से तेजी आ गई है।'

परमाणु हथियारों की तादाद

परमाणु हथियारों की तादाद

सिपरी की वार्षिक बुक के मुताबिक भारत के पास 2021 की शुरुआत में अनुमानित 156 परमाणु हथियार थे, जबकि पिछले साल की शुरुआत में 150 थे, जबकि पाकिस्तान के पास 165 हथियार थे, जो 2020 में 160 था। वहीं, चीन के परमाणु भंडार में करीब पिछले साल करीब 320 परमाणु हथियार थे, जिसकी तादाद बढ़कर अब करीब 350 पहुंच चुकी है। सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक नौ परमाणु हथियार संपन्न राज्यों, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया के पास 2021 की शुरुआत में अनुमानित 13 हजार 80 परमाणु हथियार थे। रूस और अमेरिका के पास कुल मिलाकर 90% से ज्यादा परमाणु हथियार थे। सिपरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पूरी दुनिया में परमाणु हथियारों को तेजी से विस्तार दिया जा रहा है और काफी पैसा खर्च उन्हें आधुनिक किया जा रहा है।

आईआईएसएस रिपोर्ट

आईआईएसएस रिपोर्ट

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज यानि आईआईएसएस, लंदन की मई में प्रकाशित रिपोर्ट 'दक्षिण एशिया में परमाणु प्रतिरोध और स्थिरता: धारणाएं और वास्तविकताएं' जिसका शीर्षक है, में कहा गया है कि 'फरवरी-2019 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों ने भविष्य के संकट का गलत अनुमान लगाया है और दोनों देशों ने परमाणु हथियारों की तादाद बढ़ाना शुरू कर दिया है।' इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 'भारत और पाकिस्तान नई टेक्नोलॉजी और क्षमताओं की तलाश कर रहे हैं, और दोनों देश खतरनाक तरीके से एक दूसरे की सैन्य क्षमताओं का गलत तरह से आंकलन कर रहे हैं।

चीन का न्यूक्लियर प्रोग्राम

चीन का न्यूक्लियर प्रोग्राम

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन जिस तरह से अपने परमाणु भंडार को बढ़ा रहा है, वो भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। हांलांकि, बावजूद इसके न्यूक्लियर हथियारों पर नियंत्रण करना, परमाणु हथियारों के निर्माण को रोकना, भारत और पाकिस्तान के नेताओं के ही हाथ में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर हथियार बनाने की होड़ कम हो, इसके लिए दोनों देशों के बीच विश्वास भरा माहौल बनाना बेहद जरूरी है ।

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English summary
In 2021, India, Pakistan and China are developing nuclear reserves very rapidly, which is quite dangerous.
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