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इराक में श्रीलंका जैसे हालात, मुक्तदा अल-सदर के समर्थकों का 'हल्ला बोल', जानें पूरा मामला

प्रदर्शनकारियों ने शिया नेता अल-सदर की तस्वीरें भी हाथ में ले रखी थीं। पुलिस ने पहले सीमेंट की दीवारों को गिराने वाले प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

बगदाद, 30 जुलाई : इराकी प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर प्रभावशाली शिया नेता मुक्तदा अल-सदर के समर्थन में इराक की संसद पर धावा बोल दिया है। प्रदर्शनकारी ईरान समर्थित पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री के लिए पूर्व मंत्री और पूर्व प्रांतीय गवर्नर मोहम्मद शिया अल-सुदानी की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं (supporters of Shia leader Muqtada al-Sadr storm iraqi parliament for second time in a week)। बता दें कि, यह हफ्ते में दूसरी बार है जब मुक्तदा के समर्थकों ने संसद का उल्लघंन करते हुए विधायी निकाय पर दावा बोल दिया है। इस कारण प्रधानमंत्री को नामित करने के लिए बुलाए गए सत्र प्रभावित हुआ। इस वजह से नए पीएम को लेकर आज भी कोई फैसला नहीं हो सका।

 प्रदर्शनकारियों का 'हल्ला बोल'

प्रदर्शनकारियों का 'हल्ला बोल'

वहीं,कार्यवाहक प्रधान मंत्री मुस्तफा अल-काजिमी के मीडिया कार्यालय ने एक बयान जारी कर सुरक्षा अधिकारियों से राज्य संस्थानों की सुरक्षा की गारंटी देने का आह्वान किया। बगदाद से रिपोर्ट करते हुए अल जज़ीरा के रिपोर्टर ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को चोटें लग रही हैं, लेकिन वे कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं हैं। मुस्तफा अल-काजिमी ने प्रदर्शनकारियों से "तुरंत संसद छोड़ने" का आह्वान किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सुरक्षा बल "राज्य संस्थानों और विदेशी मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, और सुरक्षा और व्यवस्था को किसी भी तरह के नुकसान को रोकेंगे।'

प्रदर्शनकारी चोट के बावजूद बढ़ रहे आगे

प्रदर्शनकारी चोट के बावजूद बढ़ रहे आगे

प्रदर्शनकारियों की बढ़ती उग्रता पर लगाम लगाने और उन्हें तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले दागे और ध्वनि बम फेंके। इराक के प्रमुख शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर के समर्थक संसद भवन में प्रवेश करने से पहले बगदाद के सबसे सुरक्षित क्षेत्र 'ग्रीन जोन' की दीवार पर चढ़ गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियो ने भवन के आसपास बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की। गुस्साए भीड़ ने भवन की सुरक्षा में लगाए गए कंक्रीट के दीवारों को तोड़ने की कोशिश की। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने रस्सियों का इस्तेमाल कर बाउंड्री के उस पार संसद परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले दागे और ध्वनि बम फेंके।

संसद भवन पर कब्जा, श्रीलंका जैसे हालात

संसद भवन पर कब्जा, श्रीलंका जैसे हालात

बगदाद में बुधवार को आक्रोशित सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर कब्जा कर लिया था।रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर प्रदर्शनकारी इराकी शिया लीडर मुक्तदा अल सदर के समर्थक हैं। प्रदर्शनकारी ईरान समर्थित पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री के लिए पूर्व मंत्री और पूर्व प्रांतीय गवर्नर मोहम्मद शिया अल-सुदानी की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं।

ग्रीन जोन तोड़कर घुस गए प्रदर्शनकारी

ग्रीन जोन तोड़कर घुस गए प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को बगदाद के उच्च सुरक्षा वाले ग्रीन जोन, सरकारी भवनों और राजनयिक मिशनों के घर में प्रवेश किया। इसके बाद वे संसद भवन में घुस गए। हालांकि उस समय संसद में कोई भी सांसद मौजूद नहीं था। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक उस वक्त संसद भवन के अंदर सिर्फ सुरक्षाकर्मी मौजूद थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आसानी से अंदर जाने दिया।

प्रदर्शनकारियों ने शिया नेता अल-सदर की तस्वीरें भी ले रखी थी

प्रदर्शनकारियों ने शिया नेता अल-सदर की तस्वीरें भी ले रखी थी

प्रदर्शनकारियों ने शिया नेता अल-सदर की तस्वीरें भी हाथ में ले रखी थीं। पुलिस ने पहले सीमेंट की दीवारों को गिराने वाले प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।अल जजीरा के मुताबिक पुलिस मेन गेट पर भीड़ को रोकने के लिए तैनात हो गई लेकिन ग्रीन जोन के दो प्रवेश द्वारों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटने लगी, जिसके बाद उन्होंने पुलिस द्वारा लगाई गईं सीमेंट की दीवार को तोड़ दिया और "अल-सुदानी, आउट!" के नारे लगाए। ये प्रदर्शनकारी इराक के कई शहरों से आए थे।

जानें पूरा मामला

जानें पूरा मामला

मौलवी अल-सदर के गुट ने इराक के अक्टूबर 2021 के आम चुनाव में 73 सीटें जीती थीं, जिससे यह 329 सीटों वाली संसद में सबसे बड़ा गुट बन गया, लेकिन इराक का राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी बहुमत न जुटा पाने की वजह से मुक्तदा अल-सदर ने सरकार बनाने की बातचीत से खुद को बाहर कर लिया था। पिछले साल अक्टूबर में हुए आम चुनावों के बाद से, राजनीतिक दल प्रधानमंत्री पद के लिए एक नए नेता के चुनाव के संबंध में किसी भी समझौते पर पहुंचने में असमर्थ रहे हैं, इस प्रकार मध्य पूर्वी देश लंबे समय से एक नियमित प्रधानमंत्री के बिना है और वहां एक कार्यवाहक पीएम देश को चला रहे हैं।

(फोटो सौ. सोशल मीडिया)

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