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इस पड़ोसी देश में भारत के खिलाफ फूटा गुस्सा, भारतीय निर्माण को लेकर लोगों ने भारी नाराजगी

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नई दिल्ली/काठमांडू, जनवरी 15: उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा क्षेत्र में भारत सरकार के रोड बनाने के फैसले को लेकर नेपाल में भारी नाराजगी देखी जा रही है और नेपाल में विपक्ष के साथ साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल पार्टियों ने भारत से नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर नहीं करने के लिए कहा है।

लिपुलेख में सड़क निर्माण को लेकर विवाद

लिपुलेख में सड़क निर्माण को लेकर विवाद

नेपाल ने एक बार फिर से चीन के साथ ट्राई-जंक्शन के पास लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी क्षेत्र पर अपना दावा ठोका है और अपने दावे को सही ठहराने के लिए पहले एक नया राजनीतिक नक्शा जारी कर चुका है। हालांकि, अब तक नेपाल की गठबंधन सरकार सड़क के विस्तार पर पिछले महीने पीएम नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों पर चुप रही थी, लेकिन अब मुख्य सत्तारूढ़ दल में शामिल नेपाली कांग्रेस ने शुक्रवार को एक बयान में कहा है कि, भारत सरकार का सड़क विस्तार करने का प्रस्ताव आपत्तिजनक है और नेपाली कांग्रेस ने भारत सरकार से इस क्षेत्र से सैनिकों को तुरंत वापस बुलाने का भी आह्वान किया है।

नेपाली कांग्रेस ने जताई आपत्ति

नेपाली कांग्रेस ने जताई आपत्ति

नेपाल की कांग्रेस पार्टी की तरफ से बयान जारी करते हुए भारतीय निर्माण पर आपत्ति जताई गई है और कहा गया है कि, "नेपाली कांग्रेस स्पष्ट है कि लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी नेपाली क्षेत्र हैं और नेपाल को इस भूगोल का उपयोग करने का अधिकार होना चाहिए। कालापानी में तैनात भारतीय सैनिकों को वापस किया जाना चाहिए।" आपको बता दें कि, प्रधानमंत्री मोदी ने 30 दिसंबर को हल्द्वानी में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि, भारत ने टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑल वेदर रोड पर काम करने के अलावा लिपुलेख तक सड़क बनाने की भी योजना बनाई थी और "इसे आगे बढ़ाया जा रहा है"।

नेपाल के साथ खराब होते संबंध

नेपाल के साथ खराब होते संबंध

चीन के साथ विवाद के बीच चीन की सीमा रेखा के साथ लगते ट्राइ-जंक्शन के पास लिपुलेख दर्रे पर सड़क के निर्माण ने पिछले कुछ महीनों में भारत और नेपाल के बीच सबसे खराब राजनयिक संकटों में से एक को जन्म दिया, जबकि, भारत सरकार ने यह सुनिश्चित किया है, कि सड़क केवल पूर्व-मौजूदा मार्ग के मुताबिक ही बनेगी, ताकि कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा हो। वहीं, वर्तमान परियोजना के तहत, जैसा कि भारत सरकार ने पहले कहा था, कि तीर्थयात्रियों, स्थानीय लोगों और व्यापारियों की सुविधा के लिए उसी सड़क को रिपेयर किया गया है और उसे बहतर किय गया है। दूसरी तरफ नेपाल उत्तराखंड में लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र पर दावा करता है, जबकि यह क्षेत्र भारत के प्रशासनिक नियंत्रण में है और हमेशा से भारत के पास ही रहा है। नेपाल ने भी इस हिस्से पर पिछले 2 सालों से ही दावा करना शुरू किया है और सूत्र बताते हैं कि, इसके पीछे चीन है।

नेपाली पार्टियों का विरोध

नेपाली पार्टियों का विरोध

वहीं, नेपाल की सरकार में शामिल एक और पार्टी, सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) ने इसी हफ्ते अपने बयान में कहा था कि, नेपाल सरकार के परामर्श के बिना क्षेत्र में की गई कोई भी विकास की गतिविधि "पूरी तरह से अवैध है और यह हमारी क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता का एक प्रमुख उल्लंघन है''। वहीं, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झाला नाथ ने कहा है कि, "भारत सरकार अच्छी तरह से जानती है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के क्षेत्र नेपाल के संप्रभु क्षेत्र हैं और हम नेपाल सरकार से सीमा पर हमारे क्षेत्र की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने का अनुरोध करना चाहते हैं।" वहीं, खनाल के अनुसार, ये बयान उत्तराखंड में मोदी की उस टिप्पणी के जवाब में था जिसमें कहा गया था कि नेपाली क्षेत्र लिपुलेख में "अवैध रूप से बनाई जा रही" सड़क को और चौड़ा किया जा रहा है। वहीं, नेपाल की मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने भी भारत से काम को फौरन रोकने के लिए कहा है और भारत के निर्माण कार्य को नेपाल की संप्रुभता के खिलाफ बताया है।

भारत का विरोध

भारत का विरोध

नेपाल की विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल ने कहा है कि, भारत सरकार को फौरन सड़कों और अन्य संरचनाओं का निर्माण रोक दिया जाना चाहिए और इस मुद्दे को बातचीत के माध्यम से तुरंत हल किया जाना चाहिए और भारत सरकार को तब तक कोई ढांचा नहीं बनाना चाहिए, जब तक कि बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता''। वहीं, नेपाल की विपक्षी पार्टी ने सरकार से इस मुद्दे पर भारत के साथ तुरंत बातचीत शुरू करने और भारत से "सभी प्रकार की बदमाशी को रोकने और अतिक्रमित क्षेत्रों पर नेपाल के व्यावहारिक स्वामित्व को स्थापित करने के लिए उपयोगी पहल करने" के लिए कहने का भी आग्रह किया है।

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English summary
Anger has erupted in Nepal against the construction of a road in the Indian government's Lipulekh and Nepal's political parties have called the Indian government's road construction a violation of Nepal's sovereignty.
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