सूरज में विस्फोट के बाद उठा बड़ा भू-चुंबकीय तूफान, 24 घंटे के अंदर टकराएगा पृथ्वी से
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर: हमारे सौरमंडल में एक बड़ी घटना हुई है, जहां सूरज में कुछ विस्फोट हुआ। जिस वजह से अंतरिक्ष में एक जोरदार भू-चुंबकीय तूफान उठा है, जो पृथ्वी की ओर बढ़ रहा। उम्मीद जताई जा रही कि 30 अक्टूबर को ये हमारे ग्रह से टकरा सकता है। आमतौर पर भू-चुंबकीय तूफान हमारे पावर ग्रिड और मोबाइल नेटवर्क को नुकसान पहुंचाते हैं।

गुरुवार को हुआ था कोरोनल मास इजेक्शन
नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के तहत काम करने वाले स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने गुरुवार देर रात सूर्य से कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) के बाद शुक्रवार को जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म वॉच जारी किया, जो 30 अक्टूबर के लिए है। सीएमई के बाद तूफान को पृथ्वी में पहुंचने में दो दिन का वक्त लगता है, ऐसे में 30 और 31 अक्टूबर के लिए अलर्ट जारी हुआ है।

G-3 कैटेगरी का अलर्ट
मामले में एजेंसी ने कहा कि 30 अक्टूबर का अलर्ट G-3 कैटेगरी का है, जो काफी मजबूत माना जाता है, जबकि 31 अक्टूबर का अलर्ट G-2 कैटेगरी का है जो मध्यम श्रेणी है। वहीं spaceweather.com ने बताया कि 28 अक्टूबर को सनस्पॉट AR2887 में विस्फोट हुआ, जिस वजह से कोरोनल मास इजेक्शन (CME) सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है।

1,00,000 किमी लंबी प्लाज्मा तरंग
वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य पर हुए विस्फोट ने प्लाज्मा की एक विशाल सुनामी पैदा कर दी, जो लगभग 1,00,000 किमी लंबी प्लाज्मा तरंग के साथ पूरे सौरमंडल में फैल गई। इसके बाद ये सूर्य के वातावरण में 700 किलोमीटर प्रति सेकंड से अधिक तेजी से आगे बढ़ रही थी। इस भू-चुंबकीय से ज्यादा खतरा तो नहीं बताया जा रहा, लेकिन ये पावर ग्रिड और मोबाइल नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है।

भू-चुंबकीय तूफान क्या है?
नासा के मुताबिक भू-चुंबकीय तूफान पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर की एक बड़ी गड़बड़ी हैं। ये तब होती है, जब सौर हवाएं पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष वातावरण में ऊर्जा का एक बहुत अच्छा आदान-प्रदान कर रही हों। इन स्थितियों के परिणामस्वरूप होने वाले सबसे बड़े तूफान सौर कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) से जुड़े होते हैं। वहीं इन तूफानों के दौरान एक अरब टन या उससे अधिक प्लाज्मा, एम्बेडेड चुंबकीय क्षेत्र के साथ पृथ्वी पर आता है।












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