पाकिस्तान के लाहौर से फिर एक सामाजिक कार्यकर्ता गायब, दोस्तों ने सरकार से मांगी मदद

लाहौर। आतंकवाद को बढ़ावा देने का लगातार आरोप झेल रहे पाकिस्तान में इन दिनों सामाजिक कार्यकर्ता काफी दुखी और डरे हुए हैं, यहां लगातार सामाजिक कार्यकर्ताओं के गायब होने की खबरें सुर्खियां बन रही हैं, ताजा मसले में पाकिस्तान के लाहौर शहर से एक सामाजिक कार्यकर्ता, जिनका नाम राजा महमूद है, के लापता होने की खबर है। 'पाकिस्तान टूडे' की खबर के मुताबिक राजा यहां धार्मिक दलों द्वारा आयोजित एक बैठक में हिस्सा लेने आए थे , जिसका शीर्षक था, उग्रवाद को कैसे रोका जाए, इस बैठक का हिस्सा बनने के बाद से ही वो गायब हैं। उनके दोस्त और साथी राजा को खोज रहे हैं और इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपने दोस्त को खोजने का अभियान छेड़ा है।

पाकिस्तान के लाहौर से फिर एक सामाजिक कार्यकर्ता गायब, दोस्तों ने सरकार से मांगी मदद

उनकी एक मित्र अतिका शाहिद ने फेसबुक पर लिखा है कि हमारे दोस्त रजा खान, एक शांति कार्यकर्ता कल से गायब है। हम आखिरकार शनिवार शाम को चरमपंथ पर एक खुली चर्चा के लिए मिले, विशेष रूप से कम-कुंजी लोकी पर, धरना पर ध्यान केंद्रित किया। यह एक गर्म चर्चा भी थी। एक शांति प्रेमी, लेकिन एक महत्वपूर्ण विचारक, रजा वास्तव में एक विशेष व्यक्ति हैं।

आपको बता दें कि पाकिस्तान में मुखर आवाजों के गायब होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है, इसी साल यहां के चार ब्लॉगर्स और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के गायब होने की खबरों ने देश में भूचाल ला दिया था। इन गायब होने वालों में आईटी क्षेत्र में काम करने वाले और आतंकवाद विरोधी सिविल प्रोग्रेसिव अलायंस के मुखिया समर अब्बास भी थे, उनके साथी तालिब रजा ने इसकी जानकारी देते हुए बताया था कि हम प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के खिलाफ संघर्ष और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं और शायद ये बात कुछ लोगों को पच नहीं रही।

चार वामपंथी ब्लॉगर्स के गायब होने की खबरें

तो वहीं इसी साल के जनवरी महीने में चार वामपंथी ब्लॉगर्स के गायब होने की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद लोगों ने सरकार से न्याय की मांग की थी और यही नहीं गैर सरकारी संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस बारे में सरकार के रोल को भी कटघरे में खड़ा कर दिया था। अपने साथियों के गायब होने पर लोगों ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान में जो खुलकर हक की बातें करता है, उसकी आवाज को दबाने के लिए उसे गायब कर दिया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं के गायब होने के मसले पर संयुक्त राष्ट्र भी चिंता जता चुका है।

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