फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद की तस्वीर बनाने के बाद टीचर की हुई थी हत्या, 6 दोषी करार मगर क्यों नहीं मिली सजा?
फ्रांस की एक अदालत ने साल 2020 में इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी का सिर कलम करने की घटना के मामले में शुक्रवार को 6 किशोरों को दोषी ठहराया है। अक्टूबर 2020 में सैमुअल पैटी की एक फ्रांसीसी-मुस्लिम छात्र ने हत्या कर दी थी।
इसके बाद फ्रांसीसी पुलिस ने चेचन मूल के इस 18 साल के अब्दुल्लाख अंजोरोव नाम के शख्स को गोली मार दी थी जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। आरोपी छात्रों में से पांच पर आरोप लगाया गया था कि, उन्होंने पैटी के बारे में हमलावर को इशारा किया था। इसके बदले में बच्चों को 400 डॉलर देने के बात कही गई थी।

इस मामले में एक अन्य लड़की को भी दोषी ठहराया गया है। इस मामले पर बच्चों ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि पैटी को मार दिया जाएगा। इस हत्या ने देश को झकझोर कर रख दिया था।
दरअसल शिक्षणक सैमुअल पेटी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बच्चों को पढ़ाते हुए क्लास में पैगंबर मोहम्मद का व्यंग्यचित्र दिखाया था। इस घटना से फ्रांस में कट्टरपंथी नाराज हो गए थे।
इस हत्याकांड की पूरी दुनिया में निंदा हुई। तब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने इसे आतंकी हमला करार दिया था। भारत सहित अन्य देशों ने भी शिक्षक पर हुए आतंकी हमले की निंदा की थी। इस घटना के 3 साल बीतने के बाद अदालत ने 6 किशोरों को दोषी करार दिया गया है। लेकिन उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा।
सैमुअल पैटी की हत्या के समय सभी आरोपियों की उम्र 14-15 साल थी। फ्रांस की अदालत ने इन्हें 14 महीने से लेकर 2 साल तक का सस्पेंडिड सेंटेंस दिया है। ये कानून की ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें किसी अपराध के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को जेल की सजा नहीं दी जाती, लेकिन अगर वह व्यक्ति तय समय सीमा के दौरान कोई अन्य अपराध करता है तो उसे भविष्य में उस अपराध के लिए सजा दी जा सकती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उनमें किसी को भी जेल नहीं जाना होगा। हालांकि अगर वे तय सीमा के भीतर कोई अन्य अपराध करते हैं तो उन्हें सजा मिल सकती है। फिलहाल फ्रांस के मीडिया आउटलेट्स को नाबालिगों के संबंध में फ्रांसीसी कानूनों के कारण किशोरों की पहचान साझा करने से रोक दिया गया है।












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