वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में तैयार किया सिंथेटिक चूहा, धड़कता हुआ दिल और दिमाग किया विकसित

प्रयोगशाला में जिस भूर्ण का निर्माण किया जा रहा था, उसके पोषण की आपूर्ति के लिए भ्रूण की आपूर्ति के लिए चारों तरफ जर्दी थैली विकसित हुई थी और भ्रूण ने स्वयं पाचन तंत्र विकसित कर लिया।

वॉशिंगटन, अगस्त 26: विज्ञान की दुनिया में लगातार चमत्कार हो रहे हैं और अब वैज्ञानिक प्रयोगशाला में सिंथेटिक चूहा निर्माण करने के काफी करीब पहुंच गये हैं और अगर सबकुछ सही रहा, तो बहुत जल्द सिंथेटिक चूहा दुनिया के सामने होगा। जिस सिंथेटिक चूहे को प्रयोगशाला में तैयार किया जा रहा है, उसका ब्रेन और धड़कता हुआ दिल अब पूरी तरह से तैयार हो गया है, जिसे देखकर वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं, क्योंकि सबसे मुश्किल प्रक्रिया यही थी, जिसमें कामयाबी मिल गई है।

प्रयोगशाला में सिंथेटिक चूहे का निर्माण

प्रयोगशाला में सिंथेटिक चूहे का निर्माण

वैज्ञानिकों ने माउस स्टेम सेल को कृत्रिम भ्रूण में विकसित करने के पहले चरण में कामयाबी हासिल कर ली है और सिंथेटिक चूहे का दिल और ब्रेन तैयार कर लिया है, जो असली दिल और ब्रेन की तरह की काम कर रहा है। दिल भी असली दिल की ही तरह धड़क रहा है। लैब में जिस चूहे के भ्रूण को तैयार किया जा रहा है, उसे बिना किसी अंडे या बिना किसी शुक्राणु के तैयार किया जा रहा है। इस भ्रूण रो एक ऐसे उपकपण में इनक्यूबेट किया जा रहा है, जो छोटे कांच की शीशियों से भरे एक तेजी से घूमने वाले फेरिस व्हील की तरफ दिखता है, जिसमें चूहे का ये भ्रूण 8.5 दिनों तक जिंदा रहा, किसी चूहे के गर्भावस्था का लगभग आधा समय है।

बिना स्पर्म के चूहों को बनाने की कोशिश

बिना स्पर्म के चूहों को बनाने की कोशिश

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयोगशाला में जिस भूर्ण का निर्माण किया जा रहा था, उसके पोषण की आपूर्ति के लिए भ्रूण की आपूर्ति के लिए चारों तरफ जर्दी थैली विकसित हुई थी और भ्रूण ने स्वयं पाचन तंत्र विकसित कर लिया। तंत्रिका ट्यूब के अंदर चूहे के भ्रूण में उसका केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विकसित होने की भी शुरुआत होने लगी थी और उसके दिलों की धड़कन को साफ तौर पर सुना जा सकता है। वहीं, भ्रूण के मस्तिष्क, अग्रमस्तिष्क और मध्यमस्तिष्क का भी विकास होना शुरू हो गया। लैब में विकसित किए जा रहे इस भ्रूण के बारे में नेचर साइंस मैग्जीन में रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित किया गया है।

वैज्ञानिकों को बहुत बड़ी कामयाबी

वैज्ञानिकों को बहुत बड़ी कामयाबी

इस प्रोजेक्ट को लिखने वाले प्रमुख वैज्ञानिक मैग्डेलेना ज़र्निका-गोएट्ज़, जो स्टेम सेल बायोलॉजिस्ट हैं और यूनाइटेड किंगडम के कैम्ब्रीज यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं, उन्होंने कहा कि, "यह वर्षों से हमारे समुदाय का सपना रहा है और एक दशक के लिए हमारे काम का प्रमुख फोकस रहा है, और आखिरकार, हमने इसे पूरा कर लिया है।" इस नये रिसर्च ने 1 अगस्त को प्रकाशित और एक और रिसर्च रिपोर्ट के समान ही रिजल्ट दिए हैं, जिसका नेतृत्व इज़राइल में वेज़मैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में एक भ्रूण स्टेम सेल जीवविज्ञानी जैकब हन्ना ने किया था। अपने हाल के सेल अध्ययन में हैना की टीम ने 8.5 दिनों के लिए विभिन्न प्रारंभिक स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया, लेकिन सिंथेटिक माउस भ्रूण को कल्चर करने के लिए एक ही इनक्यूबेटर का इस्तेमाल किया। लाइव साइंस की पहले की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन भ्रूणों ने पाचन तंत्र, दिल की धड़कन और छोटे, झुर्रीदार दिमाग को भी अंततः मरने से पहले विकसित कर लिया गया था।

जर्निका-गोएट्ज का रिसर्च

जर्निका-गोएट्ज का रिसर्च

ज़र्निका-गोएट्ज की टीम ने जो प्रयोगशाला में सिंथेटिक चूहा बनाने की कोशिश की थी, उसमें तीन माउस स्टेम सेल के साथ एक साथ रिसर्च शुरू किया गया था। इस रिसर्च के दौरान एक प्रकार की स्टेम सेल ने भ्रूण को जन्म दिया, जबकि अन्य दो प्लेसेंटल ऊतकों और जर्दी थैली में रूपांतरित हो गए। पूरे प्रयोग के दौरान, वैज्ञानिकों ने देखा कि, कैसे ये तीन स्टेम सेल प्रकार परस्पर क्रिया करते हैं और रासायनिक संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं और कांच की शीशियों में एक-दूसरे के खिलाफ शारीरिक रूप से बंट जाते हैं। इस तरह के आदान-प्रदान का अध्ययन इस बात का संकेत दे सकता है कि, भ्रूण के विकास के शुरुआती चरण कैसे सामने आते हैं और जब चीजें गड़बड़ा जाती हैं तो क्या होता है।

इंसानी जीवन के लिए है रहस्यमयी

इंसानी जीवन के लिए है रहस्यमयी

ज़र्निका-गोएट्ज़ ने कहा कि, "मानव जीवन की यह अवधि इतनी रहस्यमय है, इसलिए यह देखने की कोशिश की गई, कि यह कैसे बनता है। इन स्टेम कोशिकाओं तक पहुंच प्राप्त करने के लिए, यह समझने के लिए कि इतने सारे गर्भधारण क्यों विफल हो जाते हैं और हम इसे होने से कैसे रोक सकते हैं, इसपर रिसर्च किया गया है और ये काफी खास है।" ज़र्निका-गोएट्ज़ ने कहा कि, "हमने उस समय विभिन्न प्रकार के स्टेम सेल के बीच होने वाले संवाद को देखा और हमने देखा कि यह कैसे होता है और यह कैसे गलत हो सकता है।" हालांकि, दोनों प्रयोगों में, स्टेम कोशिकाओं के बहुत कम अनुपात ने वास्तव में भ्रूण को जन्म दिया, हालांकि, वैज्ञानिकों को ये पता चल गया, कि इसमें कैसे सुधार किया जा सकता है।

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