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सऊदी अरब और UAE में काफी तेज हुआ तनाव, फ्लाइट सेवा और OPEC+ की बैठक रद्द

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रियाद, जुलाई 06: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच काफी मजबूत रिश्ता रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। ये तनाव इतना बढ़ गया है कि सऊदी अरब ने अपने देश में यूएई के लोगों की एंट्री बंद कर दी है तो यूएई ने सऊदी अरब से आने वाली फ्लाइटों पर अस्थाई पाबंदी लगा दी है। दोनों देशों की बीच मचे इस बवाल की वजह तेल है और ओपेक प्लस देशों की बैठक भी रद्द कर दी गई है। ओपेक प्लस की बैठक सोमवार को रखी गई थी, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़े विवाद के बाद इस बैठक को भी रद्द कर दिया गया है।

ओपेक प्लस की बैठक रद्द

ओपेक प्लस की बैठक रद्द

ओपेक + के मंत्रियों ने पिछले सप्ताह टकराव के बाद सोमवार को तेल उत्पादन को लेकर होने वाली बैठक को रद्द कर दिया है। ओपेक प्लस की बैठ को रद्द करने का फैसला तब लिया गया, जब संयुक्त अरब अमीरात ने कच्चे तेल के प्रोडक्शन को तेज करने पर लगाए गये ओपेक प्लस के प्रतिबंध को और आठ महीने तक बढ़ाने के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। जिसका मतलब ये हुआ कि तेल प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कोई फैसला नहीं किया गया है। वहीं, कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देशों का संगठन, जिसे ओपेक कहा जाता है, उसकी अगली बैठक कब होगी, इसको लेकर भी कोई फैसला नहीं किया गया। जबकि, सोमवार को होने वाली बैठक पर भारत समेत दुनियाभर की नजर थी, क्योंकि, कच्चे तेल का उत्पादन कम होने से दुनियाभर में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में रिकॉर्ड इजाफा हो हो रहा है।

सऊदी-यूएई में आश्चर्यजनक तनाव

सऊदी-यूएई में आश्चर्यजनक तनाव

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव का पैदा होना अपने आप में बेहद आश्चर्यजनक बात है, लेकिन कच्चे तेल प्रोडक्शन के प्रोडक्शन को बढ़ाने को लेकर दोनों देश एक दूसरे से भिड़ गये हैं। ओपेक प्लस तेल के प्रोडक्शन पर नियंत्रण चाहता है, जबकि यूएई को इससे एतराज है। सऊदी अरब ने ओपेक को तेल प्रोडक्शन में हर दिन 2 मिलियन बैरल बढ़ाने को मंजूरी दे दी है, लेकिन वो सिर्फ अगस्त 2021 से दिसंबर 2021 के बीच है, और फिर अगले साल यानि दिसंबर 2022 तक तेल प्रोडक्शन पर नियंत्रण जारी रहेगा। लेकिन, यूएई ने इस प्लान से एतराज जताया है और इस प्लान से कदम पीछे खींच लिए हैं। यूएई रविवार को यह कहते हुए पीछे हट गया कि अप्रैल 2022 की शुरुआती समय सीमा से परे उत्पादन में कटौती "यूएई के लिए अनुचित" होगी।

यूएई को किस बात से है आपत्ति?

यूएई को किस बात से है आपत्ति?

दरअसल, यूएई का कहना है कि बाजार में कच्चे तेल की डिमांड काफी ज्यादा है, लिहाजा ओपेक को फौरन कच्चे तेल का प्रोडक्शन बढ़ाने की मंजूरी देना चाहिए। यूएई का कहना है कि पिछले साल ज्यादातर देशों में कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ था, लिहाजा तेल की डिमांड काफी कम हो गई थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और पेट्रोलियम पदार्थों की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ चुकी है, लिहाजा तेल का उत्पादन बढना चाहिए। आपको बता दें कि भारत जैसे देशों पर ओपेक के फैसले का बहुत बुरा असर पड़ा है और इस वक्त भारत में जो पेट्रोल और डीजल की कीमत में जो इजाफा आप देख रहे हैं, उसके पीछे ओपेक का तेल प्रोडक्शन कम करना ही है। जिसको लेकर सऊदी अरब और भारत के बीच भी तनाव है। भारतीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्न प्रधान कई बार सऊदी अरब से तेल प्रोडक्शन बढ़ाने की अपील कर चुके हैं, लेकिन सऊदी अरब की तरफ से इनकार कर दिया गया।

तेल उत्पादन में कटौती क्यों हो रहा है?

तेल उत्पादन में कटौती क्यों हो रहा है?

दरअसल, पिछले साल जब दुनिया के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन लगा हुआ था, तब अचानक तेल की कीमतें काफी ज्यादा गिर गई थी और फिर तेल की घटती कीमत पर रोक लगाने के लिए ओपेक ने कच्चे तेल के प्रोडक्शन को बढ़ाने पर रोक लगा दी थी और अब ओपेक का मानना है कि अगर बहुत जल्द तेल प्रोडक्शन को फिर से बढ़ा दिया गया तो फिर तेल की कीमत को नियंत्रण में लाना काफी मुश्किल हो जाएगा। शुक्रवार को ओपेक के 13 सदस्य देशों और ओपेक प्लस के 23 सदस्य देशों के बीच बैठक भी हुई थी, लेकिन तेल प्रोडक्शन पर समझौता होने से बैठक बेनतीजा रही थी। ओपेक प्लस समझौते के मुताबिक यूएई को अपना तेल प्रोडक्शन 18 प्रतिशत तक कम करना है, जबकि सऊदी अरब को सिर्फ 5 प्रतिशत अपना तेल प्रोडक्शन कम करना है। लिहाजा, यूएई के लिए ये समझौता काफी भारी पड़ रहा है और चूंकी ओपेक पर सऊदी अरब का प्रभुत्व है, लिहाजा यूएई, सऊदी अरब से नाराज बताया जा रहा है। माना जा रहा था कि ओपेक की बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच निगोसिएशन हो सकता था, लेकिन बैठक रद्द होने के बाद समझौते की संभावना और कम हो गया है।

यूएई की तरफ से क्या कहा गया ?

यूएई की तरफ से क्या कहा गया ?

रविवार को सीएनबीसी से बात करते हुए यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरूई ने कहा कि उनके देश ने "सबसे अधिक बलिदान दिया है, जिससे हमारे उत्पादन का एक तिहाई, दो साल के लिए बेकार हो गया है"। उन्होंने कहा कि "हम समान शर्तों के तहत एक नया समझौता नहीं कर सकते हैं, जबकि हमारे पास उस पर बातचीत करने का एक संप्रभु अधिकार है"। लेकिन सऊदी अरब का कहना है कि उसने उत्पादन में सबसे ज्यादा कटौती की है, क्योंकि अभी जो महामारी का दौर चल रहा है, उसमें हमें सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि अभी भी ज्यादातर बाजार बंद हैं औ आर्थिक सुधार की रफ्तार भी कमजोर है। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री ने परोक्ष तौर पर यूएई पर निशाना साधते हुए कहा कि ''समझौते के लिए तर्कसंगत'' होना चाहिए। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान ने कहा कि "पिछले 14 महीनों में बड़े प्रयास किए गए हैं, जो शानदार परिणाम प्रदान करते हैं और उन उपलब्धियों को नहीं बनाए रखना शर्म की बात होगी, कुछ समझौता और कुछ तर्कसंगतता से ही हम बच सकते हैं''

ओपेक प्लस के साथ खड़ा हुआ इराक

ओपेक प्लस के साथ खड़ा हुआ इराक

सऊदी अरब और यूएई के बीच काफी गहरा चुके मतभेद के बीच इराक ने दिसंबर 2022 तक उत्पादन प्रतिबंधों पर समझौते का विस्तार करने के लिए ओपेक प्लस के प्रस्ताव का भी समर्थन किया, जिससे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर रहने की उम्मीद है। यानि, इराक ने उम्मीद के मुताबिक सऊदी अरब का साथ दिया है, जो यूएई के लिए एक झटका है। वहीं, अब यह देखा जाना बाकी है कि क्या यूएई हमेशा की तरफ सऊदी अरब से मिले निर्दोशों का पालन करने का अपनी पारंपरिक भूमिका को जारी रखेगा या फिर वह एक अधिक स्वतंत्र नीति को आगे बढ़ाने का फैसला करेगा और अपने फैसले में सऊदी अरब का प्रभाव पूरी तरह से खत्म कर देगा।

अपने-अपने फायदे पर नजर

अपने-अपने फायदे पर नजर

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पिछले कई सालों से कई मुद्दों पर अलग अलग राय दिखाने लगे हैं और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों में भी पिछले कुछ सालों में तेजी से बदलाव आया है। यूएई शुरू में यमन में ईरान-गठबंधन हौथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी के नेतृत्व वाले युद्ध में शामिल हुआ था, लेकिन 2019 में यूएई ने अपने ज्यादातर सैनिकों को वापस बुला लिया था। बहरीन और मिस्र के साथ, यूएई और सऊदी अरब ने 2017 में पड़ोसी देश कतर का बहिष्कार कर दिया था, लेकिन जनवरी में सऊदी अरब ने अचानक बहिष्कार का फैसला खत्म करने के लिए समझौता कर ली और खाड़ी देशों के विश्लेषकों का कहना है कि अब यूएई भी झुकने के लिए तैयार होता नहीं दिख रहा है। वहीं, यूएई ने सऊदी अरब से इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य बनाने का आग्रह किया था, जिसे सऊदी अरब ने नहीं माना। जबकि, पिछले हफ्ते पहली बार इजरायल के विदेश मंत्री ने यूएई का दौरा किया था।

सऊदी अरब-यूएई में किन मुद्दों पर विवाद

सऊदी अरब-यूएई में किन मुद्दों पर विवाद

खाड़ी देशों के दो बेहद अहम सहयोगी रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात कोरोना वायरस महामारी को लेकर लगाए गये प्रतिबंधों को लेकर अभी एक दूसरे से असहमत हैं। रविवार को सऊदी अरब ने अत्यधिक संक्रामक डेल्टा कोरोनावायरस वेरिएंट से बचने के लिए इथियोपिया और वियतनाम के साथ यूएई पर भी प्रतिबंध का ऐलान कर दिया, जो काफी ज्यादा आश्चर्यजनक था। सोमवार को सऊदी अरब ने दूसरे खाड़ी देशों के साथ अपने आयात नियमों को लेकर संशोधन कर दिया है, जिसमें इजरायाली सामानों को फ्री ट्रेड से बाहर कर दिया गया। जो डायरेक्ट तौर पर यूएई के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यूएई ने इजरायल के साथ कई व्यापारिक और सामरिक करार किए हैं। आपको बता दें कि व्यापार का 'फ्री जोन' यूएई की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसके तहत विदेशी कंपनिया यूएई में बेहद आसान शर्तों पर व्यापार कर सकती हैं और यूएई में काम करते हुए विदेशी कंपनियों को 100 फीसदी हिस्सेदारी रखने का भी अधिकार प्राप्त है।

इजरायल को लेकर मतभेद ?

इजरायल को लेकर मतभेद ?

डिक्री के अनुसार इजरायल में निर्मित या उत्पादित या इजरायल के निवेशकों द्वारा पूरी तरह या आंशिक रूप से स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा निर्मित सामानों को लेकर सऊदी अरब द्वारा संशोधित किए गये नियमों को लेकर भी यूएई काफी नाराज हो गया है। दरअसल, अरब बायकॉट एग्रीमेंट के तहत तमाम इजरायली कंपनियों को लेकर लिस्ट है, जिसका बहिष्कार किया जाता रहा है, लेकिन यूएई और इजरायल के बीच व्यापार संबंध बहाल होने के बाद सऊदी अरब का नया कदम यूएई के व्यापार के लिए नुकसानदेह साबित होगा। लिहाजा, इजरायल को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद काफी बढ़ गया है।

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English summary
The dispute between Saudi Arabia and the United Arab Emirates has increased significantly, due to which flight services between the two countries and OPEC Plus meetings have also been canceled.
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