इजराइल के सपोर्ट में आए सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देश, तेल अवीव के खिलाफ इस प्रस्ताव को नहीं होने दिया पास
गाजा पर इजराइली हमले के विरोध में रियाद में शनिवार को एक बड़े सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इस आयोजन में मुस्लिम देशों ने इजराइल के जवाबी हमले की भी निंदा की और शीघ्र युद्धविराम का आह्वान किया।
इस सम्मेलन के दौरान ईरान सहित कई मुस्लिम देशों ने फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के लिए समर्थन व्यक्त करते हुए, इस्लामिक देशों से तेल अवीव से सभी संबंधों को खत्म करने की मांग की थी।

लेकिन अब इस सम्मेलन को लेकर ऐसी खबर आ रही है कि सऊदी अरब ने इजराइल के साथ सभी तरह के संबंधों को खत्म करने को लेकर पेश किए गए एक प्रस्ताव को पास होने से रोक दिया है।
इस सम्मेलन के जरिए कुछ मुस्लिम देशों ने इजराइल को अलग-थलग करने की कोशिश की थी। लेकिन जहां बाकी देश इस प्रस्ताव के साथ में थे तो वहीं सऊदी अरब सहित कुछ मुस्लिम देश अप्रत्यक्ष तौर पर इसके खिलाफ हो गए।
मीडिया रिपोर्ट में ऐसा दावा किया जा रहा है कि सऊदी अरब के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात समेत 7 मुस्लिम देश इस प्रस्ताव के विरोध में खड़े हो गए जिसके बाद इजराइल के खिलाफ संपूर्ण बहिष्कार का प्रस्ताव पास नहीं हो पाया है।
प्रस्ताव में कहा गया कि इजराइल के साथ इस्लामिक देश सभी तरह के राजनयिक और आर्थिक संबंध खत्म कर लें और इजरायली उड़ानों को अरब हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल न करने दें।
द टाइम्स ऑफ इजरायल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में कहा गया कि तेल उत्पादक मुस्लिम देश गाजा में युद्धविराम के लिए इजरायल को धमकी दें कि अगर वो युद्धविराम नहीं करता तो उसे तेल की आपूर्ति रोक दी जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्ताव को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन, मिस्र, बहरीन, सूडान, मोरक्को, मॉरिटानिया और जिबूती ने अस्वीकार कर दिया।
चैनल 12 की एक रिपोर्ट के मुताबिक रियाद में हुए इस आपातकालीन सम्मेलन में मौजूद अधिकांश देशों ने इजरायल के खिलाफ 5 उपायों को लागू करने की मांग की। इन मांगों के तहत मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस से सैन्य उपकरणों को इजराइल ट्रांसफर को रोकने की मांग, इजराइल के साथ सभी राजनयिक और आर्थिक संपर्क खत्म करने, इजराइल की तरफ से अमेरिका को तेल की बिक्री में कटौती, खाड़ी के हवाई क्षेत्र में इजरायल को ब्लॉक करना और उस पर युद्धविराम के लिए दबाव डालने के लिए अमेरिका, यूरोप और रूस में एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने की मांग थी।
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