रूसी संसद ने राष्ट्रपति पुतिन को देश के बाहर सेना का इस्तेमाल करने की इजाजत दी
मास्को, 22 फरवरी: रूस द्वारा पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादियों को मान्यता दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच समझौते की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है। इसी बीच मंगलवार को रूसी संसद के उच्च सदन ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को देश के बाहर बल प्रयोग करने की अनुमति दे दी है। जिसमें सैन्य बलों को यूक्रेन भेजने की बात कही गई थी। इसके बाद अब रूस यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र में अपनी सैन्य टुकड़ी को भेज सकता है।

यूक्रेन में अलगाववादियों का समर्थन करने के लिए देश के बाहर रूसी सेना का उपयोग करने की अनुमति देने के लिए मतदान हुआ। इसमें कुल 153 रूसी सीनेटरों ने इस फैसले का समर्थन किया, जिसमें किसी ने भी इस प्रस्ताव के खिलाफ में वोट नहीं दिया। जिसके बाद रूसी फेडरेशन काउंसिल ने मंगलवार को डॉनबास में सेना के इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी। संसद की मंजूरी के बाद रूस के लिए यूक्रेन पर व्यापक आक्रमण का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति पुतिन ने इस संबंध में संसद के ऊपरी सदन को एक पत्र लिखा था।
इस मंजूरी के बाद पुतिन ने कहा कि, मिंस्क समझौता अब नहीं रहा है। तनाव खत्म करने का एक ही तरीक़ा है। यूक्रेन नेटो की सदस्यता का ख़याल छोड़ दे और न्यूट्रल बना रहे। जब मीडिया ने पुतिन से ये सवाल किया कि, रूसी सेना यूक्रेन के कितना अंदर तक जाएगी? तो राष्ट्रपति पुतिन ने इस सवाल के जवाब में कहा कि, मैंने ये नहीं कहा कि विदेशी धरती पर सेना के इस्तेमाल की इजाज़त मिल जाने के तुरंत बाद सेना कूच कर जाएगी। ये अभी भविष्यवाणी कर पाना नामुमकिन है। सब कुछ हालात पर निर्भर करेगा।
इससे पहले पश्चिमी देशों के नेताओं ने कहा था कि रूस के सैनिक यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में पहुंच गए हैं। वहीं, अमेरिका ने रूस के इस कदम को आक्रमण बताया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार देर रात पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादी क्षेत्रों दोनेस्क और लुहांस्क को स्वतंत्र घोषित कर वहां "शांति स्थापित" करने के लिए अपनी सेना भेज दी। पुतिन के इस कदम पर विश्वव्यापी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।












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