अफगानिस्तान सीमा पर भारी फोर्स और टैंकों के साथ पहुंचा रूस, क्या तालिबान पर करेगा आक्रमण?
रूस ने विशालकाय आर्मी और तोप को अफगानिस्तान की सीमा पर भेज दिया है, क्या रूस तालिबान पर हमला करने वाला है?
मॉस्को, जुलाई 20: एक तरफ अफगानिस्तान में लगातार तालिबान पांव पसार रहा है तो दूसरी तरफ रूस अपनी विशाल फौज के साथ अफगानिस्तान की सीमा पर आ पहुंचा है। राजधानी काबुल में आज राष्ट्रपति भवन पर रॉकेट हमला करने वाले तालिबान के खिलाफ 6 देशों ने एक ग्रुप का निर्माण किया है, जिसे अमेरिका लीड कर रहा है। हालांकि, इस ग्रुप का हिस्सा रूस तो नहीं है, लेकिन रूस का दोस्त देश इस ग्रुप में शामिल है। लिहाजा माना जा रहा है कि अपने दोस्त की मदद के लिए रूस ने विशाल फौज को भारी गोला-बारूद और टैंकों को भेजा है।

अफगान सीमा पर विध्वंसक अभ्यास
रूसी मीडिया के मुताबिक रूस की आर्मी अफगानिस्तान सीमा पर युद्धाभ्यास के लिए पहुंची है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी युद्धाभ्यास की घोषणा अचानक नहीं होती है और किसी भी युद्धाभ्यास में इतने ज्यादा सैनिक हिस्सा लेने के लिए नहीं पहुंचते हैं। रूसी मीडिया के मुताबिक अगले महीने से रूसी सैनिक ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ अफगानिस्तान सीमा पर युद्धाभ्यास किया है। रूसी सैनिकों का अफगानिस्तान सीमा पर युद्धाभ्यास करना किसी को पच नहीं पा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी फौज और नाटो की सेना के अफगानिस्तान से बाहर निकलने के बाद तालिबान लगातार हिंसा फैला रहा है।

पड़ोसी देशों में टेंशन
दरअसल, तालिबान ने अफगानिस्तान में काफी ज्यादा हिंसा फैला रखी है, जिससे अफगानिस्तान के पड़ोसी देश काफी ज्यादा सतर्क हो गये हैं और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वहीं, तालिबान के डर से हजारों अफगान सैनिक भागकर ताजिकिस्तान पहुंचे हैं, वहीं माना जा रहा है कि अफगान समस्या बढ़ने के साथ ही रिफ्यूजी संकट में और इजाफा होगा, दूसरी तरफ तालिबान ने ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर स्थापित चौकियों पर भी कब्जा जमा लिया है।

रूस ने क्या कहा ?
वहीं, रूसी रक्षा मंत्रालयन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि रूसी सैनिक 5 अगस्त से 10 अगस्त तक ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ अफगानिस्तान की सीमा के पास हार्ब-मैदान में युद्दाभ्यास करेंगे। जहां, तालिबान ने अफगानिस्तान की सैनिकों की सरेंडर करने के बाद भी हत्या कर दी थी। रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि "ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ रूस की 201वें सैन्य अड्डे से रूसी टैंक, तोप और भारी संख्या में सैनिकों को अफगान सीमा पर भेजा गया है। रूसी टैंक करीब 200 किलोमीटर के हिस्से में फैले हुए हैं और सैनिक अफगानिस्तान की पूरी सीमा के साथ ही सीमा के पास स्थिति हर्ब-मैडन सैन्य प्रशिक्षण मैदान में सैन्य अभ्यास करेंगे।''

रूस-तालिबान में क्या चल रहा है?
एक तरफ रूस ने अपनी विशाल सेना को भारी विध्वंसक हथियारों के साथ अफगानिस्तान सीमा पर भेज दिया है, वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्तान में शांति प्रयासों में भी शामिल है। इसके साथ ही तालिबान के नेता को मॉस्को आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की इजाजत भी रूस देता है, लिहाजा एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस किसी और मंजिल को साधने की फिराक में है। वहीं, रूस ने पिछले महीने कहा था कि अफगानिस्तान में अमेरिका का मिशन पूरी तरह से नाकामयाब रहा था और अफगानिस्तान की बिगड़ती स्थिति के लिए अमेरिकी सेना का युद्धग्रस्त देश से बाहर निकलना था।

अमेरिका को मदद का ऑफर
वहीं, दो दिन पहले एक खुफिया रिपोर्ट में पता तला है कि रूस के राष्ट्रपति ने अमेरिका के सामने तालिबान से निपटने के लिए सैन्य मदद का प्रस्ताव रखा था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए रूस काफी टेंशन में है। रक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि अफगानिस्तान में बिगड़ती स्थिति का फायदा उठाकर कई आतंकी संगठन रूस तक पहुंच सकते हैं और रूस के काकेश और चेचन्या में स्थिति खराब कर सकते हैं, लिहाजा रूस किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता है। वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स ने ये भी कहा है कि रूसी सैनिक भले ही अफगानिस्तान के अंदर नहीं जाएं, लेकिन ड्रोन हमले के जरिए तालिबान को काफी नुकसान पहुंचाया जा सकता है और इस काम में रूसी सैनिक अमेरिका से भी ज्यादा माहिर माने जाते हैं।












Click it and Unblock the Notifications