रुपये की वजह से S-400 मिसाइल सिस्टम की सप्लाई में देरी.. रूसी राजदूत का बड़ा बयान, सही से नहीं हो रहा काम

Russia-India News: रुपये की वजह से रूस ने अभी तक भारत को कुछ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सप्लाई नहीं की है। भारत के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से, भारत में रूस के दूत ने सोमवार को कहा है, कि भुगतान की समस्याएं व्यापार में बाधा डाल रही हैं।

नई दिल्ली में रूसी दूत डेनिस अलीपोव ने कहा, कि भारत के साथ रुपये में होने वाले कारोबार में कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं और इस बाधा को दूर करने के लिए बैंकों और निर्यातकों को "अतिरिक्त प्रयासों" की आवश्यकता है।

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भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा, कि वोस्ट्रो ट्रेड सेटलमेंट मैकेनिज्म (रुपया भुगतान) ठीक से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, "स्थितियों का पता लगाने के लिए कंपनियों और बैंकों को कुछ अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है।"

हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि "अतिरिक्त प्रयासों" से उनका क्या मतलब है।

MCCI द्वारा आयोजित इंटरैक्टिव सत्र के मौके पर एक सवाल के जवाब में, उन्होंने इस मुद्दे को हल करने के लिए भारतीय बैंकों और निर्यातकों से अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया, कि भुगतान पद्धति को हल करने के लिए बहुत अधिक सुधार की आवश्यकता होगी, अलीपोव ने कहा कि बैंक सहयोग करने को तैयार हैं।

एस-400 डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी में देरी

आपको बता दें, कि भारत ने रूस के साथ एडवांस लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 के रक्षा सौदे पर साइन किया हुआ है और अभी तक रूस ने कई मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी तो कर दी है, लेकिन कई मिसाइलों की डिलीवरी में काफी देरी हो रही है।

जिसको लेकर रूसी दूत अलीपोव ने माना, कि मिसाइल डिफेंस सिस्टम में देरी हो रही है। लेकिन, उन्होंने कहा, कि नये कार्यक्रमों के तहत मिसाइल सिस्टम्स की आपूर्ति जारी है।

आपको बता दें, कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूसी बैंकों को स्विफ्ट बैंकिंग नेटवर्क से प्रतिबंधित कर दिया गया है, लिहाजा अब कोई भी देश डायरेक्ट रूस को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा, रूस ने अब डॉलर्स में भुगतान लेना बंद कर दिया है और वो अब सिर्फ रूसी करेंसी या फिर चीनी करेंसी ही स्वीकार कर रहा है, लेकिन भारत ने चीनी करेंसी में कारोबार करने से साफ मना कर रखा है, लिहाजा रूस, भारत के साथ भारतीय करेंसी रुपये में कारोबार करता है।

लेकिन, रूस के सामने दिक्कत ये है, कि रूस के पस इतनी ज्यादा मात्रा में भारतीय करेंसी जमा हो गई है, कि वो उसे खर्च नहीं कर पा रहा है।

इन चुनौतियों के बावजूद, अलीपोव आशावादी रूख अपना रहे हैं और उन्होंने भुगतान तंत्र के सुव्यवस्थित होने के बाद व्यापार में उछाल की संभावना जताई है। इसके साथ ही, रूसी राजनयिक ने एमएसएमई क्षेत्र में अधिक सहयोग में रुचि व्यक्त की। आपको बता दें, कि रूस का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल मंगलवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय निवेश शिखर सम्मेलन बीजीबीएस के लिए पश्चिम बंगाल जा रहा है।

ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, रसद, शिक्षा, रेलवे और होटल सेक्टर जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। आपको बता दें, कि वित्त वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 49 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे रूस, भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार बन गया। हालांकि, यूक्रेन युद्ध से पहले ऐसी स्थिति नहीं थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने सबसे ज्यादा कच्चा तेल रूस से खरीदना शुरू कर दिया, लिहाजा व्यापार में भारी उछाल आ गया है।

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