रूस-यूक्रेन युद्ध: पारले प्रोडक्ट की कीमतों में भारी उछाल की आशंका ? जानिए कंपनी ने क्या कहा
मुंबई, 25 फरवरी: रूस-यूक्रेन युद्ध के जिन प्रभावों की आशंका थी, वह सच साबित होने लगी है। इसकी मार कीमतों पर पड़ सकती है। दुनियाभर में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। अगर देश की बात करें तो कच्चे माल की कीमतों में इजाफे से फूड प्रोडक्ट के दाम बढ़ने के आसार नजर आने लगे हैं। बिस्कुट जैसे फूड प्रोडक्ट बनाने वाली बड़ी कंपनी पारले के बड़े अधिकारी ने बताया है कि बाजार पर किस तरह का दबाव बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में उनके प्रोडक्ट की कीमतों पर क्या असर पड़ने की आशंका है।

गेहूं की कीमतों में भी उछाल आ सकता है- पारले
पारले पोडक्ट्स ने शुक्रवार को कहा है कि उसका अनुमान है कि गेहूं की कीमतों में उछाल आ सकता है, क्योंकि रूस और यूक्रेन अनाजों के बड़े उत्पादक और निर्यातक हैं। दोनों देशों के बीच जारी लड़ाई की वजह से यदि सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा पैदा होती है तो कीमतें बढ़ सकती हैं। पारले प्रोडक्ट्स के सीनियर कैटेगरी हेड मयंक शाह ने शुक्रवार को सीएनबीसी-टीबी18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा है, 'कल (24 फरवरी को) पाम ऑयल की कीमतें करीब 140 रुपये प्रति किलो थीं और इसकी वजह से अधिकतर खाद्य कंपनियों की बॉटमलाइन पर दबाव बढ़ रहा है। इसलिए, सिर्फ खाद्य तेल ही नहीं, यहां तक कि गेहूं भी, क्योंकि यूक्रेन और रूस गेहूं के भी बड़े निर्यातक हैं। इसलिए दोनों ही प्रमुख कच्चे माल की वस्तुएं हैं जो फूड प्रोडक्ट के लिए जरूरी हैं। '

'दुनिया का एक-चौथाई गेहूं रूस-यूक्रेन निर्यात करता है'
उनकी चिंता इस वजह से है, क्योंकि रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है, जो कि गेहूं, मक्का और जौ का दुनिया का एक बड़ा निर्यातक है। खुद रूस तो दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है और इसके अंतरराष्ट्रीय निर्यात में उसकी 18 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। विश्व का एक-चौथाई से ज्यादा गेहूं निर्यात रूस और यूक्रेन के भरोसे है। इस हफ्ते अभी तक ही गेहूं की अंतरराष्ट्रीय कीमत 15% से ज्यादा बढ़ चुकी है।

'कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है'
इसके बाद पारले प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ अधिकारी अपनी कंपनी के कीमतों के मसले पर आए। उन्होंने कहा है कि कंपनी ने इसी साल 6 से 7% दाम बढ़ाए हैं। लेकिन, उन्होंने बताया कि पाम ऑयल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं, जिससे लागत प्रभावित हो रही है। वो बोले, 'हालांकि हमने 6-7% दाम बढ़ाए हैं, मुझे नहीं लगता कि ज्यादातर कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत में वृद्धि को संभालने की कोई और गुंजाइश है, क्योंकि मार्जिन के नाम पर उनके पास जो भी थोड़ा-बहुत था, जिससे वे कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमतों को संभाल सकते थे, वह पहले ही कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद अधिकतर कंपनियों के लिए ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल होगा। इसलिए, यदि यही स्थिति बरकरार रही तो आपको कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।'

पारले प्रोडक्ट की कीमतों में भारी उछाल की आशंका ?
हालांकि, पारले अपने प्रोडक्ट की कीमतों के बारे में संकेत दे रहा है कि अगले दो-तीन महीने तक तो फिर भी ठीक है। शाह के मुताबिक, 'हालांकि हम भारत में अपने स्टॉक से ठीक स्थिति में हैं, गेहूं की विदेशी बाजार से मांग बढ़ेगी, क्योंकि रूस और यूक्रेन से होने वाली आपूर्ति प्रभावित होगी। जिसकी वजह से, हम संभवतः आगे चलकर, गेहूं के आटे या गेहूं की कीमतों में भी वृद्धि देखेंगे।' यानि फूड प्रोडक्ट पर लागत बढ़ने से उनकी कीमतों में और ज्यादा इजाफे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

नवंबर में कीमतें बढ़ाने पर क्या कहा था ?
क्योंकि, पिछले साल नवंबर में ही पारले ने प्रमुख कच्चे माल पाम ऑयल की कीमतों में साल-दर-साल में दो गुनी उछाल की वजह से लागत बढ़ने के नाम पर प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ाई थी। इसके अलावा उसने पैकेजिंग और लेमिनेट की लागत भी 20 और 35 फीसदी बढ़ने की बात कही थी। इसके पीछे इन चीजों की किल्लत भी एक वजह बताई गई थी। ऊपर से ईंधन की कीमतों में भी 25 से 30 फीसदी का इजाफा हुआ, जिससे ढुलाई का खर्चा भी बढ़ गया। इधर कंपनी ने कहा है कि ग्रामीण इलाकों में पारले प्रोडक्ट की मांग भी बढ़ने लगी है।












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